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'मानवीय अनुभवों की सच्ची कहानियां सुनाना कला का काम'

Tue, 20 Mar 2018 09:40 PM IST
जॉन गार्डनर
जॉन गार्डनर Updated Tue, 20 Mar 2018 09:40 PM IST
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Biography of John Gardner- American novelist, essayist, literary critic and university professor
John Gardner

जैसा कि हर लेखक जानता है कि लेखक की क्षमता कुछ-कुछ रहस्यात्मक होती है। वह किसी भी दिन लिखना शुरू कर सकता है। जब भावनाओं का प्रवाह बहने लगता है और अदृश्य दीवार गिर जाती है, तो लेखक आसानी से एक से दूसरी वास्तविकता की ओर बढ़ने लगता है। हर लेखक इस अजीब और जादुई क्षणों का अनुभव करता है।

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जिस तरह कुछ लोग राजनीति या फुटबॉल या अज्ञात उड़नतश्तरियों को पसंद करते हैं, मैं दर्शन को पसंद करता हूं। कॉलेज के बुकस्टोर में मैंने उपन्यासों की तुलना में दर्शन की किताबें काफी पढ़ीं। इसलिए मेरे लेखन में दर्शन के तत्व हैं, लेकिन मेरे उपन्यासों का दर्शन से सीधा संबंध नहीं है। मैं लोगों के बारे में किताब या उपन्यास लिखता हूं।
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मुझे मानवीय जीवन की जिस नाटकीयता में रुचि है, उनकी जड़ें गंभीर दार्शनिक सवालों में निहित हैं। और मेरा सरोकार वास्तविक दार्शनिक खोजों के साथ-साथ लोगों से होता है। इसलिए मैं दार्शनिक नहीं, उपन्यासकार हूं। उपन्यास का मुख्य विषय हमेशा से मानवीय भावना, मूल्य और विश्वास रहे हैं।
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एक अच्छे उपन्यास के पहले पृष्ठ पर हम मात्र कुछ शब्दों को पढ़ते हैं और फिर यह भूल जाते हैं कि हम मुद्रित शब्दों को पढ़ रहे हैं, फिर हम छवियां देखने लगते हैं। खुली पहाड़ी पर खड़े होकर मुझे लगता है कि मेरे कदम सिर के ऊपर हैं। इच्छा की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन इच्छा की जरूरत होती है। कला का काम है क्षण-दर क्षण की अद्भुत कहानियां सुनाना, जो मानवीय अनुभवों के प्रति सच्ची होती हैं।
अमेरिकी उपन्यासकार

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