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'एक कवि के लिए उसका बचपन निर्णायक होता है'

जॉर्ज सेफेरिस Updated Wed, 22 Aug 2018 03:34 PM IST
जॉर्ज सेफेरिस
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कल्पना के बारे में अजीब बात यह है कि वह अवचेतन मन का सौदा है। कोई नहीं जानता कि कब वह कविता के रूप में प्रकट हो जाती है। लेकिन यह तय है कि वह कवि के अवचेतन मन में समाई रहती है, और यही कारण है कि बचपन, कवि के जीवन में एक निर्णायक भूमिका निभाता है। मुझे यह भी लगता है कि कवि के अवचेतन जीवन में निहित कल्पनाएं अक्सर बचपन पर आधारित होती हैं और यही कारण है कि एक कवि के लिए उसका भोगा हुआ बचपन निर्णायक होता है।
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मैं समझता हूं कि दो भिन्न चीजें काम करती हैं-चेतन और अवचेतन स्मृति। कविता का रास्ता अवचेतन से निकलता है। मुझे अपने बचपन की बहुत-सी चीजें याद हैं, जिन्होंने मुझे प्रभावित किया। उदाहरण के लिए, जब मैं बच्चा था, तब गर्मियों के दिनों में हम, मेरी दादी के बंगले में मौजूद बगीचे में अपना समय गुजारा करते थे। वहां एक जहाज में मुझे एक परकार मिला था। बाद में मुझे पता चला कि वह परकार मेरे दादा का था। मेरे लिए वह पौराणिक वस्तु था।

उस अजीब यंत्र को मैंने बार-बार परख कर, फिर जोड़कर, फिर अलग करके उसे खत्म कर दिया। शरद ऋतु आने पर बहुत तेज हवा चलती। ऐसे खराब मौसम में भी मछुआरे मछलियां पकड़ने निकल जाते। जब वे वापस आकर लंगर डालते, तब हम सब खुश हो उठते। जब मैंने यूलिसिस के बारे में अपनी पहली कविता (‘अपॉन अ फॉरेन वर्स’) लिखी थी, तब शायद मेरे दिमाग में कोई मछुआरा ही रहा होगा और अपने बचपन के वे बूढ़े नाविक, जो संगीत सुनाते थे। मुझे लगता है कि अवचेतन मन की छवियों को जगाकर उन्हें प्रकाश में लाना हमेशा जोखिम से भरा होता है।
-नोबेलजयी यूनानी कवि

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