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समाज : इन्फ्लुएंसर की दुनिया का स्याह सच, चकाचौंध और भोग-विलास की 'बेईमान'चाहत ले जा रही उजालों से दूर

Wed, 04 Jun 2025 06:48 AM IST
Advaita Kala अद्वैता काला
Updated Wed, 04 Jun 2025 06:48 AM IST
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सार
ज्योति मल्होत्रा का मामला एक इन्फ्लुएंसर की दुनिया के अंधेरे पक्षों को उजागर करता है। यह सोशल मीडिया, राजसी जीवन की चाह और राष्ट्रीय सुरक्षा के जटिल त्रिकोण को दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट है कि डिजिटल युग जासूसी और सामाजिक व्यवहार के पारंपरिक प्रतिमानों को कैसे बदल रहा है।
 
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dark truth of world of influencers, desire for glamour and luxury is leading to dishonesty
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : freepic

विस्तार

हरियाणा की रहले वाली ट्रैवल व्लॉगर ज्योति मल्होत्रा की हाल ही में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में हुई गिरफ्तारी ने देश के सुरक्षा प्रतिष्ठानों और समाज में भी खलबली मचा दी है। चुलबुली ज्योति या जो, जिस नाम से वह सोशल मीडिया पर जानी जाती है, एक औसत यूट्यूबर इन्फ्लुएंसर के रूप में सामने आती है, जो अब तक स्वतंत्रता और अपने अनुभवों पर आधारित जिंदगी जी रही थी। लेकिन अब जैसा हम देख रहे हैं, यह मामला यूट्यूबरों की दुनिया के अंधेरे पक्षों को उजागर करता है, जो इन्फ्लुएंसर की पहचान और पैसे से जुड़ा है। यह मामला सोशल मीडिया, राजसी जीवन की चाह और राष्ट्रीय सुरक्षा के जटिल त्रिकोण को इंगित करता है। इससे यह भी स्पष्ट है कि डिजिटल युग जासूसी और सामाजिक व्यवहार के पारंपरिक प्रतिमानों को कैसे बदल रहा है।



मल्होत्रा की प्रोफाइल समकालीन आदर्श के अनुरूप है :  एक युवा जीवनशैली-उन्मुख यात्री, जो अपनी यात्राओं का रिकॉर्ड रखने के लिए यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और स्नेपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है। सुनने में यह बेहद सरल और सामान्य लगता है। पाकिस्तान की यात्राओं को प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाली उसकी सामग्री (कंटेंट), सौम्य पर्यटन और सांस्कृतिक रुचि के साथ मेल खाती प्रतीत होती है। हालांकि, पूर्व सुरक्षा विशेषज्ञ जोर देते हैं कि इस तरह की खुली गतिविधियों का इस्तेमाल गुप्त अभियानों के लिए किया जा सकता है और कथित तौर पर उसके मामले में ऐसा ही हुआ। धारणाओं के वैश्विक युद्ध में पाकिस्तान जैसे नाम मात्र के लोकतांत्रिक और नापाक इरादों वाले देश इन इन्फ्लुएंसरों को आसानी से उपलब्ध वस्तु के रूप में देखते हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों की सोच को आकार देने में किया जा सकता है।


पाकिस्तान की उसकी व्यापक यात्राएं और आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश को देखने का उसका गुलाबी चश्मा, पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों के साथ उसके निजी संबंध, जिस ओर इशारा करते हैं, उसी दिशा में बातें भी हो रही हैं। डिजिटल युग में खुद को खानाबदोश घुमक्कड़ और संस्कृति व्लॉगर के रूप में प्रस्तुत करना एक आवरण के रूप में काम कर सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्यक्तिगत अभिव्यक्ति, जुड़ाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करते हैं। फिर भी, जैसा कि मल्होत्रा के मामले से पता चलता है कि वे सौम्य बातचीत की आड़ में जासूसी की सुविधा भी देते हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ उसकी सहभागिता व सोशल मीडिया के जरिये राजनयिक कार्यक्रमों में भागीदारी, इन प्लेटफॉर्म के सचेत उपयोग के जरिये खुफिया उद्देश्यों से संबंध बनाने की आशंकाओं को ही जाहिर करती है। वह स्वतंत्र रूप से बातचीत करती दिखती है, कुछ का तो यहां तक कहना है कि उसने एक पाकिस्तानी व्यक्ति के साथ रोमांटिक समीकरण विकसित किया हुआ है। यह मामला बहुत चिंताजनक है और समाज में मौजूद कमजोरियों के प्रति हमारी आंखें खोलता है।

