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Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Covid-19 No threat of new corona wave adopt better Respiratory Hygiene to avoid viral disease

कोविड: नई लहर का खतरा नहीं, वायरल बीमारी से बचने के लिए 'बेहतर श्वसन शिष्टाचार' अपनाने की जरूरत

Chandrakant Lahariya चंद्रकांत लहारिया
Updated Mon, 03 Apr 2023 06:23 AM IST
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सार
महामारी विज्ञान और वैज्ञानिक साक्ष्य आश्वस्त करते हैं कि भारत में नई राष्ट्रीय लहर का खतरा नहीं है। कोविड हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, जैसे कि अन्य श्वसन वायरस हैं। हमें नियमित अंतराल पर कोविड के मामलों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
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Covid-19 No threat of new corona wave adopt better Respiratory Hygiene to avoid viral disease
कोरोना महामारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोविड-19 महामारी को शुरू हुए तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं, तबसे हमने तीन राष्ट्रव्यापी लहरों के दौरान मानवीय पीड़ा और चुनौतियों के साथ-साथ समाज के हर स्तर पर मानवीय लचीलापन और टीकाकरण अभियान के कारण हालात सामान्य होते देखा है। वर्ष 2023 के प्रारंभ में कोविड के दैनिक मामले सौ से भी कम रह गए थे। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में कोविड के दैनिक 100 से कम मामलों में तीस गुना बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में एक दिन में 3,824 नए मामले दर्ज किए गए, जो बीते छह महीने में एक दिन में दर्ज सर्वाधिक नए मामले हैं। क्या यह कोविड की नई लहर की शुरुआत है या यह चिंता का कारण है?



महामारी विज्ञान और वैज्ञानिक साक्ष्य आश्वस्त करते हैं कि भारत में नई राष्ट्रीय लहर का खतरा नहीं है। 16 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन के तकनीकी सलाहकार समूह ने ओमिक्रॉन को अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट की बराबरी का श्रेणी बताया, जो पुराने वैरिएंट हैं। महामारी की शुरुआत के बाद से यह पहली बार है, जब दुनिया के किसी भी हिस्से में चिंताजनक वैरिएंट प्रसारित नहीं हो रहा है।


भारत में अभी संक्रमण फैला रहे एक्सबीबी. 1.16 सब-वैरिएंट को लेकर थोड़ी चिंता है। पर सभी वैरिएंट और सब-वैरिएंट एक जैसे महत्वपूर्ण नहीं हैं। महामारी की शुरुआत के बाद से, 700 से अधिक सब-वैरिएंट और पुनः संयोजक उप-वंश की सूचना है। हालांकि, केवल पांच को चिंताजनक वैरिएंट बताया गया है। एक्सबीबी. 1.16 ओमिक्रॉन का एक उप-प्रकार है, जो थोड़ी तेजी से फैलता है, लेकिन बीमारी और प्रतिरक्षा घटाने जैसे मामलों में यह दूसरे वैरिएंटों की तरह ही है। अभी लोगों को जो टीके दिए जा रहे हैं, वे परिसंचारी उप-प्रकारों और उप-वंशों से रक्षा करने में सक्षम हैं।

कोविड अब सर्वव्यापी है और संभवतः हमेशा के लिए मानवता के साथ रहेगा। अब हमें संक्रमण के जोखिम और बीमारी के बीच फर्क करना शुरू करना चाहिए। कोविड पॉजिटिव होने भर से बीमारी का जोखिम बहुत सीमित होता है, अगर मामूली बीमारी के मामले अब सबसे कम हैं। कोविड विषाणु की बीमारी पैदा करने की क्षमता को कुंद कर दिया गया है। भले ही देश में कोविड के दैनिक मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, पर इस अवधि में अस्पताल में भर्ती और मौत का आंकड़ा नहीं बढ़ा है। वास्तव में, अस्पतालों में कोविड के अधिकांश मामले वे हैं, जो अन्य कारणों से भर्ती हुए हैं और संयोग से कोविड पॉजिटिव पाए गए हैं। जिन देशों में श्वसन वायरस और बीमारियों के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली है, यह देखा गया है कि कोविड संक्रमण दर अन्य श्वसन वायरसों की तुलना में बहुत कम है।

