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'वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को इससे नई धार मिली'

Sun, 17 Dec 2017 02:15 PM IST
अभियान डेस्क/ अमर उजाला
अभियान डेस्क/ अमर उजाला Updated Sun, 17 Dec 2017 02:15 PM IST
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A reader view, World Heritage status to kumbh mela gets new torrent of Vasudhaiva kutumbakam

यूनेस्को द्वारा भारत के चार पवित्र शहरों- हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन में प्रत्येक चार वर्षों के अंतराल के बाद लगने वाले कुंभ मेले को 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' (वर्ल्ड हेरिटेज) का दर्जा दिया जाना, न केवल लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी भारत की सभ्यता, संस्कृति एवं आध्यात्मिक मान्यताओं एवं आस्थाओं पर अंतर्राष्ट्रीय मुहर लगने के समान है, बल्कि हमारी सामूहिक एकता की पराकाष्ठा को संबोधित करते सूत्र 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के प्रतीकों को भी इससे एक नई धार मिली है।

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कुंभ मेले को वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा प्रदान करते समय यूनेस्को ने इसे शांतपूर्ण तरीके से आयोजित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन करार दिया है। उल्लेखनीय है कि 'योग' और 'नौरोज' के बाद दो वर्षों के भीतर 'वर्ल्ड हेरिटेज' का दर्जा पाने वाला कुंभ विश्व का तीसरा धार्मिक मेला है।
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जिस 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश आदिकाल से हमारे धर्माचार्यों, ऋषि-मुनियों, साधु-संतों, समाज सेवकों और समाज सुधारकों द्वारा संपूर्ण विश्व को दिया जाता रहा है और 'विविधता में एकता' जो इस देश की न केवल पहचान है, बल्कि सारे देश को एक सूत्र में बांध कर रखने में समर्थ हैं।
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हरिद्वार से अरुण कुमार, पाठक

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