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Up Election 2022: सत्ता के संग्राम में मुद्दों की हकीकत को समझ नहीं पाए राजनीतिक पंडित, इसलिए दोबारा आई योगी सरकार

Dr. Praveen Tiwari डॉ.प्रवीण तिवारी
Updated Sat, 12 Mar 2022 11:52 AM IST
सार

मुस्लिम-यादव समीकरण समाजवादी पार्टी के साथ थे और यह स्पष्टत: मैंने अपनी यात्रा के दौरान देखा, लेकिन जब मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से बीजेपी के खिलाफ एकजुट होता है, तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण अपने आप शुरू हो जाता है। एक माहौल बनने लगता है जिसमें हिंदू मतदाता को लगता है कि सारे मुस्लिम मतदाता एक साथ जा रहे हैं, तो हमें भी यही करना चाहिए।

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Yogi Adityanath Won a Historic Second Term,  BJP will once again form government
उत्तर प्रदेश में फिर से योगी का सरकार - फोटो : Twitter

विस्तार

पिछले 2 महीनों से जारी घमासान विराम पर आ चुका है। यह स्पष्ट हो गया है कि पांचों राज्यों में किसकी सरकार बन रही है। यहां तक कि उत्तराखंड मणिपुर और गोवा जैसे राज्यों में भी जोड़-तोड़ की गुंजाइशों से परे, पूर्ण बहुमत के साथ बीजेपी की सरकार बनी है। यह बीजेपी के लिए अपेक्षाओं से परे सफलता कही जा सकती है।

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उत्तर प्रदेश में 6000 किलोमीटर की यात्रा और 272 विधानसभा सीटों को मैंने amarujala.com के लिए कवर किया। 2 महीने की यात्रा में उत्तर प्रदेश के मिजाज को जितने करीब से जाना, उतने करीब से किसी अन्य राज्य को नहीं। जिस वक्त मैं उत्तर प्रदेश में था तब लग रहा था कि बीजेपी 300 के आंकड़े को छूने का दावा यूं ही नहीं कर रही। इसके बाद समाजवादी पार्टी की रैलियों, गठबंधनों, बीजेपी से टूटकर सपा में आने वालों आदि का दौर शुरू हुआ।
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इसके बाद से माहौल बदलना शुरू हुआ और लोगों को लगने लगा कि अखिलेश यादव एक तगड़ी लड़ाई देने जा रहे हैं, उन्होंने लड़ाई लड़ी भी। उनकी सीटें, वोट शेयर काफी बढ़ा है और जिन सीटों पर वह हारे हैं, वहां भी उनके प्रत्याशियों ने सीधी टक्कर बीजेपी को दी है। कुछ जगहों पर तो बहुत ही नजदीकी मुकाबला रहा है।
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मेरा विश्लेषण, मैंने चुनाव के पहले ही कह दिया था। यहां तक कि 'सत्ता का संग्राम' के कार्यक्रमों में आप इसको अब भी सुन सकते हैं, जहां एक ही मंच पर बीजेपी के खिलाफ बोलने के लिए बीएसपी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता-नेता होते थे। शो में बहुत हो हल्ला होता था और बीजेपी बुरी तरह से घिर जाती थी। फिर मेरा सवाल होता था कि यही तो बीजेपी की ताकत है आप एक ही चीज में साथ हैं, वह है बीजेपी को घेरना, लेकिन मतदाता इस विधि से नहीं चलता। उसे तो आप में से किसी एक को चुनना है।

लचर दिखा विपक्षी खेमा

आप नतीजों में सीटों के समीकरण देखेंगे तो बहुजन समाज पार्टी, जो कि इन चुनावों में साफ होती दिखती है, वह साफ नहीं हुई है बल्कि उसने कड़ी टक्कर दी है, लेकिन यह कड़ी टक्कर उसके लिए फायदा साबित होने के बजाय समाजवादी पार्टी के लिए खतरनाक साबित हुई। यही हाल कांग्रेस के कुछ प्रत्याशियों का रहा है। हालांकि कांग्रेस को दो से 3 सीटों से ज्यादा की उम्मीद मैंने पहले भी नहीं जताई थी। 

अब यदि मुद्दों की बात करें तो मेरे लिए उत्तर प्रदेश का पूरा चुनाव बिल्कुल भी चौंकाने वाला नहीं रहा, क्योंकि जमीन पर जाकर जब लोगों से बात की, तो तीन चार बातों में ही सारे मुद्दे सिमटकर आ गए थे।

बीजेपी के पक्ष के मुद्दों की बात करें तो अपराधियों पर लगाम, ऑर्गेनाइज्ड क्राईम को खत्म करने का दावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार द्वारा दी गई योजनाओं की एक लंबी लिस्ट, जिस पर पक्ष-विपक्ष की लंबी बहस होती थी, लेकिन फिर भी बताने के लिए बहुत सारी योजनाएं थे। उदाहरण के लिए पक्के मकान बनाना, शौचालय बनाना, उज्वला योजना, मुफ्त राशन आदि इत्यादि।


