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'चीजों को समग्रता में देखें, तो दुनिया हमेशा सुंदर लगती है'
उर्सुला के. ले गुइन
Updated Fri, 19 Jan 2018 06:34 PM IST
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Ursula K. Le Guin
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मैं बचपन से साहित्य के प्रति दिलचस्पी रखती थी। लिखते रहने के करीब एक दशक बाद मेरी रचनाएं छपनी शुरू हुईं। मैंने साइंस फिक्शन (विज्ञान कथा) पर काफी काम किया। हालांकि मुझे नहीं लगता कि यह बहुत अच्छा नाम है, पर हमने इसे स्वीकार कर लिया है।
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यह अन्य तरह के लेखन से बिल्कुल अलग है। अगर कोई मुझे विज्ञान कथा लेखक कहता है, तो मुझे अच्छा नहीं लगता, क्योंकि मैं पिंजरे में कैद होकर रहना नहीं चाहती। मैं उपन्यासकार और कवि हूं। मेरे लेखन का फैलाव हर दिशा में है।
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कट्टर विज्ञान कथा लेखक भौतिकी, खगोल विज्ञान और रसायन को छोड़कर बाकी विषयों को खारिज करते हैं। उनके लिए जीव विज्ञान, समाज विज्ञान, मानव विज्ञान विज्ञान नहीं है। पर समाज विज्ञान मुझे काफी आकर्षित करता है। मैं उससे काफी विचार लेती हूं। जब मैं दूसरी दुनिया और दूसरे ग्रह के समाज के बारे में लिखती हूं, तो मैं उस समाज की जटिलता के बारे में इंगित करना चाहती हूं।
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मेरे पिता की दिलचस्पी और स्वाभाव ने भी मेरे व्यक्तित्व को गढ़ने में मदद की है। वह हर चीजों में दिलचस्पी रखते थे, उनसे मैंने काफी कुछ सीखा। यदि आप चीजों को समग्रता में देखते हैं, तो लगता है, यह पृथ्वी, यह जीवन हमेशा से सुंदर है।
केवल एक ही सवाल महत्वपूर्ण होता है, जो आप खुद से पूछते हैं। मेरी कल्पनाशीलता ने मुझे मानवीय बनाया। यह मुझे दुनिया सौंपती भी है और उससे मुक्त भी करती है। बिना पढ़ी कहानियां कागज पर काले धब्बे की तरह होती हैं। पाठक ही उसे जीवन देता है, जीवंत बनाता है।
-अमेरिकी उपन्यासकार