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जिंदगी के बिस्कुटों को खुले मन से स्वीकारें: परस्पर सहानुभूति रखें, चुप्पी तोड़ बातचीत में अपनी भूमिका समझें
Sun, 13 Apr 2025 05:47 AM IST
निर्मल कांत
जांसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
जांसी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 13 Apr 2025 05:47 AM IST
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अमर उजाला प्रिंट/फ्रीपिक
विस्तार
एक रात मेरे पति टॉम और मेरे बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। सुबह भी मैं बहुत गुस्से में थी। इसलिए मैंने उनसे बात ही नहीं की। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के एमेरिटस प्रोफेसर किपलिंग विलियम्स, जो तीन दशक से अधिक से मौन व्यवहार पर अध्ययन कर रहे हैं, ने कहा, ‘मौन व्यवहार को लेकर भले ही लोग अनजान हैं, लेकिन सच यह है कि इसके संदेश बहुत गहरे तक चोट पहुंचाते हैं।’ टॉम के साथ जो मैंने किया, उसे सिडनी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ‘शोरगुल वाली चुप्पी’ कहते हैं, यानी ऐसा तब होता है, जब आप किसी को यह जताते हैं कि आप उसे जान-बूझकर अनदेखा कर रहे हैं। मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि ऐसा मैंने टॉम के साथ किया था। मैं उसे कुछ बताए बगैर काम पर निकल गई।
न्यूयॉर्क प्रेस्बिटेरियन व कोलंबिया यूनिवर्सिटी इरविंग मेडिकल सेंटर की मनोवैज्ञानिक एरिन एंगल के अनुसार, ‘कुछ समय तक चुप रहना अच्छा लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक यह चुप्पी संबंधों पर भारी पड़ सकती है।’ मैंने विशेषज्ञों से जानना चाहा कि अगर आपको चुप रहना पड़ रहा है या कोई और चुप रहना चाहता है, तब क्या करें? न्यूयॉर्क प्रेस्बिटेरियन अस्पताल में क्लिनिकल एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गेल साल्ट्ज कहती हैं, ‘कुछ लोग सोचते हैं कि चुप रहना विवाद से छुटकारा पाने का सहज तरीका है, लेकिन चुप्पी साधना एक तरह से सजा है, भले ही आप इसे स्वीकारें या नहीं।’ डॉ. साल्ट्ज कहती हैं कि जिस व्यक्ति को जान-बूझकर बहिष्कृत किया जाता है, उसके अंदर चिंता, डर और परित्याग की भावना जन्म लेने लगती है, जो आत्म-संदेह, आत्म-दोष और आत्म-आलोचना के नकारात्मक विचारों को बढ़ाती है। डॉ. विलियम्स कहते हैं कि जब सामने वाला आपसे बात करना चाहता है, तो भले ही तत्काल बात न करे, लेकिन उससे कह सकते हैं कि कुछ समय बाद बात करेंगे। यदि बात नहीं की, तो यह काफी घातक हो सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि चुप्पी को तोड़ते हुए, एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना रखें और बातचीत के दौरान अपनी भूमिका को भी समझें। टॉम और मेरे बीच, यह चुप्पी कुछ घंटों तक चली, लेकिन अब आगे से कोशिश करूंगी कि चुप रहने के बजाय उससे बात कर मामले को सुलझाऊं। खैर, जब मैं काम से लौटकर घर आई, तो टॉम ने मुझे एक खास तरह के बिस्कुट का बैग दिया, जो मुझे बेहद पसंद है। हालांकि, यह एक तरह से रिश्वत थी, फिर भी मैं कहना चाहूंगी कि आपको जो भी बिस्कुट मिलें, उन्हें स्वीकार करें, ताकि इस चुप्पी को तोड़ा जा सके। आखिर इन्हीं बिस्कुटों में तो जिंदगी है।