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संदेह के घेरे में क्रिकेट

Fri, 24 May 2013 09:33 PM IST
अरुण नेहरू
अरुण नेहरू Updated Fri, 24 May 2013 09:33 PM IST
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cricket in doubt

अभी मीडिया में स्पॉट फिक्सिंग से संबंधित खबरें भरी पड़ी हैं। तीन खिलाड़ी और दर्जन भर से ज्यादा सटोरिये गिरफ्तार किए गए हैं। जाहिर है, इसमें हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि जिस भी खेल में भारी पैसा लगा होगा, वह आपराधिक तत्वों को आकर्षित करेगा ही।

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आखिर इससे पहले हमने फुटबॉल, बास्केटबॉल, साइकिलिंग, बेसबॉल, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन जैसे खेलों को संदेह के घेरे में आते देखा ही है। क्रिकेट में तुलनात्मक रूप से फिक्सिंग के मामले कम ही थे, पर अब आईपीएल और ट्वंटी-20 में भारी पैसे के कारण फिक्सिंग का रोग काफी बढ़ गया है।
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अगर इस खेल का हर हिस्सा जांच के दायरे में आ जाए, तब भी हैरानी नहीं होगी। दरअसल लालच की कोई सीमा नहीं होती। मुझे नहीं लगता कि आईसीसी या बीसीसीआई खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने से ज्यादा सख्त कदम उठा पाएगी। यह दुखद स्थिति है, लेकिन सच्चाई है।
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इस वर्ष आईपीएल व्यापक रूप से सफल रहा है, लेकिन आगे जब भी मैच का कोई पल हमारी कल्पना से परे होगा, तो हमें लगेगा कि मैच फिक्स है। इसमें संदेह नहीं कि इस बार आईपीएल में कई मैचों के नतीजे आश्चर्यजनक रहे।

क्रिकेट आश्चर्यों का ही खेल है, पर दुर्भाग्य से अब इस खेल पर संदेह की छाया रहेगी। किसी एक खिलाड़ी को दोष देने का मतलब नहीं है, क्योंकि कोई नहीं जानता कि इसमें कितने लोग संलिप्त होंगे। सीबीआई और दिल्ली पुलिस की काफी आलोचना होती रही है, लेकिन सच यह है कि उनमें भी हमारी तरह अच्छे-बुरे लोग हैं।

जाहिर है, व्यापक मीडिया जांच के दायरे में होने के कारण बीसीसीआई और आईपीएल दबाव में होंगे। राजनीति, बॉलीवुड एवं क्रिकेट का एक साथ जुड़ाव उस पेट्रोल बम की तरह है, जो बस फटने ही वाला है। ऐसे में किसी पर दोषारोपण करने से पहले सावधानीपूर्वक अपने शब्दों को तौलने की जरूरत है।

हालांकि बीसीसीआई प्रमुख के दामाद गिरफ्तार किए जा चुके हैं, फिर भी जो कुछ सामने आया है, वह तो एक छोटा-सा हिस्सा है। सभी चाहते होंगे कि इन तीनों में से किसी क्षेत्र से एक या दो बड़े नाम सामने आएं। अगर ऐसा हुआ, तो यह मामला बेकाबू हो जाएगा। अनेक खेलों में ड्रग्स, कॉलगर्ल्स, आपराधिक गिरोहों एवं भारी वित्तीय पुरस्कार के मामले आए हैं, फिर भी वे खेल बचे रहे हैं, इसलिए क्रिकेट भी बचा रहेगा।

आईपीएल की ही बात करें, तो ज्यादातर क्रिकेटर इसमें संलिप्त नहीं हैं, पर कुछ लोगों के लालच का खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ेगा। बीसीसीआई और आईपीएल राष्ट्रीय सरकार की तरह हैं, क्योंकि इनमें सभी पार्टियों के शीर्ष स्तर का न सिर्फ प्रतिनिधित्व है, बल्कि ये खेल को कमोबेश नियंत्रित भी करते हैं। इसके बावजूद सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में बीसीसीआई को जैसी फटकार लगाई है, वह आश्वस्त करती है। नुकसान की भरपाई के लिए इस मुद्दे का त्वरित निपटारा जरूरी है।

इधर, चीन के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर आए, जो उनकी पहली विदेश यात्रा थी, जिसे सफल मानना चाहिए। दोनों देशों के सामने जितने मुद्दे हैं, उन सबके तत्काल समाधान की आप अपेक्षा नहीं कर सकते, पर दोतरफा कारोबारी समझौता और आंकड़ा एक सुखद भविष्य का संकेत देते हैं। चीनी प्रधानमंत्री ने सही कदम उठाया है। कोई भी वैश्विक विश्लेषक यह बताएगा कि अमेरिका, चीन और भारत अगले दो दशकों में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे।

जहां तक घरेलू राजनीति की बात है, तो बड़े दलों के लिए चुनाव तक का अंतरिम समय आसान नहीं है, क्योंकि मैदान खुला पड़ा है और शायद ही कोई कांग्रेस, भाजपा, तीसरे मोर्चे तथा सैद्धांतिक रूप से बाहरी समर्थन देने वाले दलों के भविष्य के बारे में निश्चित रूप से कुछ कह सकता है।

सत्ता के बिचौलिये अनिश्चितता महसूस करेंगे। भूलना नहीं चाहिए कि सत्तारूढ़ दल के पास दूसरी पार्टियों को रिझाने के लिए बहुत कुछ है। कैबिनेट मंत्रियों के पद तो सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं ही, कई अहम पदों पर भी राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं। इसके अलावा कई राज्यपालों, राज्यसभा सांसदों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के अध्यक्षों एवं लाभप्रद बैंकों के निदेशकों की भी नियुक्तियां होनी हैं।

ऐसे राजनेताओं, नौकरशाहों, वकीलों, उद्यमियों, चार्टेड एकाउंटेंटों एवं कर विशेषज्ञों की संख्या सैकड़ों में होगी। चुनाव से एक साल पहले हर स्तर पर हो रहे गठजोड़ों को देखना महत्वपूर्ण है। सक्रिय राजनेता अपनी राजनीतिक दीर्घजीविता के लिए अनुकूल सीट की तलाश करेंगे और कई लोग राज्यों में गठबंधन पर नजर रखेंगे। ऐसे में जटिल किस्म की राजनीतिक कवायद की अपेक्षा की जा सकती है।

इस समय देश भर में लू का कहर जारी है और तापमान 45 डिग्री से ऊपर चला गया है। लेकिन चीजों में सुधार दिख रहा है, क्योंकि अर्थव्यवस्था बेहतर काम करती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम है और सोने के आयात पर कुछ अंकुश लगने के कारण चालू खाते का घाटा भी तुलनात्मक रूप से कम हुआ है।


यदि मानसून समय पर आता है, तो हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। इस वर्ष पांच से साढ़े पांच फीसदी की विकास दर महत्वपूर्ण होगी और यदि हम इसे बनाए रखते हैं, तो यह एक चमत्कार होगा। इधर, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के पद से विनोद राय सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उम्मीद करनी चाहिए कि नए कैग पद के साथ न्याय करेंगे और हवाई अनुमानों से परहेज करेंगे।

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