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मां वो लाल वाली फ्राक दिला दो न!
शालिनी
Updated Thu, 09 Jun 2016 09:26 PM IST
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'मां उस शो-केस में बहुत अच्छे-अच्छे फ्राक लगे होते हैं।'
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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वह जब भी उधर से गुजरती थी, मां से कहती, “मां उस शो-केस में बहुत अच्छे-अच्छे फ्राक लगे होते हैं। वो लाल वाली फ्राक खरीद दो न!”
मां हाथ पकड़कर खींचते हुए चली जाती है। घर ले जाकर समझाती है, “कैसे खरीद सकते हैं, वो फ्राक महंगी होगी। शो-केस में लगी है।“
बच्ची का मन आ गया था उस फ्राक पर।
एक दिन सुबह उठकर वह बोली, “मां! मैंने सपने में वह लाल वाली फ्राक देखी है। तुम तो कहती हो कि सुबह का सपना सच होता है... तो क्या आज फ्राक दिलवाओगी?”
मां उसकी बात को टालते हुए कहती है, “अच्छा, तैयार हो जाओ... स्कूल का टाइम हो रहा है। मेरा भी काम पर जाने का टाइम हो गया।“
कुछ दिनों बाद।
“मां आज तो आपकी तनख्वाह मिलेगी... फ्राक खरीद सकती हो!”
“हां, बस यही काम है न! घर का राशन, तुम्हारी फीस और पापा की दवाइयां कैसे लाऊंगी? अगले महीने देखूंगी।“
“मां सुनो! पिछली बार जब मामा आए थे तो 200 रुपए दिए थे। कुछ पैसे मेरी गुल्लक में भी हैं। दोनों मिलाकर हो जाएगा।“
मां ने कहा, “ठीक है... आज कीमत पूछते हुए आऊंगी।“
ड्यूटी से लौटते वक्त मां दुकान पर गई और थोड़ा हिचकते हुए पूछा कि शो-केस में लगे उस लाल फ्राक की कीमत क्या है। दुकानदार ने बताया 950 रुपये तो वह चुपचाप वापस आ गई।
घर लौटकर उसने बेटी से बताया कि वह फ्राक बहुत महंगी है। बेटी ने कहा, “उस शो-केस में मैंने बहुत सारे फ्राक लगे हुए देखे, जो 10 से 15 दिन में हट जाते और नए आ जाते थे। लेकिन यह करीब एक महीने से लगी हुई है। शायद इसीलिए नहीं बिक रही है कि इतनी महंगी है। इतनी महंगी चीजें तो बहुत पैसे वाले लोग खरीदते होंगे न? कोई बात नहीं मां! जाने दो...”
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मां ने कहा, “चिंता मत करो... दीपावली में मुझे बोनस मिलेगा तो खरीद दूंगी।“
दिन बीतते गए। दीपावली के चार दिन पहले मां का बोनस मिलता था। मां ने स्कूल जाने से पहले ही बेटी को बता दिया कि शायद आज बोनस के पैसे मिल जाएं। बच्ची रास्ते भर मनाती रही- हे भगवान! मां को बोनस आज ही मिल जाए। नहीं तो दीपावली की तैयारी में मां के पैसे आज ही खर्च हो जाएंगे। दीपावली के एक दिन पहले मां खरीदारी करती हैं। दीपावली को तो हम लोग पुराने कपड़े ही धुलकर पहनते थे पर इस बार मैं नई फ्राक पहनूंगी। उसने स्कूल में अपने दोस्तों को भी यह बात बता दी।
उस दिन शाम को मां-बेटी फ्राक खरीदने के लिए बाजार निकल पड़े। सड़क पार करते हुए बेटी की आंखें शो-केस में उसी फ्राक को तलाश रही थीं। तभी तेजी से आती एक कार ने उसे टक्कर मार दी। बेटी के मुंह से चीख निकलती है, “मांSSS फ्राSSSक!” और वह वहीं सड़क पर ढेर हो जाती है। मां मदद के लिए चिल्लाने लगती है। कुछ लोगों की मदद से उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचती है मगर तब तक बेटी की सांसें थम चुकी थीं।
मां उसके शव को लेकर घर आ जाती है। बेटी के क्रियाकर्म की तैयारी चल रही होती है तभी मां बिना किसी से कुछ कहे घर से निकल जाती है और उस दुकान पर पहुंचकर कहती है, “मुझे वो लाल वाली फ्राक चाहिए जो यहां शो-केस में लगी थी।“ दुकानदार ने कहा, “वह तो बिक गई।“ वह दुकानदार के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगती है, “मेरी बेटी को वह बहुत पसंद थी... आज हम उसे खरीदने आ रहे थे तभी उसका एक्सीडेंट हो गया और वह हमें छोड़कर चली गई। मैं चाहती हूं कि वैसी ही फ्राक पहनाकर उसका अंतिम करूं।“
“अच्छा आप उठिए... मेरे दूसरे शो-रूम पर होगा। मैं देखता हूं।“ वह दुकानदार के साथ उसके दूसरे शो-रूम पर जाती है। वहां काम करने वाले लड़के ने कहा, “कुछ कर्टन बंद हैं शायद उसमें हो।“ वह सारे कर्टन चेक करवाती है। काफी देर की मेहनत के बाद वैसी ही लाल रंग की फ्राक उसे मिल जाती है।
वह फ्राक लेकर बहुत तेजी से घर की तरफ भागती है। घर पहुंचने पर उसे बेटी की लाश नहीं मिलती। वह भागते-भागते वहां पहुंचती है जहां बेटी को दफनाया जा रहा होता है। उसके ऊपर मिट्टी डाली जा रही थी।
वह चीखती हुई बोली, “क्यों किया आप लोगों ने ऐसा? मेरा इंतजार नहीं कर सकते थे? मुझे अपनी बेटी को यह फ्राक पहनाना था...” वह उसके ऊपर पड़ी मिट्टी को हटाने लगती है।
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मां हाथ पकड़कर खींचते हुए चली जाती है। घर ले जाकर समझाती है, “कैसे खरीद सकते हैं, वो फ्राक महंगी होगी। शो-केस में लगी है।“
बच्ची का मन आ गया था उस फ्राक पर।
एक दिन सुबह उठकर वह बोली, “मां! मैंने सपने में वह लाल वाली फ्राक देखी है। तुम तो कहती हो कि सुबह का सपना सच होता है... तो क्या आज फ्राक दिलवाओगी?”
