फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   BJP: single journey not Possible

भाजपा : एकला चलो संभव नहीं, बिगड़ते चुनावी गणित का संकेत

Fri, 25 Oct 2019 09:50 AM IST
manisha priyam मनीषा प्रियम
Updated Fri, 25 Oct 2019 09:50 AM IST
विज्ञापन
BJP: single journey not Possible

देश के दो महत्वपूर्ण और आर्थिक दृष्टि से उन्नत राज्यों- हरियाणा और महाराष्ट्र में जनता का फैसला आ चुका है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना सरकार बनाने जा रही है, तो हरियाणा में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद भाजपा बहुमत से दूर रह गई है। दोनों ही राज्यों में भाजपा से जितने दमदार प्रदर्शन की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई। दोनों जगह भाजपा की भारी जीत की संभावना के पीछे कुछ तथ्य थे। मसलन, कुछ ही महीने पूर्व लोकसभा चुनाव में पार्टी की अप्रत्याशित जीत, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की बदहाल स्थिति, विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने की होड़ आदि। भाजपा आश्वस्त थी कि उसके पास प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के फैसले जैसे दो प्रमुख हथियार हैं।


loader

पर दोनों ही राज्यों में कुछ स्थानीय मुद्दे थे, जो जनता के लिए अहम थे। ये नतीजे दिखाते हैं कि किसी चुनाव के नतीजे का आकलन हम दूर बैठकर तथ्यों के आधार पर नहीं कर सकते। सभी सर्वेक्षणों में दिखाया गया था कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन दो सौ से अधिक सीटें जीतेंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। पश्चिमी महाराष्ट्र में शरद पवार की राकांपा ने अपनी जमीनी ताकत फिर से साबित कर दी।
जहां तक हरियाणा की बात है, यहां भाजपा ने नारा दिया था-अबकी बार 75 पार। इसकी वजह थी कि संघ के प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर की छवि साफ थी और सरकारी नौकरियों में भर्ती के मामले में उन्होंने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई थी। लेकिन भाजपा उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करने में यहां बुरी तरह विफल रही। यहां भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। मगर सर्वाधिक चर्चा में दुष्यंत चौटाला हैं, जिनकी पार्टी जननायक जनता पार्टी किंगमेकर बनकर उभरी है। हरियाणा के नतीजे को देखकर कहा जा सकता है कि जाट किसानों के वोट इस बार भाजपा को नहीं मिले हैं, वे कांग्रेस और जेजेपी के बीच बंटे हैं। इस राज्य में निर्दलीयों को भी अच्छी सीटें मिली हैं। ऐसे में, दुष्यंत चौटाला और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से ही यहां सरकार बनेगी। हालांकि महाराष्ट्र में बहुत-सारी बातें भाजपा के पक्ष में भी जाती हैं।

मसलन, अब वह राज्य के किसी एक क्षेत्र, या जाति विशेष की पार्टी न होकर पूरे महाराष्ट्र की पार्टी बन गई। देवेंद्र फडणवीस ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों पर ध्यान देते रहे, इसलिए दोनों इलाकों में भाजपा का जनाधार बढ़ा। शिवसेना का प्रदर्शन भी अच्छा रहा, जिसका नतीजा यह है कि भाजपा के लिए अब 'एकला चलो रे' की संभावना नहीं है।

इस जनादेश का सबसे पहला संदेश तो यही है कि राज्य स्तरीय चुनाव में मतदाता निजी और स्थानीय मुद्दों को तवज्जो देते हैं। हरियाणा में बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और कृषि के संकट अहम हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजनीतिक दमखम वाले जाटों को गैर-जाट नेतृत्व मंजूर नहीं है। महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को मतदाताओं ने शासन की बागडोर तो सौंपी, पर राकांपा व कांग्रेस भी एक प्रबल प्रतिपक्ष बनकर विधानसभा में रहेगी। यानी देश की चुनावी राजनीति में कोई भी स्थिति निरंतर नहीं रह सकती और लोकतंत्र का काम है जनता के मुद्दों को उठाकर विस्तृत पटल पर रखना। इन चुनावों में यही हुआ है।

-लेखिका राजनीतिक विश्लेषक हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed