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'प्यार ऐसा आईना है, जिसमें राक्षस भी आकर्षक दिखता है'
अल्बर्तो मोराविया
Updated Mon, 26 Feb 2018 01:56 PM IST
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हमारे विचार, कानून, और रिवाज इस तरह से होने चाहिए कि हर पीढ़ी उसका मालिक होने के बजाय संरक्षक बन जाए। और हर पीढ़ी का दायित्व है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाए। यह वही चीज है, जिसके कारण हम अपने चरित्र का निर्माण करने के लिए प्रेरित होते हैं, न कि अपनी स्वतंत्र इच्छाशक्ति से।
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इन दिनों दुनिया कुछ इतनी तेजी से बन और बदल रही है कि कोई अपने मन के मुताबिक काम नहीं कर सकता, बल्कि लोगों को वह करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो दूसरे लोग चाहते हैं। इसका कारण यह है कि पैसे का सवाल हर चीज में शामिल होता है। हम क्या करते हैं, हम कौन हैं, हम क्या बनना चाहते हैं, हमारे काम और हमारी आकांक्षाएं क्या हैं और यहां तक कि अपने प्रियजनों के साथ संबंधों में भी पैसे का सवाल शामिल होता है।
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मगर हम जानते हैं कि प्यार एक ऐसा आईना है, जिसमें राक्षस भी आकर्षक दिखाई देता है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा कोई समय होगा, जब मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं होगा। जब आप ईमानदार नहीं होते हैं, तभी आपको ढोंग करने की जरूरत होती है और ढोंग करते हुए आप अपने ऊपर से यकीन खो देते हैं। यह हर आस्था का मूल सिद्धांत है। एक लेखक अपने विश्वासों के आधार पर ही जीवित रहता है। मुझे नहीं लगता कि नकारात्मक व्यक्तित्व के आसपास कोई अच्छा उपन्यास लिखा जा सकता है। हर सच्चा लेखक एक पक्षी की तरह है; जो एक ही गीत दोहराता है, सारी जिंदगी वह एक ही विषय पर लिखता है। मेरे लिए वह विषय हमेशा बगावत रहा।
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-इटली के अग्रणी उपन्यासकार