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शब्द शोर करते हैं
आरती ’आस्था’
Updated Sat, 29 Nov 2014 07:19 PM IST
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सच
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शब्द शोर करते हैं
सच है
लेकिन, उससे बड़ा सच
असहनीय हो जाता है
यह शोर
जब अन्दर पसरा हो
सन्नाटा।
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जीवन
इतना जुड़ जाते हैं
हम जीवन से
कि जिनसे जुड़ा है जीवन
अक्सर भूल जाते हैं
उनको ही...........।
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मुखौटा
लगाकर मुखौटा
जितनी बेफिक्री से
घूमते हैं हम
जंगल में
उतने ही
रहते हैं भयभीत
समाज में
इस डर से कि
कहीं कोई
किसी पल
खींच न दे
हमारा मुखौटा
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मानने से ही तो है
या तो कुछ नहीं
दुनिया में
या फिर है सबकुछ
कुछ नहीं
गर नहीं मानते कुछ
सबकुछ
जो मानते हैं
मानने से ही
किसी के
बढ़ जाता है
हमारा मान
हो जाता है
कम भी
कभी-कभी
न मानने से
मानने से ही तो है
सुःख-दुःख, यश-अपयश
इसलिए मानना है
तो सब मानो
सबको जानो
नहीं तो
मानो न कुछ भी।