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पुस्तक समीक्षा: घूमती दुनिया

Sun, 18 Jun 2017 04:22 PM IST
डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य
डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य Updated Sun, 18 Jun 2017 04:22 PM IST
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book review of Ghoomti Duniya
- फोटो : reuters

घूमती दुनिया 

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संवादों में संवरता लेखन
 
एक अंक वाले नाटकों को एकांकी कहा जाता है। हरिश्चंद्र शाक्य की किताब 'घूमती दुनिया' में चार एकांकी प्रस्तुत की गई हैं। कविता और कहानी के बीच कहीं गुम हो चुकी एकांकी की इस शैली को लेखक ने फिर से जीवन देने की जो कोशिश इस किताब के जरिये की है, वह गौर करने लायक है। इससे पहले भी हरिश्चंद्र कई पुस्तकों का लेखन और संपादन कर चुके हैं।

उनका यही अनुभव इस किताब में उनकी लेखनी के जरिये प्रदर्शित होता है। एकांकी  'एक मनहूस दिन', 'जिंदा मौत', 'मुसीबत का मारा', 'घूमती दुनिया' के जरिये लेखक ने संवादों की सहज और रोमांचक शैली पेश की है। इसमें कविता जैसा रस भी है, कहानी जैसे दृश्य भी और नाटक जैसे संवाद भी। लेआउट और डिजाइन के लिहाज से भी किताब संग्रहणीय है।
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लेखक
डॉ. हरिश्चंद्र शाक्य
प्रकाशक
निरुपमा प्रकाशन
मूल्य
60 रुपये

सप्ताह की किताबें

book review of Ghoomti Duniya

मेरा राम, मेरा देश 

रामायण के आईने में भारत

की कोशिश है, जो दिलचस्पी पैदा करती है। लेखक ने यहां राम को ईश्वर स्वरूप मानने की बजाय, उनके पराक्रमों को एक इंसान की कोशिश और मेहनत के परिणामस्वरूप देखने की हिमायत की है। किताब में 12 अध्याय हैं। इन अध्यायों में राम के जन्म से लेकर सीताहरण और फिर रावण विजय तक के हर घटनाक्रम को बेहद सरल और सहज भाषा में बताया गया है। रामायण को भारतीय इतिहास में पिरोकर पेश करने वाली यह किताब इसलिए भी पठनीय है, क्योंकि इसे आज के संदर्भों से जोड़कर पेश करने की अच्छी कोशिश भी लेखक ने की है।
 
लेखक
संजय त्रिपाठी
प्रकाशक
सर्वत्र पब्लिशिंग हाऊस
मूल्य
295 रुपये



करुणा जिस दिन क्रांति बनेगी
 
भावनाओं की ताकत से
 
कविताएं हमेशा से भावों को व्यक्त करने का माध्यम रही हैं। जिन बातों को बोलकर व्यक्त नहीं किया जा सकता है, कविताएं आसानी से कर जाती हैं। इसी खूबी के साथ कवि राधेश्याम भारती इस किताब में कई मुद्दों पर चोट करने में कामयाब हुए हैं। 154 पेज की इस किताब में अलग-अलग विषयों पर कुल 199 कविताएं हैं।

हर कविता अपने आप में सार्थक है। 'जिस पैसे से गंध न आए', 'मत पूछो मेरे गांव का नाम', 'बड़ी मेहनत से बांधा', 'और की पीड़ा उसमें', 'हर बार मौत की विजय हुई' जैसी कुछ कविताएं पाठक को भीतर तक झकझोरने की विशेषता रखती हैं। कुछ कविताओं में कल्पना की उड़ान है। कुछ में आवाम की पीड़ा। दिलचस्प यह भी है कि इलाहबाद के अजबैया गांव के राधेश्याम भारती मूलतः कवि नहीं हैं, बल्कि वह टेलीकॉम विभाग से सेवानिवृत्त हैं। 
लेखक
राधेश्याम भारती
प्रकाशक
गुफ्तगू पब्लिकेशन इलाहाबाद
मूल्य
150 रुपये

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