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'पैसे से न तो ताकत मिलती है और न ही स्वतंत्रता'
विवियन गोर्निक
Updated Fri, 09 Mar 2018 09:46 PM IST
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Vivian Gornick
मैं उपन्यास नहीं लिखती, लेकिन संस्मरण लिखती हूं और उसे कहानी के रूप में पेश करने की कोशिश करती हूं। एक गंभीर जीवन वही है, जिसका कोई मतलब होता है, कोई मकसद होता है।
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किसी भी संस्मरण में सच वास्तविक घटनाओं के जिक्र से नहीं सामने आता, बल्कि यह तब आता है, जब पाठकों को यह लगे कि लेखक ने अपने अनुभवों के साथ काफी मेहनत की है। लेखक का क्या हुआ यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्व इस बात है कि लेखक जिस व्यापक अर्थ को सामने लाने में सक्षम है, उसका क्या हुआ। साहित्य के प्रत्येक कार्य में परिस्थिति और कहानी दोनों होती है।
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परिस्थिति का मतलब कहानी के संदर्भ और कभी-कभी कथानक से है, जबकि कहानी वह भावनात्मक अनुभव, अंतर्दृष्टि और ज्ञान है, जो लेखकों को व्यस्त रखती है। यह विचार, कि पैसे से ताकत और स्वतंत्रता हासिल होती है, एक भ्रम है। पैसे से न तो ताकत मिलती है और न स्वतंत्रता। पैसे से आम तौर पर और पैसा कमाने की भूख जाग्रत होती है और उसके साथ एक दयनीय शक्तिहीनता आती है।
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मुझे अपने जीवन में स्वतंत्रता का जो मतलब समझ में आया, वह है, अकेलेपन का दर्द और आत्मज्ञान की खुशी। प्यार कभी भी रूपक नहीं हो सकता, अगर आप इससे बाहर जाकर साहित्य रचने की कोशिश करते हैं, तो यह कामयाब नहीं होगा। हमारे अंदर साहित्य का प्रवेश तब होता है, जब यह पढ़ते वक्त हमें अपने बारे में सूचना देता है कि हमें इसकी जरूरत है। जैसा कि प्यार, राजनीति या दोस्ती में होता है, इच्छा ही सब कुछ है।
-मशहूर अमेरिकी लेखिका