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यथार्थ का सामना करना सीखे कांग्रेस

Sun, 26 Oct 2014 07:03 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 26 Oct 2014 07:03 PM IST
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Congress should face the reality

एक तस्वीर बयान कर सकती है वह बात, जो हजार शब्दों में नहीं कही जा सकती। यह बात मुझे पिछले सप्ताह याद आई कांग्रेस के मुख्यालय की तस्वीर अखबारों में देखकर। तस्वीर उस दिन की थी, जिस दिन महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजे आए। तस्वीर थी कांग्रेस मुख्यालय के बाग की, जहां राजीव गांधी के पोस्टर के नीचे एक मजदूर बैठा था। जहां कभी रोज पत्रकारों के समूह आया करते थे देश के सबसे बड़े नेताओं से मुखातिब होने, वहां आज सन्नाटा छाया हुआ है।

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सन्नाटा ऐसा छाया हुआ है कांग्रेस में कि लगने लगा है कि अभी तक पार्टी के बड़े नेता समझ नहीं पाए हैं कि सत्ता उनके हाथों से कैसे निकल गई। इसी मौसम में पिछले साल मैं गई थी कानपुर नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश में पहली आम सभा देखने। वापस दिल्ली आई, तो मेरी मुलाकात एक वरिष्ठ कांग्रेसी मंत्री से हुई। उनको जब मैंने बताया कि मोदी को देखने-सुनने कानपुर में इतने लोग आए थे कि मुझे उनके पक्ष में लहर-सी दिखने लग गई, तो मंत्री जी हंसे। फिर उन्होंने यह कहा, थोड़ी-बहुत निराशा तो स्वाभाविक है हमारी सरकार से, लेकिन कांग्रेस की ही सरकार या कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनेगी चुनाव के बाद, देखना तुम। इस तरह की बातें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी को भी कहीं बार-बार। कांग्रेस की संस्कृति है, इस परिवार की खुशामद करना।
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महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव आम विधानसभा चुनावों से ज्यादा महत्वपूर्ण थे। इनमें नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की पहली परीक्षा थी, और ये दोनों राज्य ऐसे हैं, जहां भाजपा की सरकार कभी बनी ही नहीं है। सो जिस दिन नतीजे आए, उस दिन सोनिया और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया का हम सबको इंतजार था, लेकिन प्रतिक्रिया आई मामूली नेताओं की, जो गांधी परिवार को बचाने में लगे रहे।
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इस चमचागीरी के कारण कांग्रेसी लोकसभा की हार का सही विश्लेषण नहीं कर पाए हैं। ए के एंटनी को सौंपा गया था यह काम। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में यही कहा कि दोष नेतृत्व का नहीं है। ऐसा लगता है कि असली विश्लेषण से दूर भागना चाहते हैं कांग्रेस के बड़े नेता। सो महाराष्ट्र और हरियाणा में जब प्रचार करने गईं सोनिया गांधी, तो उन्होंने मुद्दा यही बनाया कि मोदी ने जनता को झूठा सपना दिखाकर गुमराह किया है।


सही विश्लेषण लोकसभा की हार का किया होता मैडम जी, तो आपको मालूम पड़ गया होता कि जनता बेवकूफ नहीं है। जनता समझ गई है कि भारत को संपन्न, विकसित देश होने का पूरा अधिकार है। जब तक यथार्थ को जानने-समझने की कोशिश नहीं करते हैं कांग्रेस के बड़े नेता, तब तक कांग्रेस चुनाव हारती रहेगी। कांग्रेस की वर्तमान स्थिति इतनी कमजोर है कि चुनाव जीतना तो दूर की बात, विपक्ष की भूमिका अदा करना भी इसके लिए कठिन लग रहा है। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की उतनी ही जरूरत है, जितनी मजबूत सरकार की होती है। इसलिए दुआ कीजिए कि जल्दी ही कांग्रेस के बड़े नेताओं में यथार्थ का सामना करने की हिम्मत आए। वरना मुख्यालय पर सन्नाटा ही छाया रहेगा।

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