फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   Dharamvir Bharati was a renowned Hindi poet, author, playwright and a social thinker of India

अंतर्ध्वनि: सब कुछ लुप्त हो गया था और विराट के सामने मैं अकेला था-बिल्कुल अकेला...

Fri, 20 Sep 2019 08:54 AM IST
Dharamvir Bharati धर्मवीर भारती
Updated Fri, 20 Sep 2019 08:54 AM IST
विज्ञापन
Dharamvir Bharati was a renowned Hindi poet, author, playwright and a social thinker of India
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels

क्वार-कातिक के आसमान में अकस्मात बादल घिर आए थे...घुप अंधेरा था और बीच-बीच में बिजलियां चमक रही थीं, खिड़की के सामने दूर तक जाती हुई पक्की गली, सीढ़ियां, मकानों के खाली चबूतरे, छतें, और ऊपर टंगे हुए आकाशदीप उन बिजलियों के प्रकाश में वैसे कांप उठते थे, जैसे जल में पड़ती हुई किसी नगर की छाया कांप-कांप उठे और एक अजीब बात थी, उस दिन की बिजलियां गहरे नीले, बल्कि बैंजनी रंग की थीं...एक दिन तो नीले फूल ऐसे लगे थे, जैसे नीले क्षण खिल आए हों और असीम विस्तार में फैल गए हों... पर उस दिन नीलेपन के दूसरे आयाम का बोध हुआ।

विज्ञापन


असीम गहनता और किसी निकट खड़ी जलपरी के केशों पर, माथे पर, कंधों पर, बांहों पर फिसलती हुई क्वार की बौछार की असीम मधुराई और कोमलता। और क्षण की अथाह नीलिमा का एक दूसरा चित्र मेरे स्मृतिपट पर उभर रहा है...शाम की धुंध। हलके नीले पुते मेरे कमरे में धूप के धुएं की लहरों का जाल। ऊपर सिर्फ एक लजीली नीली बत्ती जल रही थी और सिरहाने तिरछी कुर्सी पर तिरछी बैठी हुई मृदुल नील ममता।
विज्ञापन


मुझ पर आशीर्वाद सी छाई हुई... और एक अनंत गहराई और अनंत ऊंचाई वाला प्यार जो देने से घटता नहीं, जो आदमी को ऊंचा उठाता है...उदार, प्रांजल, सहज और सशक्त बनाता है...। और नीला क्षण एक वह भी था, जब हिमालय की घाटियों में पहली बार नीले बादलों के श्वेत अंधकार से घिर गया था और सब कुछ लुप्त हो गया था और विराट के सामने मैं अकेला था-बिल्कुल अकेला ...।
विज्ञापन
विज्ञापन


और ऐसे क्षणों में जब मनुष्य विराट् के सम्मुख अपने को अकेला पाता है, तो वह एक बार अपने सारे अस्तित्व जांचता है और पाता है कि सब नष्ट हो गया है, सिर्फ वे चंद क्षण बच रहे हैं, जिनमें उसने अपने को दिया है असीम ममता से...बाकी सब झूठ है...।

(दिवंगत हिंदी लेखक।)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed