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प्रेमी ड्रैकुला: बूढ़े और घिनौने किरदार से लेकर इश्क के चेहरे तक सफर

Sun, 22 Mar 2026 06:36 AM IST
Devesh Tripathi स्टैनली स्टेपनिक, द न्यूयॉर्क टाइम्स
स्टैनली स्टेपनिक, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 22 Mar 2026 06:36 AM IST
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सार
ब्रैम स्टोकर ने 1897 में जब काउंट ड्रैकुला को रचा, तब से लेकर 2026 में प्रदर्शित ड्रैकुला पर आधारित फिल्म तक यह किरदार एक लंबा सफर तय कर चुका है। इस पिशाच की शख्सियत में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हिंसा और रिश्तों को लेकर आम सोच में आ रहे बदलावों की झलक मिलती है। अतीत की परतों से गुजरता यह शैतान अब एक प्रेमी भी बन गया है।
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प्रेमी ड्रैकुला - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

ड्रैकुला के लिए अक्सर ‘पिशाचों का देवता’ और ‘पिशाचों का बादशाह’ जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मूल रूप से ब्रैम स्टोकर के 1897 के उपन्यास में सामने आया था। इस किरदार की शोहरत ज्यादातर उसके 200 से ज्यादा बार फिल्मों में फिर से जिंदा होने की वजह से है—जिसकी शुरुआत 1921 में 'ड्रैकुलाज डेथ' से हुई थी और हाल ही में ल्यूक बेसन की फिल्म 'ड्रैकुला' आई है, जिसका प्रीमियर फरवरी 2026 में अमेरिका में हुआ। बेसन की इस फिल्म को, निजी जुनून पर खास जोर की वजह से काफी सराहा गया है। इसका मूल नाम 'ड्रैकुला : ए लव टेल' (ड्रैकुला : एक प्रेमकथा) था। इस फिल्म का मुख्य किरदार महज एक राक्षस ही नहीं, बल्कि एक प्रेमी भी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस फिल्म को 'बेहद बचकानी' बताया और अभिनेता कैलेब लैंड्री जोन्स द्वारा निभाए गए इस मशहूर राक्षस के किरदार को 'बेहद नाटकीय' कहा—जिसमें वह एक खलनायक कम और प्यार में डूबा एक माहिर कलाकार ज्यादा नजर आता है। इस बीच, लंदन में, सिंथिया एरिवो के नए वेस्ट एंड प्रोडक्शन में 'ड्रैकुला, एक प्रेमी के रूप में' भी एक थीम के तौर पर दिखाया गया है, जिसमें वह 'काउंट' और 22 अन्य किरदारों की भूमिका निभाती हैं। वाशिंगटन, डीसी से आए एक छोटे, हालिया प्रोडक्शन, जिसका शीर्षक 'ड्रैकुला: ए कॉमेडी ऑफ टेरर' है, में भी 'काउंट' को इसी तरह पेश किया गया है, लेकिन इसमें एक बेहद मजेदार और लीक से हटकर एलजीबीटीक्यू अंदाज भी शामिल है। एक समय ड्रैकुला को लंपट, बूढ़ा और घिनौने किरदार के रूप में दिखाया जाता था, लेकिन तब से उसने एक लंबा सफर तय किया है और अब उसे प्रेमी के रूप में दिखाया जाता है, जो कुछ हद तक प्यार, लिंग और यौनिकता के प्रति बदलती सोच का नतीजा है। जब स्टोकर ने पहली बार 'ड्रैकुला' प्रकाशित किया, तो यह पात्र साहित्यिक पिशाचों की एक लंबी कतार के अंत में सामने आया—जॉन पोलिडोरी की 'द वैम्पायर' (1819) के लॉर्ड रूथवेन से लेकर 'वार्नी द वैम्पायर' (1845-1847) के सर फ्रांसिस वार्नी तक। ये सभी पिशाच जर्जर, घिनौने और शिकारी किस्म के बूढ़े आदमी थे, और स्टोकर का 'काउंट ड्रैकुला' भी इनसे अलग नहीं था। उपन्यास में, एक पात्र ड्रैकुला के खुरदुरे हाथों, उसकी त्वचा के असाधारण पीलेपन और उसके बेहद नुकीले कानों का जिक्र करता है; उसके ऊंचे, गुंबद जैसे माथे पर बाल बहुत कम थे। यहां तक कि उसकी सांस भी बदबूदार थी।


'ड्रैकुला' पर बनी पहली फीचर फिल्म 1922 की जर्मन फिल्म 'नोस्फेरातु: ए सिंफनी ऑफ हॉरर' थी, जिसमें स्टोकर के उपन्यास से कहानी और किरदारों को लिया गया था। इसमें, काउंट ओरलॉक (जो असल में ड्रैकुला का एक नकली रूप है) चूहे जैसा, बहुत दुबला-पतला और पीला दिखता है। स्टोकर के ड्रैकुला या काउंट ओरलोक के बारे में बहुत कम बातें उसके 'प्रेमी' होने का संकेत करती हैं, हालांकि जिस तरह से वह अपने पीड़ितों पर हमला करता है और उनका पीछा करता है, उसमें एक अंतर्निहित कामुकता को तार्किक रूप से देखा जा सकता है।


