महिलाओं पर होने वाली हिंसा के पीछे पुरुष मानसिकता जिम्मेदार?

टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Feb 2017 12:24 PM IST
'Guilty men behind violence against women'
एसिड अटैक की बढ़ती घटनाओं पर लोगों का ध्यान खींचने और इस मुद्दे पर लोगों को जागरुक करने के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) में 23 फरवरी को पत्रकार और लेखिका प्रतिभा ज्योति की किताब ‘एसिड वाली लड़की’को केंद्र में रख कर एक संवाद आयोजित किया गया। इस मौके पर स्त्री विमर्श पर 'मेरा रंग' के नाम से वैकल्पिक मीडिया संस्था की संस्थापक व संचालक शालिनी श्रीनेत ने प्रतिभा ज्योति से उनकी किताब और उनके शोध पर बातचीत की।  

कार्यक्रम की शुरुआत कला निधि के एचओडी डॉ गोस्वामी ने की। उन्होंने बताया कि आइजीएनसीए कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के अलावा ऐसे विषयों को भी प्राथमिकता देता है जो समाज में जागरुकता लाने का काम करती है। इसी क्रम में ‘एसिड वाली लड़की’ यह परिचर्चा रखी गई है। किताब पर चर्चा से पहले प्रतिभा ज्योति ने अपनी किताब की एक कहानी के कुछ अंश पढ़ कर सुनाए। उसके बाद शालिनी श्रीनेत ने उनसे बातचीत  शुरु की। 

शालिनी के साथ किताब और लेखिका के अनुभवों को लेकर सवाल-जवाब का दौर शुरु हुआ जो लंबा चला। आयोजन में उपस्थित पत्रकारों, सोशल एक्टीविस्ट, आईजीएनसीए के सदस्यों तथा स्टूडेंट्स ने भी प्रतिभा ज्योति से एसिड अटैक से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर सवाल पूछे जैसे-एसिड अटैक करने के पीछे की मुख्य वजह क्या है? इसके लिए कौन सा कानून है और इसके लिए कितनी सजा दी जाती है, दूसरे देशों में एसिड अटैक की कितनी घटनाएं होती है?  

आइजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने एसिड हमले रोकने के लिए लोगों को जागरुक बनाने के लिए यह मंच प्रदान किया जिससे कि इस गंभीर और चिंताजनक विषय पर  ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बात पहुंचाई जा सके।  परिचर्चा में शामिल हुए लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि ज्यादतर मामलों में महिलाओं पर होने वाले हिंसा के पीछे पुरुषों की यह मानसिकता काम करती है कि महिलाएं उनसे कमजोर है। इसके लिए हमारा पारिवारिक और सामाजिक परिवेश भी जिम्मेदार है जो पुरुषों को श्रेष्ठ बनाता है और महिलाओं को कमतर आंकता है। अंत में सबने माना कि इस तरह की चर्चा लगातार होना जरुरी है कि जिससे कि एसिड की बिक्री पर नियंत्रण हो सके और लोगों को एसिड अटैक से बचाया जा सके।

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