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सिलेंडर भर शुभकामनाएं
रोमेश जोशी
Updated Tue, 01 Jan 2013 11:22 PM IST
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शब्दों के सितारे तोड़ती, मटर के दाने को तरबूज कर देने की दुआ करती, चांद-तारों की पूरी दुकान को घर में घुसेड़ देने और हजारों-लाखों फूल मेरे आंगन में खिलाने का वायदा करती शुभकामनाओं के दिन आ गए। यह भी नहीं सोचते शुभकामना का कीमती कार्ड भेजनेवाले कि अगर घर में चांद-तारे घुस आएं, तो इस जरा-से घर के पहले से शिकस्त और नादुरुस्त फर्नीचर का क्या हाल होगा? उठने-बैठने, खाने-सोने की जगह भी बचेगी या नहीं?
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एक जमाना था, जब अंतरिक्ष की बारीकियां उजागर नहीं हुई थी, तब ऐसी बातों से कविता जैसी हवा बनती थी, पर आज अगर कोई चाहे कि जोशी जी किसी तारे पर बैठें और चांद पर कागज धरकर रचना लिखें, तो कामना करने वाला या तो उल्लू लगे या फिर महसूस हो कि बंदा मुझे धंधे से बाहर करवाने पर आमादा है।
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भाई मेरे, इस जरा-से घर के बित्ता भर आंगन में हजारों-लाखों फूल खिलाने का वरदान देने से पहले यह तो बता दें कि उसके बाद मैं अपना स्कूटर कहां रखूंगा? श्रीमती जी इन दिनों आंगन में पापड़-बड़ी सुखाने में लगी हैं, उनका तो आपकी शुभकामनाएं पूरा सत्यानाश कर देंगी। अरे, ग्रीटिंग ही भेजना है, तो कुछ ऐसा भेजें, जो मुझ जैसे आम लोगों पर फिट बैठता हो। नल-बिजली, राशन-पानी, रोटी-कपड़े से जुड़ी कोई कामना हमारे लिए नहीं कर सकते क्या आप?
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सच कहता हूं, साल बिताने के लिए हमें छोटी-छोटी-सी शुभकामनाओं की जरूरत रहती है। जैसे भगवान करे, स्कूटर पंचर न हो। पुलिस वाला रिश्वत न मांगे, यह दुआ तो सफल नहीं होगी, पर गलती होने पर भी पकड़े न जाने की दुआ कर ही सकते हैं। जब बिजली या फोन का बिल भरने जाएं, तो लाइन लंबी न हो। इंजेक्शन वाली सब्जियों से बचे रहें।
साल भर अच्छा भोजन मिले, दाल जले नहीं, दूध उफनकर बहे नहीं, अतिथि समय पर वापस चला जाए, सुखद यात्रा के लिए बॉस छुट्टी देने में आनाकानी न करे, सीएल डूबे नहीं। बीमार हों, तो डाक्टरों का बिल ज्यादा न बने। बेटी को दिल्ली न जाना पड़े, एरिया के गुंडे तंग न करें, बच्चों के रिजल्ट अच्छे आएं, बस-ट्रेन चूके नहीं, पड़ोसी यानी पड़ोसन से भी अच्छी पटरी बैठे।
पेट्रोल, डीजल के भाव उस दिन बढ़ें, जब आप फुल-टैंक करवा चुके हों। और इस सबसे ऊपर इस साल के लिए तो आप बस इतनी-सी शुभकामना दे दें कि साल में कभी आपको गैस सिलेंडर के लिए रोना-झींकना न पड़े। आमीन।