कोरोना संकट: पांच लाख करोड़ का पैकेज चाहिए
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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया के देशों में दहशत पैदा कर दी है। वायरस का संक्रमण रोकने के लिए सभी शहरों में लॉकडाउन है। इस महामारी को बेअसर करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है, जिसका अर्थ है कि लोग घरों में रहें और दफ्तरों, दुकानों, फैक्टरियों और अन्य जगहों में न जाएं। नतीजतन आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। चूंकि यह गतिरोध अभी जारी रहना है, ऐसे में, कोई यह बता नहीं सकता कि सामान्य स्थिति कब बहाल होगी। इस साल वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर शून्य या नकारात्मक हो सकती है। उथल-पुथल के कारण वित्तीय बाजारों में करीब 270 खरब डॉलर मूल्य के शेयर डूब गए। रोजगार पर इस महामारी का सबसे अधिक असर पड़ा है, क्योंकि आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट आने से दसियों लाख लोगों की नौकरी जाएगी। अपना काम या छोटा कारोबार करने वालों, जिनकी संख्या दुनिया भर में बहुत अधिक है और जिन्हें रोज नकदी की जरूरत पड़ती है, का कामकाज बंद हो गया है।
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अमेरिका में हीबेरोजगारी में भारी वृद्धि हुई है। अनेक देशों ने अपने नागरिकों को आश्वस्त करने के लिए, कि महामारी के निपटते ही स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी और तब तक के लिए पर्याप्त नकदी है, प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन 20 खरब के पैकेज पर काम कर रहा है, जिसके तहत नागरिकों के खाते में सीधे पैसे डालने, टैक्स पर रोक लगा देने तथा इस संकट से सीधे-सीधे प्रभावित होने वाले एयरलाइंस, एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट्स, हॉस्पिटैलिटी उद्योग तथा दूसरे क्षेत्रों को आर्थिक मदद देने जैसे कदम शामिल हैं। ऐसे ही कनाडा ने 82 अरब डॉलर के राहत पैकेज का एलान किया है, जिसमें जरूरतमंदों के लिए साप्ताहिक आर्थिक मदद भी शामिल है। ब्रिटेन ने भी 350 अरब पाउंड स्टर्लिंग के पैकेज की घोषणा की है, जिनमें प्रभावित उद्योगों तथा कारोबार को टैक्स छूट और प्रभावित लोगों को मासिक 2,500 पाउंड स्टर्लिंग तक की मदद शामिल है।
भारत को भी तत्काल इन देशों का अनुकरण करना चाहिए। भारत में कार्यबल में 52.5 करोड़ लोग हैं, जिनमें से करीब 22.6 करोड़ लोग कृषि क्षेत्र में तथा शेष लोग उद्योग और सेवा क्षेत्र में हैं। इनमें से 30 करोड़ कर्मचारी ईपीएफओ से संबद्ध हैं, तो लगभग 11 करोड़ कर्मचारियों का ईएसआई कार्ड है। इन 11 करोड़ कर्मचारियों में से पांच करोड़ कर्मचारी ठेके पर हैं, जिन्हें अनुबंध रद्द करके कभी भी हटाया जा सकता है, जैसा कि फिलहाल हो रहा है। शेष कर्मचारी असंगठित क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) में हैं या फिर स्वतंत्र तौर पर मजदूरी करते हैं। हाल के दिनों में इनकी आय में भारी गिरावट दर्ज की गई है। साफ है कि शहरों में लॉकडाउन होने, वाहनों की आवाजाही रुकने और आपूर्ति शृंखला के टूटने से कम से कम 10 करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।
जिन्हें रोज नकदी चाहिए, उनकी आजीविका अचानक ही प्रभावित हो गई है। भारत एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र इससे प्रभावित हैं। कृषि की बात करें, तो देश का 43 फीसदी कार्यबल कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, जिसका जीडीपी में 17.6 फीसदी योगदान है। अगले एक सप्ताह में रबी की फसल बाजार में आने वाली है, जिसका रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। लिहाजा मंडियों और बाजारों तक इसकी आसान पहुंच, सरकारी एजेंसियों द्वारा समय पर इसकी खरीद और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्राप्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। कोरोना के कारण हुए गतिरोध को कृषि क्षेत्र में अगले तीन महीने तक कम से कम किया जाना देश के कार्यबल की आजीविका की रक्षा के लिए बहुत आवश्यक है। कृषि पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्र फिलहाल इस महामारी से अछूते हैं। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने किसानों को सालाना 6,000 रुपये की मदद जारी रखने का फैसला किया है।
अगर सभी राज्य किसानों को सालाना छह से दस हजार रुपये की मदद करें, तो नौ करोड़ किसान परिवारों के लिए यह एक बड़ा कदम होगा। देश के कार्यबल का 25 प्रतिशत उद्योग क्षेत्र में है, जिसका देश की जीडीपी में 27.4 फीसदी योगदान है। वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर शून्य के आसपास रह सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादन नकारात्मक है। लॉकडाउन को देखते हुए उद्योग क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार का जाना तय है। उद्योग क्षेत्र में 13.1 करोड़ लोग काम करते हैं, जिनमें से आधे असंगठित क्षेत्रों में या एमएसएमई में हैं। संगठित क्षेत्र में ठेके पर रखे श्रमिकों और लघु उद्यमों में से 25 से 40 फीसदी लोगों की नौकरी जा सकती है।निर्माण क्षेत्र की हालत बहुत खराब है, जहां कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक कामगार हैं।
लेकिन लॉकडाउन के कारण इस क्षेत्र के 50 से 60 फीसदी लोगों का रोजगार सीधे-सीधे प्रभावित हो रहा है। सेवा क्षेत्र इस महामारी से सीधे-सीधे प्रभावित हुआ है। लेकिन चूंकि यह क्षेत्र सरकारी कामकाज से भी जुड़ा हुआ है, ऐसे में, सरकार के कर राजस्व से उन्हें वेतन मिलता रह सकता है। लेकिन रेस्टोरेंट्स, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी आदि क्षेत्रों में पांच करोड़ लोगों का रोजगार सीधे-सीधे प्रभावित हो रहा है। एयरलाइंस उद्योग की पहले से खराब हालत को देखते हुए इसकी सभी टैक्स देनदारी फिलहाल रोक देनी चाहिए और इसे कुछ समय तक सस्ता ईंधन मुहैया कराया जाना चाहिए। ऐसी विकट स्थिति में देश की 60 फीसदी आबादी को बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।
केरल ने संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए 20,000 करोड़ रुपये के पैकेज का इंतजाम किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दैनिक मजदूरों तथा निर्माण क्षेत्र में काम करने वालों की मदद करने के लिए एक बड़े पैकेज का एलान किया है। सभी राज्य सरकारों को ऐसे पैकेज घोषित करने होंगे, जिनमें 20 फीसदी हिस्सेदारी राज्य की तथा 80 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र की हो। हालांकि पिछले दिनों वित्त मंत्री ने 1.70 लाख करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया था। लेकिन देश की 1.37 अरब की आबादी की सुरक्षा और बेहतरी के लिए 5.4 लाख करोड़ रुपये का पैकेज जरूरी है।
-टीवी मोहनदास पई आरिन कैपिटल पार्टनर्स के चेयरमैन और निशा होला सी-कैंप में
टेक्नोलॉजी फेलो हैं।