मां उसकी बात को टालते हुए कहती है, “अच्छा, तैयार हो जाओ... स्कूल का टाइम हो रहा है। मेरा भी काम पर जाने का टाइम हो गया।“
कुछ दिनों बाद।
“मां आज तो आपकी तनख्वाह मिलेगी... फ्राक खरीद सकती हो!”
“हां, बस यही काम है न! घर का राशन, तुम्हारी फीस और पापा की दवाइयां कैसे लाऊंगी? अगले महीने देखूंगी।“
“मां सुनो! पिछली बार जब मामा आए थे तो 200 रुपए दिए थे। कुछ पैसे मेरी गुल्लक में भी हैं। दोनों मिलाकर हो जाएगा।“
मां ने कहा, “ठीक है... आज कीमत पूछते हुए आऊंगी।“
ड्यूटी से लौटते वक्त मां दुकान पर गई और थोड़ा हिचकते हुए पूछा कि शो-केस में लगे उस लाल फ्राक की कीमत क्या है। दुकानदार ने बताया 950 रुपये तो वह चुपचाप वापस आ गई।
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घर लौटकर उसने बेटी से बताया कि वह फ्राक बहुत महंगी है। बेटी ने कहा, “उस शो-केस में मैंने बहुत सारे फ्राक लगे हुए देखे, जो 10 से 15 दिन में हट जाते और नए आ जाते थे। लेकिन यह करीब एक महीने से लगी हुई है। शायद इसीलिए नहीं बिक रही है कि इतनी महंगी है। इतनी महंगी चीजें तो बहुत पैसे वाले लोग खरीदते होंगे न? कोई बात नहीं मां! जाने दो...”
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मां ने कहा, “चिंता मत करो... दीपावली में मुझे बोनस मिलेगा तो खरीद दूंगी।“
दिन बीतते गए। दीपावली के चार दिन पहले मां का बोनस मिलता था। मां ने स्कूल जाने से पहले ही बेटी को बता दिया कि शायद आज बोनस के पैसे मिल जाएं। बच्ची रास्ते भर मनाती रही- हे भगवान! मां को बोनस आज ही मिल जाए। नहीं तो दीपावली की तैयारी में मां के पैसे आज ही खर्च हो जाएंगे। दीपावली के एक दिन पहले मां खरीदारी करती हैं। दीपावली को तो हम लोग पुराने कपड़े ही धुलकर पहनते थे पर इस बार मैं नई फ्राक पहनूंगी। उसने स्कूल में अपने दोस्तों को भी यह बात बता दी।
उस दिन शाम को मां-बेटी फ्राक खरीदने के लिए बाजार निकल पड़े। सड़क पार करते हुए बेटी की आंखें शो-केस में उसी फ्राक को तलाश रही थीं। तभी तेजी से आती एक कार ने उसे टक्कर मार दी। बेटी के मुंह से चीख निकलती है, “मांSSS फ्राSSSक!” और वह वहीं सड़क पर ढेर हो जाती है। मां मदद के लिए चिल्लाने लगती है। कुछ लोगों की मदद से उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचती है मगर तब तक बेटी की सांसें थम चुकी थीं।
मां उसके शव को लेकर घर आ जाती है। बेटी के क्रियाकर्म की तैयारी चल रही होती है तभी मां बिना किसी से कुछ कहे घर से निकल जाती है और उस दुकान पर पहुंचकर कहती है, “मुझे वो लाल वाली फ्राक चाहिए जो यहां शो-केस में लगी थी।“ दुकानदार ने कहा, “वह तो बिक गई।“ वह दुकानदार के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाने लगती है, “मेरी बेटी को वह बहुत पसंद थी... आज हम उसे खरीदने आ रहे थे तभी उसका एक्सीडेंट हो गया और वह हमें छोड़कर चली गई। मैं चाहती हूं कि वैसी ही फ्राक पहनाकर उसका अंतिम करूं।“
“अच्छा आप उठिए... मेरे दूसरे शो-रूम पर होगा। मैं देखता हूं।“ वह दुकानदार के साथ उसके दूसरे शो-रूम पर जाती है। वहां काम करने वाले लड़के ने कहा, “कुछ कर्टन बंद हैं शायद उसमें हो।“ वह सारे कर्टन चेक करवाती है। काफी देर की मेहनत के बाद वैसी ही लाल रंग की फ्राक उसे मिल जाती है।
वह फ्राक लेकर बहुत तेजी से घर की तरफ भागती है। घर पहुंचने पर उसे बेटी की लाश नहीं मिलती। वह भागते-भागते वहां पहुंचती है जहां बेटी को दफनाया जा रहा होता है। उसके ऊपर मिट्टी डाली जा रही थी।
वह चीखती हुई बोली, “क्यों किया आप लोगों ने ऐसा? मेरा इंतजार नहीं कर सकते थे? मुझे अपनी बेटी को यह फ्राक पहनाना था...” वह उसके ऊपर पड़ी मिट्टी को हटाने लगती है।