प्रयोगशाला में पुष्ट मामलों की संख्या बहुत कम प्रासंगिक हैं। कोविड के कारण अस्पतालों में भर्ती, गंभीर बीमारी और मौतों के आंकड़ों का पता लगाया जाना चाहिए और नीति निर्माण में उसका उपयोग करना चाहिए। भारत में हर दिन अनुमानतः 27,000 लोग वृद्धावस्था सहित कई कारणों से मरते हैं। प्रतिदिन लगभग 4,000 में से एक मौत कोविड-19 के कारण होती है। जबकि सांस संबंधी बीमारियों से करीब 500 लोगों की मौत होती है, जिनमें से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। सांस की बीमारियों की चुनौती अब कोविड-19 से 50 गुना ज्यादा है। हमें कई अन्य कारणों से होने वाली मौतों को रोकने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जीनोमिक, अपशिष्ट जल विश्लेषण, इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी निगरानी जैसे उपकरण नए वैरिएंट के उद्भव का शीघ्र पता लगाने में मदद कर सकते हैं। इन निगरानी प्रणालियों से उत्पन्न आंकड़ों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है और नीतिगत हस्तक्षेपों का मार्गदर्शन किया जा सकता है।

कोविड के मामलों में मौजूदा उछाल से चौथी बार कोविड टीके की मांग बढ़ सकती है। हालांकि भारत में किसी भी उम्र के लोगों को चौथी खुराक देने का तत्काल कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। फिर भी वैसे जोखिम वाले व्यक्ति को, जिन्होंने तीसरी बार टीका नहीं लिया है, शीघ्र टीके की एक खुराक लगवाने की आवश्यकता है।

यह कोविड-19 के पिछले तीन वर्षों की सीख का उपयोग करने का भी समय है। कोविड के प्रति सरकार और समाज की प्रतिक्रिया में सुधार के लिए बहुत कुछ है। संक्रामक बीमारियों को साक्ष्य के आधार पर निर्देशित करने की जरूरत है। सरकार को नियमित रूप से उच्च स्तर पर स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए, लेकिन तैयारी के लिए मॉक ड्रिल जरूरी नहीं है। सरकार को विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ नियमित रूप से प्रेस वार्ता करनी चाहिए। इससे गलत सूचनाओं को दूर करने और सही जानकारी देने में मदद मिलती है। चिकित्सा विशेषज्ञों को भी अधिक जिम्मेदार होने की आवश्यकता है और उन्हें केवल उन्हीं विषयों पर बोलना चाहिए, जिन्हें वे समझते हैं।

बीमारी के रूप में कोविड स्थानिक हो गया है, इसलिए, 'कोविड उपयुक्त व्यवहार' कहे जाने लायक कुछ भी नहीं है। स्कूल बंद करने या मास्क लगाने जैसे प्रतिबंध की कोई भूमिका नहीं है। कोविड को किसी अन्य सांस की बीमारी की तरह संभालने की जरूरत है। समय आ गया है कि लोग वायरल बीमारी में मौसमी वृद्धि का मुकाबला करने के लिए 'बेहतर श्वसन शिष्टाचार' को अपनाना शुरू करें। 'खांसी और जुकाम' वाले लोगों को हमेशा मास्क लगाना चाहिए। खांसते और छींकते समय सबको अपना चेहरा और नाक ढंकना चाहिए। जब मामलों में वृद्धि होती है, तो बुजुर्गों को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने पर मास्क पहनने की जरूरत होती है।

इस घरती पर मनुष्यों की तुलना में वायरसों, बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुजनक की संख्या कहीं ज्यादा है। यह दोनों की दुनिया है। कोविड हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, जैसे कि अन्य श्वसन वायरस हैं। हमें नियमित अंतराल पर कोविड के मामलों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। सौभाग्य से तीन साल पहले की तुलना में अब हम जानते हैं कि खुद को कैसे सुरक्षित रखना है।
-लेखक फाउंडेशन फॉर पीपल-सेंट्रिक हेल्थ सिस्टम्स, नई दिल्ली के संस्थापक निदेशक हैं।  

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