{"_id":"5d5f223b8ebc3e6c2c2e3632","slug":"antardhwani-krishna-is-a-god-who-constantly-tries-to-become-humans","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतर्ध्वनि : कृष्ण ऐसे देव हैं, जो निरंतर मनुष्य बनने की कोशिश करते रहे","category":{"title":"Literature","title_hn":"साहित्य","slug":"literature"}}
अंतर्ध्वनि : कृष्ण ऐसे देव हैं, जो निरंतर मनुष्य बनने की कोशिश करते रहे
Fri, 23 Aug 2019 04:46 AM IST
Avdhesh Kumar
राममनोहर लोहिया
राममनोहर लोहिया
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 23 Aug 2019 04:46 AM IST
विज्ञापन
krishna
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृष्ण हैं कौन? गिरधर, गिरधर गोपाल! वैसे तो मुरलीधर और चक्रधर भी हैं, लेकिन कृष्ण का गुह्यतम रूप तो गिरधर गोपाल में ही निखरता है। कान्हा को गोवर्धन पर्वत अपनी कानी उंगली पर क्यों उठाना पड़ा था? इसलिए न कि उन्होंने इंद्र की पूजा बंद करवा दी और इंद्र का भोग खुद खा गए।
इंद्र ने नाराज होकर पानी, ओला, पत्थर बरसाना शुरू किया, तभी तो कृष्ण को गोवर्धन उठाकर अपने गो और गोपालों की रक्षा करनी पड़ी। कृष्ण के पहले भारतीय देव आसमान के देवता हैं। निस्संदेह अवतार कृष्ण के पहले से शुरू हो गए।
किंतु त्रेता के राम ऐसे मनुष्य हैं, जो निरंतर देव बनने की कोशिश करते रहे। इसीलिए उनमें आसमान के देवता के अंश कुछ अधिक हैं। द्वापर के कृष्ण ऐसे देव हैं, जो निरंतर मनुष्य बनने की कोशिश करते रहे। उनमें उन्हें संपूर्ण सफलता मिली।
विज्ञापन
राम त्रेता के मीठे, शांत और सुसंस्कृत युग के देव हैं। कृष्ण पके, जटिल, तीखे और प्रखर बुद्धि युग के देव हैं। राम गम्य हैं, कृष्ण अगम्य हैं। कृष्ण ने इतनी अधिक मेहनत की कि उनके वंशज उन्हें अपना अंतिम आदर्श बनाने से घबड़ाते हैं, यदि बनाते भी हैं तो उनके मित्रभेद और कूटनीति की नकल करते हैं, उनका अथक निस्व उनके लिए असाध्य रहता है।
इसीलिए कृष्ण हिंदुस्तान में कर्म के देव न बन सके। कृष्ण ने कर्म राम से ज्यादा किए हैं। कितने संधि, विग्रह और प्रदेशों के आपसी संबंधों के धागे उन्हें पलटने पड़ते थे। यह बड़ी मेहनत और बड़ा पराक्रम था। इसका यह मतलब नहीं कि प्रदेशों के आपसी संबंधों में कृष्णनीति अब भी चलाई जाए।
कृष्ण जो पूर्व-पश्चिम की एकता दे गए, उसी के साथ-साथ उस नीति का औचित्य भी खत्म हो गया। बच गया कृष्ण का मन और उनकी वाणी। और बच गया राम का कर्म। अभी तक हिंदुस्तानी इन दोनों का समन्वय नहीं कर पाए हैं। रास का कृष्ण और गीता का कृष्ण एक हैं।
विज्ञापन
इंद्र ने नाराज होकर पानी, ओला, पत्थर बरसाना शुरू किया, तभी तो कृष्ण को गोवर्धन उठाकर अपने गो और गोपालों की रक्षा करनी पड़ी। कृष्ण के पहले भारतीय देव आसमान के देवता हैं। निस्संदेह अवतार कृष्ण के पहले से शुरू हो गए।
विज्ञापन
किंतु त्रेता के राम ऐसे मनुष्य हैं, जो निरंतर देव बनने की कोशिश करते रहे। इसीलिए उनमें आसमान के देवता के अंश कुछ अधिक हैं। द्वापर के कृष्ण ऐसे देव हैं, जो निरंतर मनुष्य बनने की कोशिश करते रहे। उनमें उन्हें संपूर्ण सफलता मिली।
विज्ञापन
राम त्रेता के मीठे, शांत और सुसंस्कृत युग के देव हैं। कृष्ण पके, जटिल, तीखे और प्रखर बुद्धि युग के देव हैं। राम गम्य हैं, कृष्ण अगम्य हैं। कृष्ण ने इतनी अधिक मेहनत की कि उनके वंशज उन्हें अपना अंतिम आदर्श बनाने से घबड़ाते हैं, यदि बनाते भी हैं तो उनके मित्रभेद और कूटनीति की नकल करते हैं, उनका अथक निस्व उनके लिए असाध्य रहता है।
इसीलिए कृष्ण हिंदुस्तान में कर्म के देव न बन सके। कृष्ण ने कर्म राम से ज्यादा किए हैं। कितने संधि, विग्रह और प्रदेशों के आपसी संबंधों के धागे उन्हें पलटने पड़ते थे। यह बड़ी मेहनत और बड़ा पराक्रम था। इसका यह मतलब नहीं कि प्रदेशों के आपसी संबंधों में कृष्णनीति अब भी चलाई जाए।
कृष्ण जो पूर्व-पश्चिम की एकता दे गए, उसी के साथ-साथ उस नीति का औचित्य भी खत्म हो गया। बच गया कृष्ण का मन और उनकी वाणी। और बच गया राम का कर्म। अभी तक हिंदुस्तानी इन दोनों का समन्वय नहीं कर पाए हैं। रास का कृष्ण और गीता का कृष्ण एक हैं।