'खुद को आईने में देखना बहुत मुश्किल होता है'

जोरी ग्राहम Updated Wed, 10 Jan 2018 12:42 PM IST
Jorie Graham, American poet
Jorie Graham, American poet
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मुझे लगता है कि मैं दूसरी दुनिया के मौन से प्यार करती हूं। और मैं उसी के साथ गंभीरता से संवाद करने के लिए लिखती हूं। हालांकि हमेशा से यह इच्छा रहती है कि ध्वनि और मौन-दो अलग दुनियाएं नहीं हैं। हमारे समय में भाषा के रचनात्मक उपयोग का मुख्य काम है लगातार शब्दों के अर्थों को बहाल करने की कोशिश करना, ताकि जिम्मेदारियों के तत्वों को जीवित रखा जा सके।
खुद को आईने में देखना और ऐसा कुछ देख पाना, जो स्वयं के होने का अनुभव कराए, बहुत मुश्किल होता है। मुझे लगता है कि यह असहजता और विघटन का क्षण एक ऐसा क्षण होता है, जब ऐसे अनुभव प्राप्त होते हैं, जो कविता को समझने या महसूस करने में मदद करते हैं। मैं अपने गीतों में काफी कुछ पिरोना चाहती थी, लेकिन उसकी सीमा से परे जाकर नहीं।

मैं बस यही चाहती थी कि अनुभवों की विराटता को उस स्तर पर ले जाया जाए कि वह भावनात्मक बनी रहे। तमाम बातों के बावजूद कविता एक निजी कहानी है, भले ही वह कितनी ही सार्वजनिक क्यों न हो गई हो। पाठक हमेशा कवियों की स्वीकारोक्ति सुनता है। अपनी पसंद की कविताओं में मैं जिस चीज को सबसे ज्यादा पसंद करती हूं, वह है साहस।

पानी में जादू होता है, क्योंकि यह कई रूप ले सकता है। यह जीवन की बुनियादी जरूरत है, इसलिए पवित्र है। इसलिए पानी, जो इस पृथ्वी की जीवनरेखा है, की पवित्रता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। लेकिन हम इसे बर्बाद कर रहे हैं। इसलिए मैंने बार-बार अपनी कविताओं में इसका जिक्र किया है। हमारे जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जो स्वर्ग का आनंद देते हैं।

-अमेरिकी कवयित्री

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