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दरिंदगी और सवाल: माधवी की हत्या का मामला निर्णायक परिणति तक पहुंचना जरूरी, नजीर बने तेलंगाना की अदालत का फैसला
Sat, 25 Jan 2025 05:14 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला
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Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 25 Jan 2025 05:14 AM IST
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माधवी हत्याकांड के बाद घटनास्थल की फोटो
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विस्तार
यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि गुरुमूर्ति ने कैसे किसी जघन्य अपराधी की तरह अपनी पत्नी के शव को टुकड़ों में काटकर कुकर में उबाला था और फिर झील में फेंक आया। यह कोई साधारण अपराध नहीं है। यह समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता, रिश्तों में विश्वास की कमी और मानसिक अस्थिरता को भी दर्शाता है। किसी भी रिश्ते में असहमति एक सामान्य बात है, लेकिन अगर यह इस सीमा तक पहुंच रही है, तो बेहद खतरनाक है। यह एक चेतावनी भी है कि हमें निजी और सामूहिक स्तर पर अपने रिश्तों और भावनाओं को संभालने के तरीकों पर पुनर्विचार करना होगा।
हमारी सामूहिक चेतना को झकझोर देने वाली यह घटना एक समाज के तौर पर हमारी नाकामी को भी दिखाती है और जवाबदेहियों से जुड़े सवाल भी खड़े करती है। बेशक, पति-पत्नी के बीच संबंध एक निजी मामला है, लेकिन क्या सब कुछ इतना यांत्रिक हो चुका है, जिसमें मानवीय संवेदना के लिए समाज और घर में कोई जगह ही नहीं बची है? अगर हत्या की नौबत आ गई, तो जाहिर है कि गुरुमूर्ति और माधवी में पहले भी लड़ाइयां होती रही होंगी। जहां ये लोग रह रहे थे, वहां आसपास के लोगों को भी अब तक कोई भनक नहीं लगी, आज तक किसी ने आवाज नहीं उठाई; आखिर हम किस तरह का एकाकी जीवन जी रहे हैं।
कारण चाहे जो हो, इस घटना से यही जाहिर होता है कि समाज को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। घरेलू हिंसा और पारिवारिक तनाव के बढ़ते मामलों के बीच, हमें यह समझने की जरूरत है कि इनका समाधान केवल कड़े कानूनों से नहीं हो सकता। एक समाज के तौर पर हमें घरेलू हिंसा के मामलों को गंभीरता से लेना होगा, भले ही वह अपने नहीं, बल्कि पड़ोस के घर की बात हो। यह अत्यंत आवश्यक है कि माधवी की हत्या का मामला निर्णायक परिणति तक पहुंचे और हत्यारे को ऐसी सजा मिले, जो नजीर बन सके।