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अंतरराष्ट्रीय: खनिज संपदा से भरपूर भूभाग पर कई देशों की नजरें, आखिर ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदना क्यों चाहते हैं?

Sat, 25 Jan 2025 05:09 AM IST
दीपक कुमार शर्मा स्कॉट एल. मॉन्टगोमेरी
स्कॉट एल. मॉन्टगोमेरी Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 25 Jan 2025 05:09 AM IST
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सार
डेनमार्क बेशक ग्रीनलैंड को बिकाऊ न माने, लेकिन खनिज संपदा से भरपूर भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण इस क्षेत्र पर अमेरिका ही नहीं चीन समेत कई देशों की नजर है।
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Donald Trump sparked diplomatic row by saying acquisition of Greenland necessary for US security
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- व्हाइट हाउस

विस्तार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर कूटनीतिक विवाद को जन्म दिया है कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का अधिग्रहण किया जाना जरूरी है। इस पर डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा, ग्रीनलैंड हमारे आधिपत्य में है और यह बिकाऊ नहीं है। ग्रीनलैंड में ट्रंप की रुचि कोई नई नहीं है। इसको लेकर उन्होंने वर्ष 2019 में भी अपनी इच्छा जाहिर की थी। हालांकि, अभी स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में ट्रंप किस तरह अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहनाते हैं। लेकिन प्राकृतिक संसाधनों और आर्कटिक से जुड़े भू-राजनीतिक संघर्षों के विशेषज्ञ के रूप में मेरा मानना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से ग्रीनलैंड के महत्व को चार संदर्भों में देखा जा सकता है।



खनिज : ग्रीनलैंड प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां सोना व प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं के अकूत भंडार हैं, तो जस्ता, लोहा, यूरेनियम, तांबा, निकल व कोबाल्ट सहित नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और प्रेसियोडायमियम जैसे दुर्लभ तत्व भी मौजूद हैं। डेनमार्क व ग्रीनलैंड के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण 2023 के मुताबिक, बर्फ की चादर के निरंतर पीछे हटने पर नए भंडार मिलेंगे। ग्रीनलैंड में मौजूद दुर्लभ तत्व न केवल सौर और पवन ऊर्जा आधारित तकनीकों, बल्कि सैन्य अनुप्रयोगों के लिए भी आवश्यक हैं।


चीन की नजर: करीब एक दशक से ग्रीनलैंड पर चीन भी अपनी नजरें गढ़ाए बैठा है। वर्ष 2015 में ग्रीनलैंड के वित्त और आंतरिक मंत्री विट्स क्यूजौकित्सोक ने खनन, जलविद्युत, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में संभावित निवेश पर चर्चा करने के लिए चीन का दौरा किया था। एक फर्म, चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी ने दो हवाई अड्डे बनाने के लिए बोली लगाई, एक राजधानी नुउक में, दूसरा इलुलिसैट में। दूसरी चीनी फर्म, जनरल नाइस ग्रुप ने उत्तर-पूर्वी ग्रीनलैंड में एक परित्यक्त डेनिश नौसैनिक अड्डे को खरीदने की पेशकश की है, जबकि चीनी विज्ञान अकादमी ने नुउक के पास एक स्थायी अनुसंधान केंद्र और एक उपग्रह ग्राउंड स्टेशन बनाने की बात की है।

अमेरिका के दीर्घकालिक हित : वर्ष 1946 से ही अमेरिका की ग्रीनलैंड में रुचि रही है, जब उसने 10 करोड़ डॉलर के सोने की पेशकश की थी। उस वक्त डेनमार्क ने प्रस्ताव नकार दिया था। 1950 के दशक में अमेरिका ने आर्कटिक सर्कल के उत्तर में करीब 1,200 किलोमीटर दूर थुले वायुसेना बेस बनाया। 2023 में इसका नाम बदलकर पिटफिक स्पेस बेस कर दिया गया।

भू-राजनीतिक महत्व : अमेरिका की सबसे उत्तरी सैन्य सुविधा पिटफिक ने मिसाइल चेतावनी, रक्षा और अंतरिक्ष निगरानी व उपग्रह कमांड मिशन प्रदान करने के लिए रडार और ट्रैकिंग क्षमताओं को अद्यतन किया है। लेकिन चीन का यह दावा कि इस क्षेत्र में नेविगेशन, मछली पकड़ने, ओवरफ्लाइट और तेल व गैस परियोजनाओं में निवेश करने का उसका अधिकार है, अमेरिका को चिंतित करता है। ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से उत्तरी समुद्री मार्ग और उत्तर पश्चिमी मार्ग, दो आर्कटिक शिपिंग मार्गों के बीच स्थित है, जिसका महत्व समुद्री बर्फ के सिकुड़ने के साथ बढ़ रहा है। 2050 तक मध्य आर्कटिक महासागर के माध्यम से एक ट्रांसपोलर समुद्री मार्ग खुलने की संभावना है। लेकिन ग्रीनलैंड की करीब साठ हजार की आबादी इसे स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में देखना चाहती है। बीजिंग की इच्छा भी ग्रीनलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र बनने देने में है, जिससे इसकी निर्भरता नाटो और यूरोपीय देशों पर कम हो जाएगी और चीन अपने हित स्वतंत्र सरकार से पूरे करवा सकेगा।  (-द कन्वर्सेशन से)

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