काले धन के खिलाफ साहसिक कदम

जे डी अग्रवाल Updated Tue, 07 Nov 2017 07:01 PM IST
Brave move against black money
जे डी अग्रवाल
आज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के जरिये पांच सौ और एक हजार रुपये के प्रचलित नोटों को अमान्य घोषित कर भारत को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाया था। हालांकि शुरुआत में नकदी का संकट काफी रहा और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी हुई, लेकिन तमाम कष्टों को सहकर भी देश के आम लोगों ने इसमें सरकार का भारी समर्थन किया, जिसका पता उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे से लगाया जा सकता है। असल में काले धन, भ्रष्टाचार और नकली नोटों को अर्थव्यवस्था से खत्म करने के लिए सरकार ने यह सूझ-बूझ भरा कदम उठाया।
नोटबंदी को आर्थिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है। विमुद्रीकरण से काले धन की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट पड़ी है और आतंकवादी संगठनों को भी झटका लगा है। भले ही इस संबंध में अभी कोई ठोस आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसका असर जरूर दिखा है। इससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है। देश में भ्रष्टाचार अब भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और काले धन की समस्या अब भी है, लेकिन इन दोनों में कमी जरूर आई है। नोटबंदी से पहले हमारे देश की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से नकदी पर आधारित थी। बहुत कम लोग थे, जो डिजिटल लेन-देन करते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद जब नकदी का संकट पैदा हुआ और बाजार में मुद्रा की तरलता घट गई, तो लोगों को मजबूरन नकदीविहीन अर्थव्यवस्था की तरफ मुड़ना पड़ा। और अब, जबकि नकदी का संकट नहीं है, फिर भी लोग डिजिटल लेन-देन ज्यादा करने लगे हैं।

सरकार के नोटबंदी के फैसले को देश की आम जनता ने व्यापक समर्थन दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भ्रष्टाचार और काले धन से देश के लोग आजिज आ गए हैं। लोगों को यह समझ में आ गया है कि जब तक भ्रष्टाचार को खत्म नहीं किया जाता और काले धन की अर्थव्यवस्था का खात्मा नहीं किया जाता, तब तक देश के आम लोगों लोगों को सरकार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाएंगी। यही वजह रही कि कहीं भी नोटबंदी के खिलाफ कोई जन आंदोलन देखने को नहीं मिला। नोटबंदी के कारण बहुत से छोटे-मोटे उद्योग-धंधे बंद हो गए, लोगों की नौकरियां खत्म हो गईं, शादी-ब्याह में दिक्कतें आईं, लोगों को और भी कई तरह की मुश्किलें आईं, फिर भी लोग सरकार के साथ रहे, तो इसलिए कि इस देश की आम जनता स्वच्छ शासन-प्रशासन और नैतिकता में भरोसा करती है और उसके लिए कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है।

हालांकि कुछ बैंक कर्मचारियों, कुछ पेट्रोल पंपों और दवाई दुकानदारों ने भी नोटबंदी के दौरान काले धन को सफेद किया, जिसे इसकी कमियां मान सकते हैं। ऐसे दोषी लोगों पर क्या कार्रवाई हुई, यह किसी को मालूम नहीं है। लेकिन नोटबंदी के जरिये हमने दुनिया को संदेश दिया कि भारत भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ है और इससे मुक्ति के लिए हम हर तरह का त्याग करने को तैयार हैं। इसके अलावा इसका फायदा यह हुआ कि सारा पैसा बैंकिंग व्यवस्था के दायरे में आ गया, जिससे बैंकों में मुद्रा की तरलता बढ़ी। अब उन पैसों का लोक हित में निवेश किया जा सकता है। इसके अलावा कर चुकाने वालों का दायरा भी नोटबंदी के बाद काफी बढ़ चुका है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

-लेखक इंडियन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं

Spotlight

Most Read

Opinion

University of Bergen: क्लीनिंग स्प्रे धूम्रपान की तरह ही हानिकारक

नार्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्गेन के शोधकर्ताओं ने यूरोपीय समुदाय श्वसन स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान 6235 भागीदारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है।

19 फरवरी 2018

Related Videos

पीएम नरेंद्र मोदी के मैसूर भाषण की बड़ी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूर में चुनावी जनसभा की। पीएम मोदी ने कहा कि, मैसूर को सैटेलाइट रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा जो वर्ल्ड क्लास का होगा।

19 फरवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Switch to Amarujala.com App

Get Lightning Fast Experience

Click On Add to Home Screen