फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Afghanistan crisis: Journalists targeted by Taliban

अफगानिस्तान के हालात: तालिबान के निशाने पर पत्रकार

Tue, 24 Aug 2021 03:44 AM IST
Awadhesh Kumar अवधेश कुमार
Updated Tue, 24 Aug 2021 03:44 AM IST
विज्ञापन
Afghanistan crisis: Journalists targeted by Taliban
तालिबान - फोटो : पीटीआई

तालिबान प्रवक्ताओं के पहले के वक्तव्य को छोड़ भी दें, तो काबुल पर नियंत्रण के बाद पहली प्रेस वार्ता में तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाया था कि मीडिया और महिलाओं को काम करने की आजादी दी जाएगी। मुजाहिद ने कहा था, 'आपको फिर याद दिला दूं कि हम सभी को माफ कर रहे हैं, क्योंकि यह अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है। जो भी हमारा विरोध कर रहा था, उसे माफ कर दिया गया है।'


loader

एक ओर जबीउल्लाह मुजाहिद यह घोषणा कर रहा था, तो दूसरी ओर तालिबान हिंसा का कहर बरपा रहे थे। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए काम करने वाली पत्रकार शबनम खान वीडियो के माध्यम से सामने आईं और कहा तालिबान की विजय के बावजूद उन्होंने कार्यालय जाना नहीं छोड़ा, लेकिन दूसरे दिन गेट पर तालिबान लड़ाके मिले और बोले, अब सरकार बदल गई है, घर जाओ, यहां काम नहीं कर सकती और मुझे वापस आना पड़ा। आज स्थिति यह हो गई है कि पहले वहां से आम लोगों की चीत्कार सामने आ रही थी, जो मदद की गुहार लगा रहे थे, अब कई पत्रकार संगठनों को आगे आकर विश्व समुदाय से गुहार करनी पड़ रही है कि सभी देश वहां के पत्रकारों को बचाने के लिए आगे आएं। ऐसा लग रहा है कि तालिबान लड़ाकों के पास पत्रकारों की लंबी सूची है, जिन्हें वे तलाश रहे हैं। 

स्थानीय स्तर पर भी वे पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं। तलाशी में पत्रकार नहीं मिले, तो उनके रिश्तेदार तक की हत्या हो रही है। जर्मन संस्थान डॉयचे वेले  के एक पत्रकार की तलाश में तालिबान उनके घर गए, नहीं मिलने पर उनके पड़ोसियों और अन्य घरों की तलाशी आरंभ की। जैसे ही उनके दो रिश्तेदार मिले, उन्हें सीधे गोली मार दी गई। एक की वहीं मृत्यु हो गई। डॉयचे वेले के महानिदेशक पीटर लिंबोर्ग ने कहा है कि हमारे एक संपादक के परिजन की तालिबान द्वारा हत्या ऐसा हादसा है, जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। यह बताता है कि अफगानिस्तान में हमारे कर्मचारी और उनके परिवार कितने गंभीर खतरे में हैं। 

वास्तव में तालिबान संगठित तौर पर खूंखार कातिल के रूप में काबुल और अन्य प्रांतों में पत्रकारों को ढूंढ रहे हैं। काबुल की ओर बढ़ते हुए तालिबान ने पत्रकारों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया था। कई पत्रकार तो उसी दौरान अफगानिस्तान से भाग निकले। कई भारत आ गए। अभी तक अन्य जगहों की पूरी खबर सामने नहीं है। एक निजी चैनल गरगश्त टीवी में काम करने वाले नेमातुल्लाह हेमात को इन लोगों ने उठा लिया। एक अनुवादक अमदादुल्लाह हमदर्द को दो अगस्त को जलालाबाद में गोली मार दी गई। हमदर्द जर्मनी के अखबार डि त्साइट के लिए नियमित रूप से लिखते थे। 

पिछले महीने भारत के फोटो-पत्रकार दानिश सिद्दीकी का कंधार में इन लोगों ने क्रूरता से कत्ल किया था। दानिश सिद्दीकी इनकी पकड़ में आ गए थे। जब उन्हें पता चला कि वह पत्रकार हैं और विदेशी एजेंसी के लिए काम करते हैं, तो उन्होंने तड़पा-तड़पा कर दानिश की हत्या की। वास्तव में यह समय ऐसा है, जिसमें कोई पत्रकार संगठन न जांच दल भेज सकता है न कोई पत्रकार आसानी से प्रवेश कर पूरी सच्चाई की छानबीन कर दुनिया के सामने रखने का साहस जुटा सकता है। किंतु पूरे विश्व की पत्रकार बिरादरी का दायित्व है कि अपने साथियों की जान बचाने के लिए आगे आएं, उनके साथ एकजुटता तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ प्रमुख देशों को हर संभव कोशिश करने के लिए प्रेरित करें। 
अभी तक डॉयचे वेले ने फेडरल एसोसिशएन ऑफ जर्मन न्यूजपेपर पब्लिशर्स (बीडीजेडवी), डि त्साइट, डेर श्पीगल, डीपीए, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स  के अलावा अलग-अलग देशों के कई छोटे बड़े मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर एक खुला पत्र लिखा है। यह एक अपील है, जिसमें जर्मन सरकार से अफगान कर्मचारियों के लिए एक आपातकालीन वीजा स्थापित करने की मांग की गई है। पत्रकारों सुरक्षा के लिए अलग-अलग देशों में और विश्व स्तर पर कुछ नियम और व्यवस्थाएं हैं, उसे लेकर दुनिया को सामने आना ही चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed