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प्रकृति और लोगों से सामंजस्य बनाना अच्छा लगता है: जैन मॉरिस
जैन मॉरिस
Updated Thu, 25 Jan 2018 07:26 PM IST
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jan worris
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मेरा जन्म दो अक्तूबर, 1926 को सॉमरसेट (इंग्लैंड) में हुआ। मैं अपने घर को अन्य निर्जीव वस्तुओं से ज्यादा प्यार करता हूं। इसमें चालीस-चालीस फीट के दो लंबे कमरे हैं, जो किताबों से अटे पड़े हैं। मुझे लोग यात्रा लेखक के रूप में जानते हैं। पर मैं इसका प्रतिकार करता हूं। मैं इस विचार को नहीं मानता कि यात्रा लेखन को तथ्यात्मक होना चाहिए। मैं इसकी कल्पनाशील गुणवत्ता और साहित्य व कला के रूप में इसकी क्षमता में यकीन रखता हूं।
मेरे अभियान का कुछ फल मिला है, आजकल किताबों की दुकानों पर ऐसी किताबों का ढेर होता है, जिसे यात्रा साहित्य कहा जाता है। मैं खुद को साहित्यिक कहलाना पसंद करता हूं। मेरे लेखन का विषय ज्यादातर जगहों से संबंधित है। लेकिन मैं मानता हूं कि स्थलाकृति के मुकाबले मेरी सबसे अच्छी पुस्तकें ऐतिहासिक विषयों पर हैं। यात्रा, जो कभी या तो जरूरत या साहसिक चीज थी, अब काफी हद तक व्यापार की वस्तु बन गई है। लेकिन हर दृष्टि से सोचने पर लगता है कि यह एक सामाजिक जरूरत भी है। हालांकि दुनिया भर में यात्रा करना जरूरी नहीं है।
कई महान लोगों ने घर के करीब रहना ही पसंद किया है। दा विंची और बीथोवन कभी यूरोप छोड़कर नहीं गए। शेक्सपीयर शायद ही कभी कहीं जाते थे। मैं अपने जीवन में सामंजस्य के विचार से काफी प्रभावित रहा हूं। खास तौर से प्रकृति और लोगों के साथ भी सामंजस्य स्थापित करना मुझे अच्छा लगता है। मुझे लगता है कि यात्रा उसी दिशा में एक खोज है। इसे आप एकता की भावना में योगदान का प्रयास कह सकते हैं।
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-ब्रिटिश इतिहासकार और यात्रा लेखक
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मेरे अभियान का कुछ फल मिला है, आजकल किताबों की दुकानों पर ऐसी किताबों का ढेर होता है, जिसे यात्रा साहित्य कहा जाता है। मैं खुद को साहित्यिक कहलाना पसंद करता हूं। मेरे लेखन का विषय ज्यादातर जगहों से संबंधित है। लेकिन मैं मानता हूं कि स्थलाकृति के मुकाबले मेरी सबसे अच्छी पुस्तकें ऐतिहासिक विषयों पर हैं। यात्रा, जो कभी या तो जरूरत या साहसिक चीज थी, अब काफी हद तक व्यापार की वस्तु बन गई है। लेकिन हर दृष्टि से सोचने पर लगता है कि यह एक सामाजिक जरूरत भी है। हालांकि दुनिया भर में यात्रा करना जरूरी नहीं है।
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कई महान लोगों ने घर के करीब रहना ही पसंद किया है। दा विंची और बीथोवन कभी यूरोप छोड़कर नहीं गए। शेक्सपीयर शायद ही कभी कहीं जाते थे। मैं अपने जीवन में सामंजस्य के विचार से काफी प्रभावित रहा हूं। खास तौर से प्रकृति और लोगों के साथ भी सामंजस्य स्थापित करना मुझे अच्छा लगता है। मुझे लगता है कि यात्रा उसी दिशा में एक खोज है। इसे आप एकता की भावना में योगदान का प्रयास कह सकते हैं।
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-ब्रिटिश इतिहासकार और यात्रा लेखक