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इमरान के चेहरे के पीछे

Thu, 05 Jul 2018 06:29 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Thu, 05 Jul 2018 06:29 PM IST
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Behind Imran Face
बुशरा एवं इमरान

पाकिस्तानियों ने कभी ऐसा दृश्य नहीं देखा था! एक व्यक्ति जमीन पर लोट रहा था और कुछ ही देर के बाद उसने जमीन पर सजदे में अपना सिर रखा। उसके पीछे उसकी गाड़ी थी, जिसे उसका ड्राइवर धीरे-धीरे पीछे चला रहा था। वह व्यक्ति बुशरा मनेका का पूर्व शौहर खावर मनेका था। बुशरा मनेका अब इमरान खान की तीसरी नई बीवी है। बुशरा एक संत के प्रति अपार सम्मान और नम्रता दर्शाने के लिए उसके मजार की तरफ जमीन पर लोट रही थी। असल में इमरान खान मनेका के अनुयायी थे और नियमित रूप से आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए उनके पास जाते थे। बुशरा ने इमरान को बताया कि उसने सपना देखा है कि वह केवल तभी मुल्क के वजीरे आला (प्रधानमंत्री) बन सकते हैं, जब वह उससे निकाह करें। इससे मनेका का परिवार प्रसिद्ध हो गया था और कई लोग पिंकी (बुशरा का प्रचलित नाम) के पास आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए आते थे।


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एक बार बुशरा इमरान खान को पंजाब में एक मजार पर ले गईं, जहां वे दोनों नंगे पैर गए और इमरान खान ने दरवाजे पर घुटने टेककर जमीन को चूमा। इस पूरी प्रक्रिया को कैमरे में कैद करके व्यापक रूप से पाकिस्तान के सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में परोसा गया। पाकिस्तानी लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और इमरान खान के इस तरह सजदे की आलोचना की। पाकिस्तान के ज्यादातर मुस्लिम किसी संत या पीर के मजार पर घुटने टेकने या जमीन चूमने जैसा काम नहीं करते।

उनका दृढ़ विश्वास है कि कोई भी मुस्लिम व्यक्ति केवल अल्लाह के प्रति सम्मान दर्शाने के लिए सिर झुकाता है और केवल पैगंबर मोहम्मद ही ऐसे शख्स हैं, जिनके प्रति महान सम्मान दर्शाना चाहिए। लेकिन दक्षिण एशिया में हर जगह संतों और पीरों की संस्कृति बढ़ रही है, जहां बेबस व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए जाते हैं।

पर पाकिस्तान के भावी प्रधानमंत्री को पद के लिए इतना हताश देखना कोई खुशी की बात नहीं है। अब इमरान खान पर बुशरा मनेका का पूरा असर है और उनका हर कदम बुशरा के निर्देश पर उठता है। उन्होंने अपना आत्मविश्वास पूरी तरह से खो दिया है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि एक समय का प्लेबॉय और क्रिकेट का हीरो, जिसे अरबों लोग अपना आदर्श मानते थे, एक ऐसी स्त्री के हाथों की कठपुतली बन गया है, जो काले जादू में विश्वास करती है और जिसे कई लोग जादूगरनी कहते हैं। एक लोकप्रिय एवं स्वतंत्र अंग्रेजी साप्ताहिक द फ्राइडे टाइम्स के मुताबिक, एक विदेशी महिला पत्रकार इंटरव्यू के लिए इमरान खान के घर गई। कुछ आपात कारणों से इमरान खान को कुछ देर के लिए इंटरव्यू छोड़ना पड़ा और उसने अपनी पत्नी बुशरा को उस पत्रकार से बातचीत करने के लिए कहा। उस पत्रकार ने बाद में टिप्पणी की कि उसने कुछ प्लेटों में कच्चा मांस देखा और जब बुशरा से इस बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि इस घर में कुछ जिन्न हैं, जो यह कच्चा मांस खाते हैं। बाद में बुशरा ने उस पत्रकार को एक दीवार दिखाई और कहा कि वह अक्सर इस दीवार से बातें करती हैं और वह दीवार भी उसकी बातों का जवाब देती है। इस खबर का खंडन न तो इमरान खान ने और न ही बुशरा ने किया। एक तरफ जहां इमरान खान की चुनाव में जीत और प्रधानमंत्री बनना सुनिश्चित करने के लिए जादू का प्रयोग किया जा रहा है, दूसरी तरफ रावलपिंडी में सेना इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ को 2018 के चुनाव में विजेता बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही।
 
दस्तावेजी सुबूतों को सार्वजनिक किया गया है कि किस तरह से नवाज शरीफ की पार्टी के उम्मीदवारों को नवाज की पार्टी छोड़ने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अगवा और उत्पीड़ित किया जा रहा और धमकाया जा रहा है और उन्हें स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने या इमरान खान की पार्टी में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है।

सेना को उम्मीद है कि अगर इमरान खान बहुमत हासिल करने में विफल रहते हैं, तो गठबंधन की सरकार बनेगी। सुप्रीम कोर्ट भी इसमें सेना की मदद कर रहा है। न केवल नवाज शरीफ, बल्कि अन्य वरिष्ठ सदस्यों और उनके पूर्व मंत्रियों को प्रधान न्यायाधीश द्वारा चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया जा रहा है, जिनमें से कुछ को जीवन भर के लिए अयोग्य ठहराया गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बिलावल भुट्टो के जुलूस पर कुछ लोगों द्वारा पथराव किया गया, जिसमें कुछ कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए और एक वाहन का शीशा टूट गया। पर अपनी मां बेनजीर भुट्टो की तरह बिलावल ने अदम्य साहस का परिचय दिया और उस स्थान पर वापस लौटे, जहां उन पर हमला किया गया था।

अब खबरें हैं कि नवाज शरीफ लंदन से वापस लौट आए हैं, जहां वह अपनी मरणासन्न पत्नी कुलसुम नवाज की देखभाल कर रहे थे। उन्होंने भी सेना को एक दोस्ताना संदेश भेजा है कि उनके मन में सेना के उन जवानों और अधिकारियों के लिए काफी सम्मान है, जिन्होंने उनके मुल्क के लिए बलिदान किया है। तो क्या नवाज शरीफ और सेना के बीच कोई सौदा हो गया है? यह हम उनके भाषणों को एक बार फिर से सुनने के बाद जान पाएंगे। नवाज और उनकी बेटी मरियम अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों की रोजाना सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। इस बात की काफी आशंका है कि नवाज शरीफ को जेल भेजा जाए और मरियम नवाज को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया जाए। जब नवाज शरीफ रैली को संबोधित करेंगे, तो समर्थकों की मनोदशा क्या होगी? क्या उन्हें सहानुभूति वोट मिलेगा, क्योंकि सेना उन पर दबाव डाल रही है और क्या उनकी मरणासन्न पत्नी के लिए सहनुभूति मिलेगी। आगामी तीन सप्ताह में पाकिस्तान की कठिन परीक्षा होगी। इसी दौरान पता चलेगा कि क्या हम वास्तव में लोकतांत्रिक मुल्क हैं या इमरान खान के दोस्ताना चेहरे के पीछे से सेना और न्यायपालिका मिलकर देश चलाएं?

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