फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   job, marriage and family, an insperitional story of women life

शादी, परिवार और नौकरी, पढ़िए एक महिला के जीवन की कहानी

Thu, 28 Dec 2017 05:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला Updated Thu, 28 Dec 2017 05:11 PM IST
विज्ञापन
job, marriage and family, an insperitional story of women life

किरण एक दिन ऑफिस से घर लौटी, तो मां ने गर्मागर्म पकौड़े बनाकर रखे थे। किरण का मूड बहुत अच्छा था। पकौड़े खाने के बाद किरण सोचने लगी, मां सचमुच कितना अच्छा खाना बनाती हैं। किरण ने हंसी-मजाक में ही मां से पूछा, मां, आपके मन में कभी कोई रेस्टोरेंट खोलने का ख्याल नहीं आया। मां मुस्कराईं और बोलीं, बेटा, कभी मुझे इतनी फुर्सत ही नहीं मिल पाई कि मैं अपने लिए कुछ सोच पाऊं। पहले शादी, फिर बच्चे, उनकी पढ़ाई, उनका करियर आदि-आदि।

विज्ञापन


किरण एकटक मां का चेहरा देख रही थी और सोच रही थी कि शायद हर महिला की कहानी ऐसी ही होती है। अगले दिन किरण ऑफिस के लिए निकल गई, लेकिन मां की बात अब तक उसके मन में घूम रही थी। किरण जब बस में बैठी, तो उसके बगल वाली सीट पर एक वृद्ध महिला बैठी मुस्करा रही थी। किरण ने पूछा, आप क्या करती हैं, आप बहुत खुश दिख रही हैं! वह महिला बोली, मेरी नौकरी का आज पहला दिन है, मैं ऑफिस जा रही हूं। किरण उनको देखकर हैरान थी।
विज्ञापन


किरण दोबारा सवाल पूछती, उससे पहले ही महिला ने जवाब दिया, मेरी कहानी बहुत लंबी है। मेरी पूरी जिंदगी दूसरों के घरों पर काम करते हुए बीती। असल में शादी के एक साल बाद ही मेरा बेटा हो गया। लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही मेरे पति की एक हादसे में मृत्यु हो गई। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं नौकरी करूंगी। पर मेरे पास और कोई चारा नहीं था। लोगों के घर काम कर अपने बेटे को पढ़ाया-लिखाया। आज वह अफसर बन गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसी ने मुझे दोबारा पढ़ने को कहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद बेटे ने कहा, आप अकेले घर पर क्या करोगी, क्यों न नौकरी कर लो। आपका मन लगा रहेगा। जब मैं पहली बार इंटरव्यू देने गई, तो लगा, जैसे मैं दोबारा पच्चीस की हो गई हूं। और यह कंपनी भी जैसे कई साल से मेरा इंतजार कर रही थी। आज मैं पहली बार अपनी जिंदगी की पहली नौकरी पर जा रही हूं। यह सुनकर किरण के मन में जैसे खुशी की लहर दौड़ गई।

अपने सपने पूरे करने के लिए कोई उम्र बड़ी नहीं होती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed