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फिक्सिंग भले हुई, साख तो नहीं गिरी

Tue, 11 Jun 2013 09:18 PM IST
सहीराम
सहीराम Updated Tue, 11 Jun 2013 09:18 PM IST
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cricket fixing satire

साख ऐसे नहीं गिरती जी, जैसे कि विकेट गिरते हैं। ऐसे भी नहीं कि बस हवा चली और साख गिर गई। बल्कि हवा चलने से तो कई बार वह जम भी जाती है और बन भी जाती है।

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बल्कि सच पूछो तो अक्सर बन ही जाती है। इसीलिए आमतौर पर लोगों को इसका अफसोस रहता है कि देखो हवा नहीं चली। हवा नहीं बंधी। साख जमाने के लिए हवा को बांधना पड़ता है। खैर, आंधी में कई बार पेड़ की शाखाएं बिखर जाती हैं, पर राजन अपनी साख जमाने के लिए आंधी का इंतजार ही करते रहते हैं।
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तो जी, साख ऐसे नहीं गिरती, जैसे लोगों का ईमान गिरता है या जैसे क्रिकेट में विकेट गिरते हैं। इसीलिए क्रिकेटवाले कह रहे हैं कि क्रिकेट की साख नहीं गिरी है। भले ही क्रिकेट में फिक्सिंग हुई है, सट्टा भी खूब चला है, पर क्रिकेट की साख नहीं गिरी है।
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ठीक है, क्रिकेट खिलाड़ियों की गिरफ्तारियां हुई हैं। यह भी ठीक है कि बड़े-बड़े सट्टेबाज पकड़े गए हैं। मगर अब भी साख कायम है, ज्यों की त्यों। यह भी ठीक है कि आईपीएल की टीमों के मालिक तक पकड़े जा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि हां, हमने सट्टा खेला, पर क्रिकेट की साख नहीं गिरी है।

यह ठीक है कि भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान के व्यावसायिक हित हैं, पर क्रिकेट की साख नहीं गिरी है। यह भी ठीक है कि बीसीसीआई अध्यक्ष के दामादजी पकड़े गए हैं। अध्यक्ष साहब को भी किनारे कर दिया गया है, पर क्रिकेट की साख नहीं गिरी है। अलबत्ता अपनी साख फिर से जमाने के लिए अध्यक्ष साहब ने इस्तीफा भी नहीं दिया है।

वैसे भी जी, क्रिकेट की साख ऐसे नहीं गिरनेवाली, वह बड़ी पूंजी के, बिजनेस के खाद-पानी से पली-पोसी है। वह बड़े-बड़े उद्योगपतियों के लाड़-प्यार से पली-पोसी है। वह बड़े-बड़े नेताओं के प्यार और दुलार से पली-पोसी है। जब नेताओं से राजनीतिक पार्टियों की साख ही नहीं गिरती, तो क्रिकेट की साख वे कैसे गिरा देंगे।

सियासी दलोंवाले, खासतौर से सरकारवाले भी तो यही कहते हैं कि न पार्टी की साख गिरी, न सरकार की साख गिरी। भले ही एक के बाद एक बड़े-बड़े घोटाले हुए। मंत्रियों के इस्तीफे हुए। कई तो जेल भी गए।


पर इससे किसी की साख नहीं गिरी। आखिर सरकार भी तो बिजनेस के खाद-पानी से ही पाली-पोसी है। जब उसकी साख जमी हुई है, तो क्रिकेट की साख भी जमी रहेगी। पालन-पोषण अच्छा मिलता रहे, तो साख बची ही रहती है।

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