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मजेदार है यह कहानी, जानिए कैसे चालाक बिल्ली की आई मौज
विष्णु शर्मा
Updated Tue, 24 Mar 2015 01:18 PM IST
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कमनी नाम का एक नर पक्षी पेड़ पर घोंसला बनाकर मजे से रहता था। एक दिन वह दाना-पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में गया। वहां खाने-पीने की मौज से वह बड़ा खुश हुआ। उस खुशी में वह अपना घोंसला ही भूल गया और वहीं रहने लगा। उधर शाम को चतुरंग नाम का एक खरगोश उस पेड़ के पास आया, जहां कमनी का घोंसला था। घोंसला ज्यादा ऊंचा नहीं था, पर था काफी बड़ा। चतुरंग को कमनी का घोंसला पसंद आ गया, और वह वहीं रहने लगा।
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कमनी खेत में बिखरे अनाज खा-खाकर मोटा-ताजा हो गया। एक दिन उसे अपने घोंसले की याद आई, तो वह वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसले में चतुरंग आराम से बैठा है। उसने खरगोश से कहा, चलो निकलो मेरे घर से। खरगोश शांति से जवाब देने लगा, यह तो मेरा घर है।
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तुम नहीं जानते कि कोई एक बार कुआं, तालाब या पेड़ छोड़कर जाता है, तो वह अपना हक भी गंवा देता है। यह सुनकर कमनी कहने लगा, इस तरह बहस करने से कुछ हासिल नहीं होगा। किसी तीसरे के पास चलते हैं। वह जो फैसला करेगा, वैसा ही होगा।
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वहीं पास में मार्जार नाम की बिल्ली बैठी थी। दोनों उसके पास गए और उसे अपनी समस्या बताई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आपकी नजर में जो झूठा है, उसे आप खा लें। मार्जार ने कहा, अरे रे! यह तुम कैसी बातें कर रहे हो।
झूठे को खाने का काम मुझसे न होगा। मैं सिर्फ न्याय दूंगी। और फिर उसने धीरे से कहा, एक बात तुम लोगों के कान में कहना है। जरा करीब तो आओ! दोनों उसके बिल्कुल करीब गए। फिर क्या? मार्जार ने करीब आए खरगोश को पंजे में पकड़ कर मुंह से चिड़िए को भी नोच लिया। इस तरह उसने दोनों का काम तमाम कर दिया।