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'प्रकृति प्रेम और घुमक्कड़ी ने मुझे कवि बनाया'

Tue, 27 Feb 2018 02:12 PM IST
उत्पल कुमार बसु
उत्पल कुमार बसु Updated Tue, 27 Feb 2018 02:12 PM IST
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Utpal Kumar Basu- Classical Academy Award winning Bengali poet and story teller
Utpal Kumar Basu

मैं कोलकाता में पैदा हुआ। लेकिन मेरा बचपन मुर्शिदाबाद और दिनहाटा में बीता, जो कूचबिहार जिले में है। इसी दिनहाटा में बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद इरशाद का जन्म हुआ था। इन दोनों ही जगह की समृद्ध प्रकृति मुझे मुग्ध करती थी। बड़ा होकर मैं भूवैज्ञानिक बना, तो उसकी वजह प्रकृति के बीच बीते मेरे बचपन के दिन ही थे।

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मैंने जब कविता लिखनी शुरू की, तो रवींद्रनाथ का युग खत्म हो चुका था और कल्लोल युग के कवि अपनी चमक बिखेर रहे थे। यह बड़ी विडंबना है कि कल्लोल युग के सबसे चमकदार कवि जीवनानंद दास उस समय बेहद उपेक्षित थे। ऐसे में एक कवि के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना मेरे लिए चुनौती था। मैंने तय कर लिया था कि मैं किसी की नकल नहीं करूंगा। कुछ लोग मेरी कविताओं में जीवनानंद और विनय मजूमदार की छाप देखते हैं, जो सही नहीं है।
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मैंने प्रकृति को अपने समकालीनों की तरह नहीं देखा, क्योंकि मैं कवि के साथ विज्ञानी भी हूं। लिहाजा मैं एक पेड़ में उसकी खूबसूरती के साथ उसकी जीवंतता पर भी ध्यान देता हूं। उसी दौरान हंगरी जेनरेशन का प्रभाव आया और मैं उससे जुड़ गया। गिंसबर्ग कोलकाता आए, तो मलय रायचौधुरी और शक्ति चट्टोपाध्याय के अलावा मैं भी उनका दोस्त बन गया। मैं देश और विदेश-खासकर यूरोप में काफी घूमा। मैंने अपनी कविताओं में घुमक्कड़ी को भी प्रमुखता से दर्ज किया है। मेरा मानना है कि देश दुनिया को देखे बिना और लगातार पढ़े बगैर कोई कवि या लेखक सफल नहीं हो सकता।
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-साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त बांग्ला कवि

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