ड्रैकुला को 'प्रेमी'  का दर्जा परदे पर बहुत बाद में मिला। इसका सबसे पहला उदाहरण 1944 की फिल्म हाउस ऑफ फ्रेंकस्टीन में देखने को मिलता है, जिसमें रीटा (ऐनी ग्विन) शुरू में ड्रैकुला की मौजूदगी से घबरा जाती है। पर बाद में, जब ड्रैकुला उसकी तर्जनी उंगली में एक अंगूठी पहनाता है—जो जादुई रूप से उसकी उंगली में फिट बैठती है—तो उसे महसूस होता है कि अब उसे 'बिल्कुल भी डर नहीं लग रहा है।' इस दृश्य के अंत में, जब वह बड़ी चाहत से उसकी आंखों में देखती है, तो वह कहता है कि अगले दिन वह उसे लेने आएगा—मानो यह सब कोई पनपता हुआ प्रेम-मिलन हो। ड्रैकुला के किरदार का विकास, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद लिंग, यौनिकता और हिंसा के बारे में आम सोच में आए बदलावों को दिखाता है। यह वह दौर था, जब लोकप्रिय संस्कृति ने धीरे-धीरे एकल परिवार की केंद्रीयता को कमजोर करना शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे किताबों, फिल्मों और टीवी शो में वासना, बेवफाई, समलैंगिक संबंधों और तलाक जैसे विषयों को दिखाया जाने लगा, पिशाचों (वैम्पायरों) की छवियां और भी ज्यादा जटिल होती गईं। उदाहरण के लिए, 1958 की फिल्म 'ड्रैकुला' में ड्रैकुला (क्रिस्टोफर ली) एक शिकारी है, जो विवाहित औरतों के घरों में घुस जाता है। लेकिन, इसमें रोमांस की भी थोड़ी झलक है। एक खास दृश्य में, वह मीना होल्मवुड (मेलिसा स्ट्रिबलिंग) पर हमला करता है। आखिर में मीना मान जाती है।

1970 के दशक तक, पिशाचों से जुड़ी फिल्मों, कॉमिक पुस्तकों में कामुकता ज्यादा स्पष्ट विषय बन गई थी, जो मानवीय कामुकता के प्रति दृष्टिकोण में आए व्यापक सांस्कृतिक बदलावों को दर्शाती थी। 'वैम्पायरेला' जैसी कॉमिक बुक्स ने वैम्पायर को ताकत के एक अत्यधिक कामुक, स्त्री-सुलभ और मादक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि 'द वैम्पायर लवर्स' जैसी फिल्मों ने समलैंगिकता जैसे विषयों को खंगाला। काउंट ड्रैकुलाज ग्रेट लव (1973) फिल्म में ड्रैकुला कैरन नाम की लड़की के प्यार में डूब जाता है, लेकिन वह लड़की उसके प्यार को ठुकरा देती है। फिल्म के आखिर में, प्यार में डूबा हुआ यह पिशाच दुख भरे स्वर में कहता है, 'पहली बार, प्यार ने ड्रैकुला की जिंदगी का अंत कर दिया है,' और यह कहने के बाद वह अपने ही हाथों से अपने दिल में एक कील ठोक लेता है। इसके कुछ ही समय बाद, टीवी के लिए बनी एक फिल्म ‘ड्रैकुला’ में ड्रैकुला को अपनी मृत पत्नी की तलाश करते हुए दिखाया गया है। 'मरे हुए प्रेमी की तलाश' भविष्य की फिल्मों का एक मुख्य विषय बन गई। उदाहरण के लिए, फ्रांसिस फोर्ड कोपोला की फिल्म 'ब्रैम स्टोकर की ड्रैकुला' (1992) में, दर्शकों को पता चलता है कि ड्रैकुला अपनी मृत पत्नी के पुनर्जन्म की तलाश में ट्रांसिल्वेनिया छोड़कर इंग्लैंड चला जाता है। गॉथिक सोप ओपेरा ‘डार्क शैडोज’ (1966-1971) में, बार्नबास कॉलिन्स (जोनाथन फ्रिड) नाम का किरदार अपनी बहुत पहले मर चुकी प्रेमिका, जोसेट, के साथ अपने रोमांस को दोहराने की कोशिश करता है; इसके लिए वह मैगी इवांस (कैथरीन ली स्कॉट) नामक एक लड़की के जीवित शरीर को अलौकिक शक्तियों से नियंत्रित करने का प्रयास करता है, ताकि वह जोसेट की तरह व्यवहार करे। एक वैम्पायर का अपने खोए हुए प्यार के लिए तड़पना—विशेष रूप से ऐसे प्यार के लिए, जो मर चुकी हो—एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतीक था।

1970 के दशक की कॉमिक बुक सीरीज 'द टोम्ब ऑफ ड्रैकुला' में, काउंट की एक इन्सानी पत्नी है, जिसका नाम डोमिनी है; जादुई तरीकों से, वह उसके साथ एक बच्चा भी पैदा कर पाता है। भले ही 'प्रेमी ड्रैकुला' का कॉन्सेप्ट अब काफी घिसा-पिटा-सा लगने लगा हो, लेकिन हर माहौल में ढल जाने वाला यह 'काउंट' अपनी पारंपरिक डराने वाली भूमिकाओं के लिए भी हमेशा तैयार रहता है, हाल ही में रॉबर्ट एगर्स की फिल्म 'नोस्फेरातु' (2024) में भी वह इसी रूप में नजर आया है। चाहे वह एक प्रेमी हो, एक दानव हो, या फिर दोनों ही हो—ड्रैकुला असल में 'वैम्पायर' के उस विचार का प्रतिनिधित्व करता है, जो मानवीय अनुभवों के लिए एक आईने का काम करता है। रोमांस कभी-कभी प्यार और दर्द के बीच झूलता रहता है। जुनून कभी-कभी डरावना भी हो सकता है। इसलिए, अगली बार जब आप पर्दे पर ड्रैकुला को रोमांस करते देखें, तो हैरान न हों।
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