फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Defeat of Pakistan's strategy

उल्टी पड़ी पाकिस्तान की रणनीति : पाक पर लगातार दबाव बनाए रखना ही भारत के हित में

Fri, 19 Jul 2019 03:33 AM IST
मारूफ रजा मारूफ रजा
मारूफ रजा Published by: मारूफ रजा Updated Fri, 19 Jul 2019 03:33 AM IST
विज्ञापन
Defeat of Pakistan's strategy
आईसीजे - फोटो : a

नीदरलैंड्स के द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के मामले में जो फैसला सुनाया है, वह भारत के हक में है और इसे भारत की एक बड़ी जीत माना जा सकता है। आईसीजे ने फिलहाल जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है और पाकिस्तान को निर्देश दिया है कि वह फांसी की सजा पर पुनर्विचार करे। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद फैलाने के आरोप में 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी।


loader

नीदरलैंड्स के द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव के मामले में जो फैसला सुनाया है, वह भारत के हक में है और इसे भारत की एक बड़ी जीत माना जा सकता है। आईसीजे ने फिलहाल जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है और पाकिस्तान को निर्देश दिया है कि वह फांसी की सजा पर पुनर्विचार करे। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद फैलाने के आरोप में 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी।

पाकिस्तानी सैन्य अदालत के फैसले के खिलाफ भारत ने आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था। भारत को जब यह बात समझ में आ गई कि इस मसले को लेकर पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाएगा कि भारत कुलभूषण जाधव के जरिये बलूचिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था, तब उसने आईसीजे में जाने का फैसला किया। हालांकि भारत का रुख कूटनीतिक और वैधानिक तौर पर पहले से ही सही था और यही साबित करने भारत आईसीजे में गया था। सोलह में से पंद्रह जजों ने भारत के पक्ष में फैसला दिया।

वियना संधि में यह निर्देश दिया गया है कि अगर किसी भी दूसरे देश के नागरिक को कोई देश पकड़ेगा, तो उसे उसके देश के राजनयिकों से मिलने की इजाजत देनी पड़ेगी और उसे अपने बचाव के लिए हर तरह की सुविधा देनी होगी। यह बात तो पाकिस्तान भी मंजूर कर चुका है कि कुलभूषण जाधव का पासपोर्ट भारत का था। तो सवाल उठता है कि उसने कुलभूषण को भारतीय राजनयिक से मिलने क्यों नहीं दिया।

इसी मसले पर भारत ने पाकिस्तान पर यह आरोप लगाया था कि वह इस मामले में न केवल वियना समझौते का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि मानवाधिकार का भी उल्लंघन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने अपने फैसले में भारत के इस आरोप को सही ठहराते हुए पाकिस्तान से जाधव को न केवल राजनयिक पहुंच देने को कहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान ने इस मामले में वियना संधि का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान ने अब तक कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच की सुविधा नहीं दी थी।

पाकिस्तान का यह कहना था कि कुलभूषण जाधव एक आतंकवादी है, जिसे पाकिस्तान की सैन्य अदालत (सिविल कोर्ट ने नहीं) ने फांसी की सजा सुनाई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक देश है या सैन्य तानाशाही शासन वाला देश है। यहीं पर एक तर्क यह दिया जा सकता है कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत का फैसला उसके अपने नागरिकों को मंजूर होगा, लेकिन वह दूसरे देश के नागरिकों पर उसका फैसला नहीं थोप सकता।

जाधव को क्षमा याचना का मौका भी नहीं दिया गया। हालांकि पाकिस्तान में एक हजार से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जिनमें दया याचिका पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पाकिस्तान चाहता था कि इस मसले का डंका बजाकर वह भारत को शर्मिंदा करेगा, लेकिन यह मामला उसी के लिए उल्टा पड़ गया। अब तक पाकिस्तान के झूठ बोलने के बारे में बातें होती थीं, लेकिन आईसीजे के फैसले से इस पर कानूनी मुहर लग गई है कि वह वाकई झूठ बोलता है, क्योंकि उसने भारत के खिलाफ जितने मुद्दे उठाए, उसे आईसीजे ने खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव के मामले पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। जिस सैन्य अदालत ने जाधव को फांसी की सजा सुनाई थी, उसकी समयावधि तो खत्म हो गई, क्योंकि उसका गठन तीन वर्षों के लिए ही होता है। अब यह पाकिस्तान पर है कि वह फिर से सैन्य अदालत का गठन करे या सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई करे। होना तो यही चाहिए कि इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में हो और भारत सरकार को कुलभूषण के लिए वकील खड़ा करने का मौका दिया जाए। अगर ऐसा होता है, तो चार-पांच साल और यह मामला खिंच सकता है, और अगर भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा, तो अदालत के फैसले के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।

इसलिए भारत के लिए यह जरूरी है कि वह पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखे। भारत को यह नहीं सोचना चाहिए कि आईसीजे ने फैसला दे दिया है, तो पाकिस्तान उसी के अनुसार काम करेगा। पाकिस्तान पर जब तक दबाव में नहीं आता है, तब तक वह ऐसा कुछ नहीं करता है। हाफिज सईद को जेल में बंद करना, एयरस्पेस खोलने जैसे कदम भी उसने अमेरिकी दबाव और अपनी वित्तीय चुनौतियों आदि के कारण उठाए हैं।

बलूचिस्तान में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के आरोप पर भारत ने सीधे पाकिस्तान से पूछा कि इस आरोप को सही साबित करने के लिए उसके पास अगर कोई सबूत हो, तो वह पेश करे। आईसीजे में भारत ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उसकी प्रति तक भारत को उपलब्ध नहीं कराई गई है, ताकि यह पता चले कि किस आधार पर जाधव को यह सजा सुनाई गई है। लेकिन उसके पास जाधव के खिलाफ कोई सबूत हो, तब तो वह पेश करे! जिस बलूचिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान ने जाधव को फांसी की सजा सुनाई है, उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का यह अच्छा मौका है।

बलूचिस्तान की समस्या इसलिए पैदा हुई, क्योंकि वहां पाकिस्तान ने मानवाधिकार का भारी उल्लंघन किया है। मानवाधिकार संगठन ने 2014 के बाद ऐसी कई कब्रें ढूंढ निकाली हैं, जहां पर लोगों को मार-मारकर दबा दिया गया था। जैसे ही यह मामला सामने आया, पाकिस्तान की सेना ने उस इलाके को सील कर दिया। बलूचियों के मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने पर ही दबाव में आकर वह पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में कमी करेगा।

भारत को दबाव बनाए रखकर पाकिस्तान को यह संदेश देना चाहिए कि जब तक वह अपने में सुधार नहीं करेगा, तब तक उससे बातचीत नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने लाल किले से एक बार बलूचिस्तान के मसले का जिक्र किया था, लेकिन बाद में इसे उठाने से हम झिझक गए। लोगों को सरकार से यह सवाल पूछना चाहिए कि बलूचिस्तान का मुद्दा क्यों नहीं उठाया जा रहा। पाकिस्तान की पहचान ही भारत के खिलाफ दुश्मनी को लेकर बनी है, तो उससे दोस्ती की उम्मीद करना ही बेकार है। उस पर निरंतर दबाव बनाए रखना ही भारत के हित में है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed