पाक-चीन दोस्ती का एक शर्मनाक पहलू : घरवालों को हजारों डॉलर देकर 'शादी' के नाम पर ले जाया गया
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रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान में एक दिलचस्प वाकया हुआ। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुआ, जिसमें दो नाबालिग ईसाई लड़कियों ने चीन में झेली मुसीबतों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके घरवालों को हजारों डॉलर देकर 'शादी' के नाम पर चीन ले जाया गया। वहां उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। इसी सिलसिले में यह भी मालूम हुआ कि पाकिस्तान से ले जाई गई 'बीवियों' से जिस्म का धंधा करवाया जाता है और उनके शरीर के अंग भी निकाले जाते हैं।
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रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान में एक दिलचस्प वाकया हुआ। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुआ, जिसमें दो नाबालिग ईसाई लड़कियों ने चीन में झेली मुसीबतों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके घरवालों को हजारों डॉलर देकर 'शादी' के नाम पर चीन ले जाया गया। वहां उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी गईं। इसी सिलसिले में यह भी मालूम हुआ कि पाकिस्तान से ले जाई गई 'बीवियों' से जिस्म का धंधा करवाया जाता है और उनके शरीर के अंग भी निकाले जाते हैं।
पाकिस्तान के पंजाब सूबे के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री असलम अगस्टिन ने बयान दिया कि लड़कियों की तिजारत के लिए चीन सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की सरकार और इस्लामाबाद स्थित उसका दूतावास इस कारनामे की अनदेखी कर रहे हैं।
इसके दो दिन बाद पाकिस्तानी लड़कियों को ले जाने की कोशिश में दो और चीनी पकड़े गए। अदालत ने इन्हें हिरासत में भेज दिया है। मीडिया ने टिप्पणी की कि पाकिस्तान के ईसाइयों की गरीबी से कम्युनिस्ट देश के नागरिक नाजायज फायदा उठा रहे हैं। चीन सरकार को मजबूरन मुंह खोलना पड़ा। चीनी दूतावास के बयान में कहा गया, 'चीन-पाकिस्तान संयुक्त जांच में इस कथन का कोई प्रमाण नहीं मिला कि चीनी नागरिकों से ब्याही गई महिलाओं से धंधा कराया जाता है या बिक्री के लिए उनके शरीर के अंग निकाले जाते हैं।
चीनी अधिकारियों ने पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री एजाज अहमद शाह से दो बार मुलाकात कर नाराजगी जताई कि 'दुल्हनों के व्यापार के सिलसिले में चीनियों की गिरफ्तारी को प्रचारित किया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति ने कुछ गलत काम किया भी है, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये उसे प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए।'
चीनी दूतावास ने सार्वजनिक बयान के माध्यम से पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के इस वक्तव्य का खंडन किया कि वेश्यावृत्ति और अंगों की बिक्री के लिए पाकिस्तानी लड़कियों को शादी का धोखा देकर चीन ले जाया जाता है।
पाकिस्तान सरकार ने चीन के बयान को गलत बताने के बजाय मीडिया का इस्तेमाल किया। सरकारी सूत्रों के हवाले से अखबारों ने लिखा कि हिरासत में लिए गए चीनियों को पाकिस्तान पहुंचने पर बिजनेस वीजा दिया गया।
सच यह था कि चीन और पाकिस्तान की न तो कोई संयुक्त जांच टीम बनी और न दोनों सरकारों ने अन्य किसी प्रकार का कोई निष्कर्ष निकाला। चीन को भरोसा था कि पाकिस्तान की धरती पर वह जो भी कह देगा, उसे काटा नहीं जाएगा। लेकिन उसकी गलतबयानी को हजम कर पाना पाकिस्तान सरकार के लिए मुश्किल हो गया। विदेश मंत्रालय के बयान में घुमा-फिराकर इस तरह खंडन किया गया, 'हमने चीनी दूतावास के इस बयान पर गौर किया है कि चीन की आंतरिक सुरक्षा जांच में वेश्यावृत्ति या अंगों की बिक्री का कोई सबूत नहीं मिला है।'
बयान का यह हिस्सा बड़ा आश्चर्यजनक है, 'पाकिस्तान और चीन सदाबहार सामरिक सहभागी हैं। आपसी दोस्ती को दोनों देशों में जनता और संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है। दोनों देश इस स्थायी मैत्री और सामरिक सहकार को हर आयाम में मजबूत करने को प्रतिबद्ध हैं।'
मामला था लड़कियों की तस्करी का। सदाबहार सामरिक दोस्ती की बात बीच में क्यों आ गई? यह चीन के शिकंजे में जकड़े रहने का आश्वासन था। एफआईए की प्रेस कांफ्रेंस चीन को बहुत नागवार गुजरी, क्योंकि उससे बीजिंग की छवि दागदार हुई। वेश्यावृत्ति पूंजीवादी देशों में होती है और गरीब देशों की मजबूरी से साम्राज्यवादी देश फायदा उठाते हैं, इस प्रचार का खंडन जो हो रहा था। जिस्मानी धंधे के मामले में पाकिस्तान सरकार पहली बार दबाव में नहीं आई। 2007 में इस्लामाबाद में लाल मस्जिद में हुई कार्रवाई को याद करें। कट्टरपंथियों ने इस्लामाबाद में ब्यूटी पार्लर-मसाज सेंटरों में काम कर रही चीनी लड़कियों का अपहरण कर लिया था।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सामने किसी भी हाल में न जाने का एलान कर चुके प्रधानमंत्री इमरान खान को करीब छह अरब डॉलर के पैकेज के लिए सभी शर्तें माननी पड़ी हैं। गैस और पेट्रोलियम के दाम बढ़ाने होंगे, जनता पर नए कर लगाए जाएंगे, परिसंपत्तियों का निजीकरण होगा और पिछले दरवाजे से अवमूल्यन करना पड़ेगा। अगर सकल राष्ट्रीय उत्पाद का 1.3 प्रतिशत इससे भी नहीं जुट पाएगा तो और सख्त कदम उठाने होंगे। आम पाकिस्तानी की कमर टूटना तय मानिए।
पाकिस्तान हर कोण से झुकने को तत्पर रहता है, लेकिन रक्षा व्यय में कटौती पर विचार नहीं कर सकता। भारत को शत्रु मानने के स्थायी भाव ने उसके सामने विकल्प नहीं छोड़ा है। नफरत और उग्रवाद का रास्ता चुनने वाले समाजों की बदहाली की यह एक मिसाल है।