फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   ajay kumar pandey poem

कविता- जटिल सवालों का एक ठोस जवाब

Sat, 01 Feb 2014 09:18 PM IST
अजय कुमार पाण्डेय
अजय कुमार पाण्डेय Updated Sat, 01 Feb 2014 09:18 PM IST
विज्ञापन
ajay kumar pandey poem
कविता
विज्ञापन


जटिल सवालों का
एक ठोस जवाब

किले के मुख्य द्वार पर  
रखी हुई है तोप,
यह इसके बुलंद दिनों की गवाह है।
न जाने कितनी लड़ी होंगी
इसने लड़ाइयां,
दागे होंगे बेहिसाब गोले
और युद्धभूमि में
साबित की होगी अपने
होने की भूमिका -
शत्रुओं की, की होगी ऐसी-तैसी।
एक अदृश्य इतिहास को
अपने में समेटे
चुपचाप पड़ी हुई यहां,
अब यही इसकी नियति है।
इतिहास की यात्रा के क्रम में
चाहे जो कुछ भी कह लें
इसके बारे में,
क्या फर्क पड़ने को है भला!
अब इसका अतीत लौटने से रहा,
और आज इसके मुंह में
एक गौरैया बड़ी देर से
घुस रही है
निकल रही है
और इसके बैरल पर
बैठ रही है।
इस क्षण मेरी आंखों के सामने
यह एक अद्भुत दृश्य है
और हमारे इस दौर के
जटिल सवालों का
एक ठोस जवाब भी।

-अजय कुमार पाण्डेय
अजय अपनी कविताओं में अपने समय के द्वंद्वों, शंकाओं और पीड़ाओं के नए अर्थ ढूंढते हैं। बलिया में रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed