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'लेखन एक मौन गतिविधि है, खुद को अभिव्यक्त करने का ये सबसे अच्छा तरीका'
हर्ता म्यूलर
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:56 AM IST
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Herta Müller
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भाषा जीवन से बहुत अलग होती है। मैं इन दोनों को एक-दूसरे में कैसे मिला सकती हूं! स्मृति समेत साहित्य में हर चीज पुरानी होती है। जो कहा नहीं जा सकता, उसे लिखा जाता है, क्योंकि लेखन एक मौन गतिविधि है, जो सिर और हाथ के जरिये की जा सकती है। मैं हमेशा स्वयं से कहती हूं कि मुझमें बहुत ज्यादा भावनाएं नहीं हैं। यहां तक कि जब कोई चीज मुझे प्रभावित करती है, तो मैं उससे थोड़ी दूर हो जाती हूं।
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मैं बिल्कुल भी नहीं रोती। ऐसा नहीं है कि रोने वाले लोगों की तुलना में मैं ज्यादा साहसी हूं। रोने वालों के पास साहस होता है, जबकि मैं कायर हूं। हालांकि अंतर बहुत कम है, मैं अपनी ताकत का इस्तेमाल न रोने के लिए करती हूं। जब मैं स्वयं भावुक होती हूं, तो पीड़ित पक्ष को उठाती हूं, और कहानी में उसकी मरहम पट्टी करती हूं, जो विलाप नहीं करता है। मेरा मानना है कि दुख से मानव जीवन में सुधार नहीं आ सकता। जीवन में कभी न कभी आपके ऊपर इतना बोझ आ जाता है कि आप उसे झेल नहीं सकते।
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ऐसी ही परिस्थितियों में मैंने लिखना शुरू किया था, क्योंकि शब्दों को छोड़कर खुद को अभिव्यक्त करने का और कोई तरीका मेरे पास नहीं था। मैंने हमेशा केवल अपने बारे में लिखा है। लिखते वक्त खुद लेखक को यह पता नहीं होता है कि उसकी रचना कैसी है। जब लेखन पूर्ण हो जाता है, तभी इसका पता चलता है। एक समय मैं यह सोच रही थी कि जिस तरह से हम काम करते हैं, दुनिया में लोगों को उससे अलग तरीके से बिना किसी रक्षक के चलना चाहिए, जहां लोगों को अलग तरीके से सोचने और लिखने की इजाजत हो।
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-नोबेलजयी जर्मन उपन्यासकार