{"_id":"6622c083bd4f135fc703b4c3","slug":"advertisement-world-science-and-market-awareness-and-accountability-vital-for-right-information-2024-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"भ्रामक विज्ञापन विज्ञान और बाजार: जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी, तभी मिलेगी सही सूचना","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
भ्रामक विज्ञापन विज्ञान और बाजार: जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी, तभी मिलेगी सही सूचना
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
भ्रामक विज्ञापनों का विज्ञान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो :
एआई फोटो / एएनआई
विस्तार
वर्तमान समय में विज्ञापन बाजार की दुनिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में वैश्विक विज्ञापन बाजार का आकार 615.2 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसके आगामी कुछ वर्षों में 800 अरब डॉलर होने का अनुमान है। आंकड़ों के अनुसार, औसत व्यक्ति प्रतिदिन 200 से 300 विज्ञापन तक देखता है। विज्ञापन लोगों को सूचना देने और उत्पादों आदि के बारे में जागरूक करने का एक प्रभावी माध्यम है। लेकिन वर्तमान समय में जिस प्रकार से भ्रामक विज्ञापनों की बाढ़-सी आई है, यह समाज के लिए समाधान कम, समस्या ज्यादा बनते जा रहे हैं।
विज्ञापनदाता का इरादा मनोवैज्ञानिक रूप से आपको प्रभावित करते हुए आपके विचारों और निर्णयों को प्रभावित करना होता है। सिर्फ पांच दिनों में काले से गोरा करने, या मात्र एक खुशबू वाले डियोड्रेंट के स्प्रे मात्र से महिलाओं को आपके प्रति आकर्षित करने का दावा करने वाले विज्ञापन आपने खूब देखे होंगे। अभी कुछ दिन पहले साइंस जर्नल 'मेडिसिन' ने भारत में बेचे जाने वाले और उपभोग किए जाने वाले सबसे लोकप्रिय प्रोटीन पाउडर के 36 विभिन्न ब्रांडों पर किए गए विश्लेषण के निष्कर्ष प्रकाशित किए थे। विश्लेषण से पता चला कि 36 पूरकों में से लगभग 70 प्रतिशत में प्रोटीन की गलत जानकारी थी, कुछ ब्रांड अपने दावे का केवल आधा हिस्सा ही पेश कर रहे थे। इसके अलावा, लगभग 14 प्रतिशत नमूनों में हानिकारक फंगस थे, जबकि 8 प्रतिशत में कीटनाशकों के अवशेष दिखाई दिए। ये नतीजे भ्रामक जानकारी, पारदर्शिता की कमी और ऐसे उत्पादों से उत्पन्न संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में बढ़ती चिंता को दर्शाते हैं।
पर्यावरणीय स्थिरता और सचेत उपभोग के बारे में चिंतित दुनिया में ग्रीनवाशिंग एक बढ़ती हुई चिंता बन गई है। ग्रीनवॉशिंग, जिसे उत्पादों या सेवाओं के बारे में भ्रामक पर्यावरणीय दावे के रूप में परिभाषित किया गया है, ने नियामकों, उपभोक्ताओं और वकालत समूहों का समान रूप से ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में, यूरोपीय संसद और भारतीय न्यायपालिका, दोनों ने इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए, जो सख्त नियमों और विपणन प्रथाओं में अधिक जवाबदेही की ओर वैश्विक बदलाव का संकेत है। इसी तरह, भारतीय न्यायपालिका द्वारा उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में भ्रामक और निराधार दावे करने के लिए पतंजलि समूह की निंदा करना कंपनियों को उनकी मार्केटिंग के प्रति जवाबदेह बनाने के महत्व को रेखांकित करता है। न्यायपालिका का निर्णय उपभोक्ताओं को गलत जानकारी के आधार पर विकल्प चुनने से बचाता है और यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां अपने विपणन संचार में नैतिक मानकों का पालन करें।
ग्रीनवाशिंग या भ्रामक विज्ञापन न केवल उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं, बल्कि टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के प्रयासों को भी कमजोर करते हैं। भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कस कर नियामक कंपनियों को अधिक जिम्मेदार और पारदर्शी विपणन रणनीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
भ्रामक विज्ञापनों को संबोधित करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें नियामकों, उद्योग हितधारकों, उपभोक्ता वकालत समूहों और जनता के बीच सहयोग शामिल होता है। नियामक यह सुनिश्चित करते हुए कि कंपनियां विज्ञापन में सच्चाई का पालन करती हैं, पर्यावरणीय दावों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और मानक स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यवसायों और व्यापार संघों सहित उद्योग हितधारकों की नैतिक विपणन प्रथाओं को बनाए रखने और उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी देने की जिम्मेदारी है। उपभोक्ता वकालत समूह भ्रामक प्रचार के बारे में जागरूकता बढ़ाने और भ्रामक विपणन रणनीति के लिए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराने में भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अलावा, उपभोक्ता स्वयं टिकाऊ उपभोग प्रथाओं के बारे में खुद को शिक्षित करके और पर्यावरणीय प्रबंधन के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने वाले ब्रांडों का समर्थन करके ग्रीनवॉशिंग के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे सकते हैं। नियमों को मजबूत बनाने, जागरूकता बढ़ाने और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, केवल तभी हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उपभोक्ताओं के पास सटीक जानकारी पहुंच रही है, ताकि वे अपनी प्राथमिकताओं और मूल्यों के अनुरूप विकल्प चुन सकें।