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अंतर्ध्वनि : जीवंत रचना के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता आवश्यक शर्त नहीं है

Tue, 20 Aug 2019 01:42 AM IST
इयुजेनियो मोन्ताले इयुजेनियो मोन्ताले
इयुजेनियो मोन्ताले Published by: इयुजेनियो मोन्ताले Updated Tue, 20 Aug 2019 01:42 AM IST
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antardhwani : Conceptual commitment is not a necessary condition for a vibrant creation
सांकेतिक तस्वीर
जीवन की मौजूदा स्थितियों ने अब तक अतीत के चिह्नों को मिटाया नहीं है। हम बहुत तेजी से दौड़ते हैं, फिर भी कहीं पहुंचते नहीं। नया मनुष्य एक प्रयोगात्मक अवस्था में है। वह देखता है, पर विचार करने में असमर्थ है। सड़क पर चलते आदमी को भी विशिष्ट होने का अधिकार है। वह भी अपने बारे में यह भ्रम रख सकता है कि सच्चाई को जिस तरह वह जानता है, वह तमाम बुद्धिजीवियों की उपलब्धियों से ज्यादा मौलिक है। पर भीड़ का मनुष्य भीड़ की तमाम बुराइयों का शिकार है। 
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हम में से कोई इससे बचा नहीं है। कलाकार का अलग-थलग पड़ जाना एक ऐसे समय में लाजिमी है, जब कर्म और ज्ञान दो विपरीत दिशाओं के यात्री हैं और कभी-कभार केवल संयोग से ही मिलते हैं। एक जीवंत काव्य-रचना के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता आवश्यक और पर्याप्त शर्त नहीं है, और न ही वह स्वयं में कोई नकारात्मक स्थिति है।
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हर सच्चे कवि की अपने तरीके से एक प्रतिबद्धता होती है...हां, यह स्वाभाविक है कि पेशेवर कवियों ने अक्सर अपने संरक्षकों, युवराजों और अभयदाताओं के प्रति अपने उदगार व्यक्त किए हैं, लेकिन कविता का इतिहास ऐसी महान रचनाओं का इतिहास भी है, जिन्होंने किसी भी किस्म की निरंकुशता को स्वीकार नहीं किया है। कोई भी कविता अपने समय में प्रचलित प्रतिबद्धता के अर्थ को पूरा करे या न करे, पर वह अपने समय का प्रत्युत्तर जरूर होती है। 
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कविता आज की कला में बखूबी अंट सकती है, पर आज के समाज में कवियों की स्थिति? सामान्यतया वह बहुत अच्छी नहीं है। कुछ कवि भूखे मर जाते हैं, कुछ जो दूसरा कुछ काम करते रहते हैं, वे बेहतर जीवन यापन कर लेते हैं। कुछ कवि निर्वासन में चले जाते हैं, कुछ अपने पीछे बिना कोई निशानी छोड़े अदृश्य हो जाते हैं। यह केवल समाज की गलती नहीं है, काफी हद तक इसमें कवियों का भी दोष है!

-सुप्रसिद्ध इतालवी कवि
 
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