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आटे में नमक जितना भ्रष्टाचार

Mon, 04 Feb 2013 08:49 AM IST
योगेंद्र शर्मा
योगेंद्र शर्मा Updated Mon, 04 Feb 2013 08:49 AM IST
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corruption

कभी सरकार ने मच्छरों के सत्यानाश का संकल्प लिया था। फिर इस तुच्छ जीव जाति से भयभीत हो नारा दिया कि मच्छर तो रहेंगे, लेकिन मलेरिया नहीं। कसम अमेरिका वाली डीडीटी की, आज दोनों हैपी हैं। सरकार पहले गैरकानूनी कॉलोनियों की झुग्गी-झोपड़ियों को गिराने का दम भरती है, फिर सर्वजन हिताय की बात करते हुए उसे कानूनी बना देती है।

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भ्रष्टाचार को लेकर आजकल यार लोग जमीन-आसमान एक किए हुए हैं। कैसे उखाड़ फेंकोगे इसे? यह तो तुम्हारे लहू में समा चुका है। भलाई इसी में है कि इसे भी कानूनी बना दिया जाए।
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हमारे पड़ोसी पांडे जी इंजीनियर साहब कुछ दिन पहले रिटायर हुए हैं। वह जहां भी जाते थे, अपने ठेकेदार को बुलाकर कहते थे, अगर मैं आपका प्रॉफिट दोगुना कर दूं, तो क्या करेंगे आप? वह शीर्षासन करता हुआ हिनहिनाता, हुजूर, आप जो कहेंगे, करूंगा।
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जल्द ही उनकी कार का जुगाड़ हो जाता, साथ में सारे जूनियर इंजीनियरों की कारों का भी। सुबह आठ बजे घर से निकले रात दस बजे घर में घुसते। अफसरों की सदा खुशामद करते कि उन्हें अधिकाधिक कार्य सौंपा जाए। आप ही बताइए कि अगर वह ईमानदार होते, तो नियमानुसार दस से पांच काम करते कि नहीं। जब वह सेवानिवृत्त हुए, तो एक बेटे को डेढ़ करोड़ का मैरिज होम/गेस्ट हाउस बनवा दिया, और दूसरे को हीरो-होंडा की एजेंसी खुलवा दी, अपनी कोठी अलग से।

वह कहते हैं, भ्रष्टाचार हटते ही पता है, क्या होगा? सरकारी नौकरियां तो श्रीहीन हो जाएंगी। प्राइवेट नौकरियों की तुलना में हमें कितना कम वेतन मिलता है? फिर जिसमें बुद्धि होगी, वही तो भ्रष्टाचार करेगा। पांडे जी को अपनी बुद्धि पर गर्व है। उनका मानना है कि किसी की जेब हल्की करना एक कला है। उनका यह भी मानना है कि रिश्वत की पढ़ाई हर विश्वविद्यालय में होनी चाहिए, और वह इसके प्रोफेसर होने की योग्यता रखते हैं।


उन्होंने नौकरी में खूब कमाया और अफसरों पर जी भरकर लुटाया। लेकिन आज भ्रष्टाचार के इतने बड़े-बड़े मामलों को देखकर उन्हें अफसोस होता है कि उन्होंने आटे में नमक जितना ही घोटाला किया। अगणित घोटाले हुए, लेकिन उनका नाम किसी घोटाले में नहीं आया। न जेल यात्रा का जुगाड़ बन पाया और न ही कमाऊ पूत समझ किसी पार्टी ने विधायक का टिकट थमाया। बल्कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ चलते आंदोलनों से वह दुखी ही हैं कि आगे उनके बेटों का क्या होगा।

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