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समाज: डेटिंग साइट्स और ऐप्स के जमाने में प्रेम, जिम्मेदारियों से बचने का नया रास्ता

Tue, 18 Apr 2023 09:12 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Tue, 18 Apr 2023 09:12 AM IST
सार

वर्ष 2021 में 3.1 करोड़ लोग भारत में डेटिंग साइट्स और ऐप्स का उपयोग करते पाए गए, जिनमें 67 प्रतिशत पुरुष थे।
 

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demerit of dating apps relationship new way to avoid responsibilities in life
Dating apps - फोटो : Social Media

विस्तार

इन दिनों डेटिंग साइट्स और ऐप्स का बोलबाला है। कुछ साल पहले तक लगभग हर सेलिब्रिटी से एक ही सवाल किया जाता था कि क्या आप टिंडर पर हैं। टिंडर बेहद लोकप्रिय साइट है। प्रेम की यह परिभाषा अब चौंकाती नहीं है, जहां आप किसी का फोटो देखकर उसे चुनते हैं, उससे मिलते हैं, घूमते-फिरते हैं और जब चाहे छोड़ सकते हैं, लतिया सकते हैं।

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पुलिस भले ही स्त्रियों के लिए गाइडलाइंस जारी करती रहे कि किसी अनजान आदमी से संपर्क आपकी सुरक्षा के लिए खतरनाक है, लेकिन बहुत-सी स्त्रियां इसे एम्पावरमेंट कह रही हैं। उनके अनुसार जब वे किसी को छोड़ती हैं, तो खुद को बहुत ताकतवर समझती हैं। टिंडर, बम्बल, आकूपाइड, एस्ले, ट्रूली-मैडली, हिन्ज से होती हुई यह यात्रा ग्लीडेन तक आ पहुंची है। ग्लीडेन शादीशुदा लोगों के लिए है। इसे फ्रांस की महिलाओं ने बनाया है, बल्कि इसमें काम करने वाली भी सब महिलाएं ही हैं। महिलाओं के लिए यह मुफ्त है, पुरुषों को पैसे देने पड़ते हैं। शादीशुदा महिलाओं में यह बहुत लोकप्रिय है। इस पर भारत की बहुत-सी महिलाएं हैं। और इसमें बंगलूरू अव्वल शहर है।
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दुनिया भर की डेटिंग साइट्स और ऐप्स भारत में आ पहुंचे हैं। कोरोना के दौरान जब लोग घरों में बंद थे, तब डेटिंग साइट्स और ऐप्स के इस्तेमाल ने बहुत जोर पकड़ा। वर्ष 2021 में 3.1 करोड़ लोग भारत में इन साइट्स और ऐप्स का उपयोग करते पाए गए। इनमें 67 प्रतिशत पुरुष थे। वर्ष 2020 में डेटिंग साइट्स का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या में बारह प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। महिलाएं पच्चीस लोगों से बातें कर रही थीं और पुरुष दस से। अमेरिका के बाद भारत इन साइट्स और ऐप्स का सबसे बड़ा बाजार है।
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प्रेम के लिए भावुकता, कोमलता, मिलने, देखने की चाहत आदि बातें जैसे पुरानी हो गई हैं। आज न देवदास और गुनाहों के देवता जैसे उपन्यास लिखे जा सकते हैं, न ही उन पर कोई फिल्म ही बनाएगा। आज प्रेम में भावनात्मकता के मुकाबले देहवाद का बोलबाला है। अमरता का उसका सिद्धांत इस विचार के आगे कहां टिक सकता है, जहां आज रिलेशनशिप में हैं, कल सिंगल हैं और परसों फिर रिलेशनशिप में होंगे। कई बार तो लगता है कि प्रेम और वन नाइट स्टैंड का भेद भी मिट चुका है। प्रेम में त्याग की भावना हमारे जीवन से गायब हो गई है।  इसे ओल्ड फैशन्ड और जेनरेशनल गैप भी कहा जाने लगा है। डेटिंग साइट पर मिलने की बात कई बार शादी तक भी जा पहुंचती है, पर देखा गया है कि ऐसे संबंध और शादी बहुत दिनों तक चलती नहीं। शादियां तो अब इतनी ज्यादा टूटने लगी हैं कि लगता है कि अगली सदी तक शायद लोग शादी के बारे में सोचना ही भूल जाएंगे।


दिलचस्प यह भी है कि स्त्री विमर्श को भी इन बातों से कोई शिकायत नहीं। आज 'माई चॉइस', 'माई लाइफ', 'मेरी आजादी' आदि नारों ने शोषण की परिभाषा बदल दी है। हालांकि कानून की नजर में आज भी शोषण की वे ही परिभाषाएं मौजूद हैं, जिन्हें अब पुराना कहा जा रहा है। एक तरफ नए बलात्कार कानून के अनुसार, किसी स्त्री की तरफ चौदह सेकंड तक देख लेना मना है, यदि ऐसा करते पाए जाएंगे, तो जेल हो जाएगी, दूसरी तरफ डेटिंग साइट्स की बढ़ती लोकप्रियता बता रही है कि युवाओं में वे संबंध अधिक जगह बना रहे हैं, जहां जीवन में किसी तरह की जिम्मेदारी न हो।    

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