ज्योति मल्होत्रा का मामला एक सामाजिक बदलाव का उदाहरण है, जहां व्यक्ति अपनी पहचान खुद चुनते हैं और दूसरों को आकर्षित व प्रभावित करने के लिए एक जीवनशैली अपनाते हैं, और जिनमें से कुछ विदेशी एजेंसियों के हाथों के मोहरे बन जाते हैं। आरोप यह भी है कि ज्योति को न केवल संसाधन के रूप में विकसित किया गया, बल्कि वह अन्य भारतीय यूट्यूबरों को भी पाकिस्तानी एजेंटों के संपर्क में लाई। गिरफ्तारी के बाद उसके वीडियो देखने से ही महसूस होता है कि उसकी सोशल मीडिया गतिविधि व्यक्तिगत न होकर साजिशन थी। पाकिस्तान को एक अनुकूल रोशनी में दिखाने वाले कंटेंट का निर्माण धारणाओं को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।

लोकप्रिय संस्कृति और फिल्मों में हम यही उम्मीद करते हैं कि जासूसी में गुप्त बैठकें और गुप्त कार्य शामिल होते हैं, लेकिन असलियत यह है कि डिजिटल युग में जासूसी अक्सर सामान्य जीवनशैली और सामाजिक बातचीत के भीतर भी हो सकती है। मल्होत्रा की बार-बार विदेश यात्राएं, राजनयिक कार्यक्रमों में उसकी भागीदारी और पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ उसके संबंध यह प्रदर्शित करते हैं कि कैसे व्यक्तियों को सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के जरिये जान-बूझकर या अनजाने में विदेशी एजेंसियों द्वारा चुना जा सकता है। उसका मामला ‘सामाजिक अंतर्निहितता’ की समाजशास्त्रीय अवधारणा को रेखांकित करता है, जहां व्यक्तिगत संबंध और सांस्कृतिक जुड़ाव लोगों पर असर डालने के माध्यम के रूप में काम कर सकते हैं।

यात्रा का पहलू इस मामले को और जटिल बनाता है। गतिशीलता, गुप्त बैठकों, सूचनाओं के आदान-प्रदान और वैधता का भ्रम पैदा करने का अवसर प्रदान करती है। इस्लामाबाद, लाहौर और बाली की उसकी यात्राएं एक ऐसी जीवनशैली की ओर इशारा करती हैं, जो आरामदेह तो लगती है, लेकिन पर्दे के पीछे खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कमाई से कहीं ज्यादा प्रभावशाली जीवनशैली इन्फ्लुएंसरों के जीवन का एक अजीब पक्ष है। यूट्यूब वीडियो से जीविकोपार्जन होता है, लेकिन छवि के अनुरूप जीवनशैली को पेश करने का दबाव झेलने के लिए पैसे की जरूरत होती है। ज्योति जैसे लोग इस मामले में बेहद संवेदनशील होते हैं। पैसा, रोमांटिक रिश्ता, पाकिस्तानी, जोखिम इत्यादि मिलकर एक युवा और स्वतंत्र महिला के लिए आकर्षक कॉकटेल तैयार करते हैं। आगे की जांच से पूरी सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी, लेकिन यह सच है कि ये प्लेटफॉर्म एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, जहां व्यक्तिगत कहानियों, भावनात्मक बंधनों और सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शन की वस्तु बना दिया जाता है, जिनमें सच्चाई अक्सर धुंधली होती जाती है।

पाकिस्तान उच्चायोग के इफ्तार जैसे सामाजिक कार्यों में उसकी भागीदारी और पाकिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर सार्वजनिक टिप्पणियां सांस्कृतिक कूटनीति के जटिल प्रदर्शन को ही दर्शाती हैं। पहचान की राजनीति और अमन की आशा के समाजशास्त्रीय विचार में गुंथा पहलू लोगों को जासूसी जैसे नापाक उद्देश्यों की ओर प्रोत्साहित करता है। पूरे मामले को लेकर यह दृष्टिकोण कुछ अजीब लग सकता है। दरअसल, आज हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, वह बदल गई है, जहां सफलता और संपन्नता को संपत्ति, जीवनशैली, जुड़ाव और यात्रा के लेंस से देखा जा सकता है, जो आपको ‘क्लिक’ दिलाता है और यही जेल तक भी पहुंचा सकता है।

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