बेरोजगारी बना रहा बड़ा मुद्दा

यदि बीजेपी के खिलाफ और समाजवादी पार्टी के पक्ष के मुद्दों की बात करें तो बेरोजगारी पर बीजेपी बुरी तरह से घिरी, क्योंकि वह युवा जो प्रधानमंत्री मोदी और योगी के चेहरे से प्रभावित थे, वह भी बेरोजगारी पर उनसे नाराज दिखे। कई परीक्षाओं में लीक होने वाले पर्चों ने भी युवाओं की नाराजगी बढ़ाई। दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से शहरों में 1 दिन पहले आकर अपने एग्जाम के लिए रुकने वाले बच्चों के जब पेपर लीक होते हैं, तो उन्हें किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसे भी मैंने बहुत नजदीक से देखा। हालांकि यह बात तभी स्पष्ट हो गई थी कि चुनाव में यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं होगा।

पुरानी पेंशन बहाली, आशा बहनों का मुद्दा, आंगनवाड़ी की बहनों के पैसे बढ़ाए जाने का मुद्दा, ऐसी बहुत सी बातें मेरे सामने आई, जिसमें सरकार से बहुत मांगे रखी गई थी। यहां तक कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कई जगहों पर मैंने प्रदर्शन भी होते देखे।

जब भी चुनाव आते हैं तो प्रदर्शनकारी इसे एक संभावनाशील समय की तरह लेते हैं क्योंकि उन्हें पता है यही वह समय होता है जब नेता और पार्टियां उनकी बातों को सुनते हैं। हालांकि इस मुद्दे के बारे में भी स्पष्ट था कि यह चुनावी मुद्दा या वोटों में परिवर्तित होने वाला मुद्दा नहीं बनेगा।

Yogi Adityanath Won a Historic Second Term,  BJP will once again form government
योगी आदित्यनाथ ने चुनाव जीतकर तोड़े कई रिकॉर्ड - फोटो : Twitter

'बुल्डोजर बाबा' शब्द का जलवा

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के लिए सबसे उपयोगी मुद्दा साबित हुआ अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश का। अखिलेश यादव ने अपनी सभाओं में तीखे प्रहार किए और उनकी सभाओं को अच्छा प्रतिसाद भी मिला। इन्हीं की वजह से उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर था लेकिन इन्हीं रैलियों के दौरान वो एक बड़ी गलती कर गए। उन्होंने एक अखबार का जिक्र करते हुए 'बुल्डोजर बाबा' शब्द को बहुत ज्यादा प्रमोट किया। बीजेपी ने इस जुमले को पकड़ लिया। यहां तक कि योगी आदित्यनाथ की रैलियों में बुलडोजर खड़े दिखाई देने लगे।

इन बुलडोजरों को देखकर प्रसन्नता जाहिर करते, योगी आदित्यनाथ के वीडियो वायरल हुए। इससे स्पष्ट था कि बीजेपी ने इसे एक आरोप की तरह ना लेकर एक सम्मान की तरह लिया।

हकीकत तो यहीं है की बीजेपी दो बातों में पूर्णतः सफल रही। पहला स्वयं को अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही करने वाला बताने में और दूसरा समाजवादी पार्टी को अपराधियों का समर्थन करने वाली पार्टी बताने में। उत्तर प्रदेश के व्यापारियों व्यवसायियों ने मेरे लगभग हर कार्यक्रम में चौथ वसूली, गुंडागर्दी की बातें कहीं और वह वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था से प्रसन्न दिखाई दिए। हालांकि बढ़ती महंगाई कच्चे माल के बढ़ते दाम आदि पर उनकी नाराजगी बहुत स्पष्ट थी। फिर भी उन्हें उम्मीद थी कि आने वाले समय में बीजेपी जो कर सकती है, वह समाजवादी पार्टी नहीं कर पाएगी।


जब मैं उत्तर प्रदेश की यात्रा से वापस आया तो मेरा आकलन बीजेपी के लिए 300 सीटों का था। समाजवादी पार्टी की रैलियों के दौरान अखिलेश यादव के आत्मविश्वास को जब बीजेपी के कद्दावर मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य और अन्य मंत्रियों विधायकों का समर्थन मिला तो यह आंकड़ा 270 पर आया। मैंने लिखित में अपने कई सहयोगियों को यह आंकड़ा दिया था कि बीजेपी 270 तक अवश्य पहुंचेगी। यह बात एग्जिट पोल आने से पहले की थी।

