AI समय: चैटजीपीटी डॉक्टर नहीं है, बुजुर्ग ने सोडियम ब्रोमाइड का रोज किया सेवन
जब बुजुर्ग ने चैटजीपीटी की बात मानकर सोडियम ब्रोमाइड का रोज सेवन किया, तो वह मतिभ्रम का शिकार हो गया। एक अध्ययन में कई चैटबॉट्स का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि उपयोगकर्ता को सही बीमारी का पता लगाने या आगे की रणनीति तय करने में ये चैटबॉट्स वेब सर्च से बेहतर नहीं थे।
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माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में एक ऐसा टूल पेश किया है, जिससे उपयोगकर्ता स्वास्थ्य प्रदाताओं से मिली जानकारी (रिकॉर्ड्स) को ‘कोपायलट हेल्थ’ चैटबॉट के साथ साझा कर सकेंगे। इसके बाद, इन रिकॉर्ड्स को उपयोगकर्ता की फिटनेस डिवाइस से इकट्ठा किए गए डाटा के साथ मिलाया जा सकेगा। सारी जानकारी का विश्लेषण करने के बाद, यह चैटबॉट उपयोगकर्ता के लिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का विस्तृत ब्योरा तैयार करेगा। माइक्रोसॉफ्ट की घोषणा अमेजन, ओपनएआई और एंथ्रोपिक के कदमों से मिलती-जुलती है, जिन्होंने इस साल इसी तरह के टूल्स का परीक्षण शुरू किया था। स्वास्थ्य संबंधी डाटा इकट्ठा करके और फीडबैक देकर, वे कंपनियां, जिनके चैटबॉट्स कुछ उपयोगकर्ताओं में मनोविकृति, अकेलापन और खराब आदतों को बढ़ावा देने के लिए सुर्खियों में रहे हैं, अब एक बेहद जोखिम भरे क्षेत्र में कदम रख रही हैं।
डॉक्टरों ने कहा कि चैटबॉट-आधारित स्वास्थ्य देखभाल के कुछ फायदे भी हो सकते हैं, जैसे कि ऐसे समय में लोगों को अपनी सेहत के बारे में बेहतर जानकारी देना, जब स्वास्थ्य सेवा महंगी होती जा रही है। पर टेक कंपनियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा करने से निजता से जुड़े कई जोखिम भी पैदा हो जाते हैं। पिछली तकनीकों की तरह, जिन्होंने लोगों को अपनी सेहत को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित कर दिया था, ये चैटबॉट भी लोगों को बिना वजह डॉक्टर के पास जाने पर मजबूर कर सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट का दावा है कि किसी व्यक्ति के सभी मेडिकल रिकॉर्ड और फिटनेस डिवाइस डाटा की मैन्युअली समीक्षा करके उसकी सेहत का एक विस्तृत ब्योरा तैयार करने में किसी डॉक्टर को कई घंटे लग सकते हैं। पर ‘कोपायलट हेल्थ’ यह काम कुछ ही सेकंड में कर सकता है।
जैसे-जैसे इलाज का खर्च बढ़ा है, एआई चैटबॉट लोगों को अपनी सेहत पर ध्यान देने व लक्षणों के बारे में जानकारी पाने में मदद करने का कम खर्चीला तरीका हो सकता है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर मैथ्यू ग्रीन ने कहा कि स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक ही जगह पर रखने से वह अपराधियों के निशाने पर आ सकती है। किसी पीड़ित का स्वास्थ्य डाटा ऐसी बीमारियों को उजागर कर सकता है, जिन्हें वह निजी रखना चाहता हो। इसलिए ये कंपनियां स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के साथ जो चाहे कर सकती हैं-जैसे एआई को प्रशिक्षित करना या उपयोगकर्ता के स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के आधार पर विज्ञापन दिखाना। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि इसका उपयोग उसके एआई को बेहतर बनाने या विज्ञापन दिखाने के लिए नहीं किया जाएगा।
एक अध्ययन में कई चैटबॉट्स का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि उपयोगकर्ता को सही बीमारी का पता लगाने या आगे की रणनीति तय करने में ये चैटबॉट्स वेब सर्च से बेहतर नहीं थे। कभी-कभी ये गलत जानकारी भी देते थे, या फिर सवालों के शब्दों में जरा-सा बदलाव होने पर अपनी सलाह पूरी तरह से बदल देते थे। इन कमियों की वजह से पहले ही कुछ बड़ी गलतियां हो चुकी हैं। मसलन, एक 60 साल के व्यक्ति को हफ्तों तक एक मानसिक रोग यूनिट में रखा गया, क्योंकि चैटजीपीटी ने उसे नमक कम करने के लिए सोडियम ब्रोमाइड खाने का सुझाव दिया था, जिससे उस व्यक्ति को वहम और मतिभ्रम होने लगा था। नए शोधों से पता चला है कि जो मॉडल खास तौर पर उपयोगकर्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के लिए बनाए गए हैं (जैसे चैटजीपीटी हेल्थ), उनमें भी कुछ खतरे हो सकते हैं।
टेनेसी की पूर्व स्वास्थ्य कमिश्नर डॉ. लिसा पियर्सि ने बताया कि स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में चैटबॉट के बुनियादी निष्कर्ष से चिंता पैदा हो सकती है। साइनस अक्सर एलर्जी का लक्षण होता है, पर चैटबॉट इसे किसी गंभीर बीमारी के लक्षण बता सकता है, जिससे बेवजह डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है। - साथ में टेडी रोसेनब्लुथ
जैस्पर एआई
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