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एक अहम पड़ाव: रक्षा क्षेत्र में लंबी छलांग, आत्मनिर्भरता की राह

Fri, 19 Jun 2026 07:17 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Fri, 19 Jun 2026 07:17 AM IST
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A Significant Milestone: A Giant Leap in the Defence Sector, A Path to Self-Reliance
एक अहम पड़ाव - फोटो : अमर उजाला
देश के रक्षा उत्पादन का सालाना आधार पर  करीब 15.6 फीसदी बढ़कर वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना रक्षा क्षेत्र में एक लंबी छलांग तो है ही, देश की सामरिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि है। यह अब तक का सर्वाधिक रक्षा उत्पादन है और इसका असर रक्षा निर्यात पर भी दिखाई दे रहा है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया, जो वैश्विक बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता और भरोसे को दर्शाता है।

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गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन मात्र 43,746 करोड़ रुपये का था, जिसके मुकाबले मौजूदा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है। जाहिर है, उत्पादन में यह वृद्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में किए गए सरकारी प्रयासों, विदेशी तकनीक पर निर्भरता के बजाय अपने खुद के अनुसंधान एवं विकास पर जोर देने और मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने का ही नतीजा है। सरकार ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू रक्षा निर्माताओं से खरीद के लिए आरक्षित रखा है।

यही वजह है कि इसमें केवल सरकारी उपक्रमों का ही योगदान शामिल नहीं है, बल्कि निजी कंपनियों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है और कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 22 फीसदी से बढ़कर 24 फीसदी हो गई है। मूल्य के हिसाब से रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान करीब 42,000 करोड़ रुपये रहा, जो अब तक का सर्वाधिक है। वित्त वर्ष 2017 के बाद से भारत का रक्षा उत्पादन 140 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि निजी क्षेत्रों का उत्पादन लगभग तीन गुना हो गया है, जिसमें करीब 198 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन में वृद्धि से आयात में कमी की गुंजाइश बनती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी।

रक्षा विनिर्माण इकाइयों के विकास से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, क्योंकि रक्षा उत्पादन में तेजी से कुशल इंजीनियरों और श्रमिकों को रोजगार मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। गौरतलब है कि भारत का कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये है, जो देश की जीडीपी का लगभग दो फीसदी है। हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद रक्षा अनुसंधान एवं विकास में निवेश अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका है। सेमीकंडक्टर, साइबर हमलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में भी देश को अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।
 
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