इसके बाद सोशल मीडिया पर मुझ से कई बार सवाल पूछे गए कि आप उत्तर प्रदेश घूम कर आए हैं आपको क्या लगता है? उन प्रश्नों के जवाब में, मैं अपने इस आंकड़े पर बना रहा कि बीजेपी 270 का आंकड़ा छूने जा रही है। समाजवादी पार्टी के विषय में मैंने 100 सीटों की भविष्यवाणी की थी और यह ज्योतिषीय विद्या से नहीं समाजवादी पार्टी के सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव पर निर्भर रहने, कोई दूसरा चेहरा ना होने और भयमुक्त और अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश के विषय में उनके पास कोई जवाब नहीं होने के आधार पर कही थी। 

अखिलेश यादव ने युवाओं को काफी प्रभावित किया उनके लैपटॉप वितरण ने तो उत्तर प्रदेश में एक माहौल बना दिया। यह भी सत्य है कि रैलियों में आने वाली भीड़ और युवाओं पर बने उनके अच्छे प्रभाव को वह वोटों में तब्दील नहीं कर पाए। इसके अतिरिक्त एक और बड़ा मुद्दा जो एक तरफा बीजेपी के लिए गया और जिसके आधार पर मैंने 300 पार के आंकड़े के विषय में विचार किया था वह था- हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण।

हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण एक ऐसी घटना है जिसको समझने के लिए आपको मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण समझना होगा। मुस्लिम-यादव समीकरण समाजवादी पार्टी के साथ थे और यह स्पष्टत: मैंने अपनी यात्रा के दौरान देखा, लेकिन जब मुस्लिम मतदाता पूरी तरह से बीजेपी के खिलाफ एकजुट होता है, तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण अपने आप शुरू हो जाता है। एक माहौल बनने लगता है जिसमें हिंदू मतदाता को लगता है कि सारे मुस्लिम मतदाता एक साथ जा रहे हैं, तो हमें भी यही करना चाहिए।

यूं तो उत्तर प्रदेश की राजनीति जातियों में बंटी हुई है और इसका असर हमेशा देखा जाता है। सातवें चरण में पूर्वांचल की सीटों पर किस तरह पटेल समाज का जोर चलता है और किस तरह बहुजन समाज पार्टी कई क्षेत्रों में आज भी अपने वोट बैंक को पूरी तरह बरकरार रख पाई है, यह इससे स्पष्ट है।

जब भी वोटों का ध्रुवीकरण होता है तब जातियों का यह समीकरण पीछे छूट जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी हर रैली में इस बात का ध्यान रखा। प्रधानमंत्री मोदी अब केंद्र की राजनीति का चेहरा हैं, उनके बयान बहुत सोचे समझे होते हैं। वह इन विषयों पर बहुत खुलकर नहीं बोलते हैं, उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विषय में कई जगहों पर कहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो बहुत खुलकर ''ईद पर बिजली आती थी, दिवाली पर नहीं आती थी'' जैसे बयान दिए। उन्होंने कहा मैं भगवा पहनता हूं और पूरा उत्तर प्रदेश भगवा है। ऐसी बातों को भी खुले मंच से कहा। आप यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों को सुने तो बहुत स्पष्ट हो जाएगा कि वह हिंदुत्व के एजेंडे पर बिल्कुल खुलकर मैदान में उतरे। उनका आत्मविश्वास सही था कि उनका हिंदुत्व का चेहरा हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करेगा। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति से उत्तर प्रदेश की जनता हमेशा नाराज रही है।


संभावनाओं की तलाश

इस बार असदुद्दीन ओवैसी ने भी अपनी ताल ठोकी और वह समाजवादी पार्टी के खिलाफ बोलते दिखाई दिए। उन्हें बीजेपी की बी टीम भी कहा गया लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता क्योंकि उनकी राजनीति मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि वह सिर्फ वोट काटने के लिए यहां आए थे। ओवैसी जानते थे कि मुस्लिम मतदाता एक चेहरे की तलाश में है और वह मुस्लिमों के सबसे बड़े नेता बनने का सपना देखते हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार उनके लिए बहुत संभावनाशील प्रदेश है। उनकी राजनीति हैदराबाद के आसपास तक सीमित है लेकिन वह अपने पैर पसारने के प्रयास कर रहे हैं। कुल मिलाकर धर्म के आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण और अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश के मुद्दे ने बीजेपी को दोबारा सत्तासीन किया है और इन चुनावों में अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी भी दिखी है।

राम मंदिर के निर्माण कार्य को मैं स्वयं देख कर आया। निश्चित तौर पर जिस तरह विश्वनाथ कॉरिडोर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व जनता को समर्पित किया गया उसी तरह राम मंदिर को लोकसभा चुनाव के पहले समर्पित किया जाएगा। यदि समाजवादी पार्टी ने और अन्य विपक्षी दलों ने मिलकर कोई रणनीति नहीं बनाई तो लोकसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश से बीजेपी को अपेक्षित सफलता मिलेगी।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। 

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