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'भूला और खोया हुआ ही सबसे अच्छा और महान होता है'

Fri, 29 Dec 2017 01:26 PM IST
रसूल हम्जातोव
रसूल हम्जातोव Updated Fri, 29 Dec 2017 01:26 PM IST
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Rasul Gamzatov Renowned Russian novelist and poet writer in the Avar language
Rasul Gamzatov

कहा जाता है कि 'हर किसी को अपना सिर और सिर पर समूरी टोपी को सुरक्षित रखना चाहिए।' जैसा कि सभी जानते हैं, हमारे यहां समूरी टोपी भेड़ की खाल से बनाई जाती है। लेकिन पहाड़ी आदमी का सिर सैकड़ों वर्षों तक वह एकमात्र अलिखित पुस्‍तक था, जिसमें हमारी भाषा, हमारा इतिहास, हमारी दास्‍तानें, हमारे किस्‍से-कहानियां, आख्‍यान, रीति-रिवाज और वह सभी कुछ सुरक्षित रहा, जिसकी जनता ने कल्‍पना की।

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भेड़ की खाल ने सदियों तक दागिस्‍तान की इस अलिखित पुस्‍तक (पहाड़ी आदमी के सिर) की रक्षा की, उसे गर्माया, उसे सहेजा। बहुत कुछ तो सुरक्षित रह गया और हम तक पहुंच गया, लेकिन बहुत कुछ खो भी गया, रास्‍ते में भटक गया और हमेशा के लिए तबाह हो गया। कहा जाता है कि भूला और खोया हुआ ही सबसे अच्‍छा और महान होता है। क्‍योंकि जब हम कविता सुनाते हैं और कोई एक पंक्ति भूल जाते हैं, तो हमें उसी की सबसे अधिक जरूरत महसूस होती है।
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जो कुछ बाकी बच गया है, जब मैं उसे सुनता और पढ़ता हूं, तो मेरा दिल खिल उठता है। मैं सच्‍चे दिल से गरीब पहाड़ी लोगों को धन्‍यवाद देता हूं, जो हमारी अलिखित पुस्‍तकों को अपनी हृदयों में सहेजे रहे और उन्‍हें हमारे समय तक लाए। बहुत कुछ विस्‍मृत हो जाता है। सैकड़ों पंक्तियों में से केवल एक पंक्ति बची रह जाती है और अगर वह बची रह जाती है, तो हमेशा के लिए। पुस्तक तो उस सूर्य की भांति है, जिसने पर्वतों के पीछे से ऊपर उठकर घाटी को रोशन कर दिया, अंधेरे और जहालत को छिन्‍न-भिन्‍न कर डाला।
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 -मशहूर रूसी उपन्यासकार

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