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Budget 2023: मध्यवर्ग को लुभाकर चुनावी लाभ लेने का दांव
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बजट 2023
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का पूरा बजट भाषण अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव पर केंद्रित था। आयकर छूट से लेकर एमएसएमई क्षेत्र तक सभी तरफ वित्तमंत्री ने खुशियां बिखेरीं। बजट से मध्यवर्ग खुश है। डॉक्टर, वकील, किसान और अर्थशास्त्री, सभी ने टैक्स छूट का दायरा बढ़ाने का स्वागत किया है। बजट की प्रशंसा करते हुए विशेषज्ञ इसे बेहद संतुलित बता रहे हैं। रेलवे के ढांचे में आवंटन बढ़ाना जरूरी कदम है, तो टीवी और मोबाइल फोन के सस्ते होने का आम आदमी को सीधा लाभ मिलेगा। जाहिर है, ये तमाम फैसले आगामी लोकसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं।
बजट की अनेक घोषणाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, जैसे कृषि ऋण में आवंटन 18 लाख करोड़ से बढ़ाकर 20 लाख करोड़ किया जाना, पीएम आवास योजना का आवंटन 66 फीसदी बढ़ाकर 79,000 करोड़ करना, पूंजीगत निवेश 33 फीसदी बढ़ाकर 10 लाख करोड़ करना, जो जीडीपी का 3.3 फीसदी हिस्सा है, आदि इस बजट के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। बजट भाषण में वित्तमंत्री ने इसका भी जिक्र किया कि अंत्योदय योजना के तहत लाभान्वित होने वाले तथा दूसरे लक्षित परिवारों को एक साल तक पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त अनाज मुहैया कराने पर दो लाख करोड़ रुपये का जो खर्च आया, वह केंद्र सरकार ने ही उठाया।
इस बजट को राजनीतिक नजरिये से देखें, तो यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि भाजपा इसे 'विपक्ष तोड़ो' बजट के रूप में विश्लेषित कर रही है। जैसे कि बजट सत्र की शुरुआत में संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति का अभिभाषण शुद्ध रूप से राजनीतिक था। प्रधानमंत्री की शुरुआती टिप्पणी थी कि 'नारी शक्ति' द्रोपदी मुर्मू और निर्मला सीतारमण, दोनों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के नौ साल के भ्रष्टाचार मुक्त शासन को केंद्र में रखा है। बजट सत्र शुरू होने से पहले नरेंद्र मोदी ने प्रासंगिक बात कही। उन्होंने यहां तक कहा कि एक महिला बजट पेश करेंगी, जिस पर देश की ही नहीं, पूरी दुनिया की नजर है।
प्रधानमंत्री की इन टिप्पणियों का विश्लेषण करने से स्पष्ट है कि भाजपा सरकार अगले लोकसभा चुनाव में सत्ता के पक्ष में रुझान बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में 'सप्तर्षि' और 'पंच कन्या' का जिक्र किया। इस तरह से बजट भाषण के दशकों पुराने तरीके को बदलने की कोशिश दिखती है। इस बजट में 'सबका साथ-सबका विकास' की सोच इस बजट में समाहित है, चाहे वह कोरोना-रोधी इंजेक्शन हो या नए हवाई अड्डों का निर्माण। ऐसी घोषणाएं देश के सभी वर्गों और सभी जातियों को लाभान्वित करने वाली साबित होंगी।
ध्यान देने की बात है कि अभी तक नरेंद्र मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। बजट भाषण में सहकारिता मंत्रालय पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह को ज्यादा महत्व देना। वित्तमंत्री के बजट भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कम से कम 45 बार मेज थपथपाई। आखिर इस बजट को मूर्त रूप देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे। इस बजट को मध्यवर्ग का बजट बताया जा रहा है, तो व्यक्तिगत आयकर में मिली छूट को देखते हुए यह गलत भी नहीं है। हालांकि इसमें वित्तमंत्री का पूरा जोर आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर भी रहा। इसके अलावा, देश के नागरिकों-खासकर युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर मुहैया कराने और वृहत्तर परिदृश्य में आर्थिक स्थिरता बहाल करने की कोशिश भी बजट में दिखी।