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जन भागीदारी से ही मिटेगी महामारी, एक सराहनीय पहल मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गई

Mon, 07 Jun 2021 06:33 AM IST
K.G. Suresh केजी Suresh
Updated Mon, 07 Jun 2021 06:33 AM IST
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सार
  • राज्य सरकारें सामुदायिक जागरुकता बढ़ाकर कोविड-19 के मामलों को नियंत्रित कर सकती है।
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Corona Pandemic will be eradicated only through public participation
कोरोना वायरस को लेकर जागरुकता (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड-19 महामारी ने विश्व भर में मानव जीवन को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाई है। महामारी का प्रभाव केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में सामाजिक और आर्थिक विनाश तक हुआ है, जिसमें लाखों लोगों पर अत्यधिक गरीबी का खतरा बना हुआ है। कोविड के प्रसार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए यह अत्यावश्यक है कि सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।



सामुदायिक जागरूकता बढ़ाकर राज्य में रोजाना सामने आ रहे संक्रमण के मामलों की संख्या कम करना और नागरिकों द्वारा कोविड के प्रति उचित व्यवहार को दैनिक जीवन में अपनाना राज्य सरकारों का वर्तमान में प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए। इस दिशा में एक सराहनीय पहल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा की गई है। प्रदेश सरकार ने अपने नागरिकों के हर वर्ग तक पहुंचने के लिए कुछ सफल कदम उठाए हैं। सरकार द्वारा जिला संकट प्रबंधन समूह को स्थानीय मुद्दों पर निर्णय के अधिकार दिए गए हैं। सांसदों, विधायकों, पंचायतों, स्थानीय निकायों के अध्यक्षों, वार्ड और विकास खंड स्तर के सदस्यों, गांव स्तर के संकट प्रबंधन समूहों, अशासकीय संगठनों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वैच्छिक संगठनों की भागीदारी इसमें शामिल है।


इसके अलावा 'मैं कोरोना वॉलंटियर' के तहत वॉलंटियरों का चार श्रेणियों में पंजीयन कराया गया। इनमें वैक्सीनेशन वॉलंटियर, चिकित्सा सहायक वॉलंटियर, मास्क जागरूकता वॉलंटियर, मोहल्ला समिति वॉलंटियर, जन अभियान परिषद, मार्गदर्शक और समन्वयक के रूप में लोगों की टीम बनाई गई। साथ ही, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर संकट प्रबंधन समूह का गठन किया गया है। इस समूह को कई सारी जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनमें जनता कर्फ्यू लगाने का निर्णय लेना, लॉकडाउन के दौरान प्रत्येक क्षेत्र में अनुमति देने योग्य गतिविधियों पर निर्णय लेना और चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध हटाने के संबंध में फैसला लेना शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर इन संकट प्रबंधन समूह के गठन के साथ शहरी क्षेत्रों के लिए जिला शहर और वार्ड स्तर पर सरकार कोविड-19 आपात स्थितियों के प्रबंधन के लिए सक्रिय समूह सामुदायिक जुड़ाव और कोविड महामारी के फैलाव को रोकने में भागीदारी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का प्रभावी अमल सुनिश्चित करती है।

अब तक बनाए गए संकट प्रबंधन समूह के सदस्यों को वैज्ञानिक और विश्वसनीय सूचना सामग्री उपलब्ध कराई गई है। 'मैं कोरोना वॉलंटियर' अभियान के अंतर्गत आर्थिक और सांख्यिकी विभाग के तहत गठित जन अभियान परिषद राज्य में विभिन्न सामाजिक समूहों और स्वयंसेवी संगठनों की गतिविधियों को बढ़ावा देती है। कोविड-19 की रोकथाम के लिए की गई गतिविधियों और इसके लिए निर्देशित प्रयासों को मजबूत करने के अलावा सक्रिय सामुदायिक भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश सरकार इन प्रयासों से नागरिकों को न केवल कोविड उपयुक्त व्यवहार और सरकारी निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन में शामिल करने में सफल रही है, बल्कि एक कुशल फीडबैक लूप तैयार करने में भी कामयाब रही है। मुख्यमंत्री सहित राज्य प्रशासन जमीनी स्तर पर मुद्दों को समझने के लिए प्रत्येक स्तर पर संकट प्रबंधन समूह के साथ नियमित रूप से संवाद करते हैं, साथ ही, उन्हें विकेंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया में सशक्त बनाते हैं।

संकट की इस घड़ी में समूह और स्वयंसेवकों ने भी अपना सराहनीय योगदान दिया। जैसे, बिना वजह बाहर घूमने वाले लोगों और लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों की सूचना प्रशासन को दी गई, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए दिशा-निर्देश बनाए गए और ऐसे मामले समूह द्वारा रिपोर्ट किए गए। मध्य प्रदेश द्वारा विकसित यह मॉडल पूरे देश के लिए अनुकरणीय है, क्योंकि ऐसी महामारी से निपटना जनभागीदारी के अभाव में असंभव है। -लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में कुलपति हैं।

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