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'कला शैक्षणिक होती है, जो सत्य का संधान करती है'

Tue, 10 Jul 2018 03:52 PM IST
ईमान मर्सल
ईमान मर्सल Updated Tue, 10 Jul 2018 03:52 PM IST
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Iman Mersal- Egyptian poet, essayist, translator and literary scholar

आपके टिकने की जगह या 'पोजिशन' का सवाल, लेखन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। फर्ज कीजिए, हम पांच कवियों को एक गुलाब या एक लाश देते हैं और उस पर लिखने के लिए कहते हैं। जिस 'पोजिशन' से वे उस पर लिखेंगे, वही 'पोजिशन' उन्हें एक-दूसरे से अलग करेगी। कुछ लोग इसे 'एक लेखक द्वारा अपनी आवाज पा लेना' कहते हैं। अपनी पोजिशन पाने में बहुत समय लगता है और मेरा मानना है कि लेखन में यही बुनियादी चुनौती भी है। एक बार आपने अपनी पोजिशन पा ली, लेखन अपने आप खुलने लगता है, हालांकि उस समय नई चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।

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कुछ लोग कविता को विरोध की आवाज कहते हैं। यह ऐसी बात है, जिससे मैं अपने अब तक के जीवन में जुड़ाव नहीं महसूस कर पाती। शायद ऐसा उस संस्कृति के कारण है, जहां से
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मैं आती हूं। औपनिवेशिक युग की समाप्ति के बाद बहुत बड़े राजनीतिक सवाल खड़े हुए थे, उन पर बौद्धिक-विचारधारात्मक बहसें चलीं, और उसके बाद अरब साहित्यिक पटल पर फलीस्तीनी त्रासदी ने बहुत बड़ी जगह घेर ली।
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उस दौर से महान कवि निकलकर आए, जैसे कि महमूद दरवेश, फिर भी मेरा मानना है कि उनकी कविता में काव्यशास्त्र का जो सुंदर प्रयोग है, वह प्रतिवाद या विरोध के इस तत्व से पूर्णतः स्वतंत्र है। प्रामाणिक कला, अपनी शैक्षणिक भूमिका अदा करती हुई एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक धारा हो सकती है। जैसा कि बादू ने कहा है, कला शैक्षणिक होती है, क्योंकि यह सत्य का संधान करती है और शिक्षा भी इससे अलग कुछ नहीं करती : यानी ज्ञान की विभिन्न विधाओं का संयोजन इस तरह करना कि सत्य उसमें एक छोटा-सा छेद कर सके।
-मिस्र की चर्चित कवयित्री

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