विश्व साहित्य का आकाश: द वेजिटेरियन और कोरियन समाज
उपन्यास की नायिका योन्ग-हाई के लिए शाकाहार जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। यह कहानी तीन हिस्सों में तीन लोगों के नजरिए से कही गई है। तीनों नजरिए नायिका के नजरिए से बिल्कुल विपरीत हैं।
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विस्तार
‘द वेजिटेरियन’ किताब की लेखिका हान कान्ग कोरिया की पहली रचनाकार हैं, जिन्हें 2016 का मैन बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार प्राप्त हुआ। निर्णायकों ने ‘द वेजिटेरियन’ उपन्यास को इसकी ‘चकित करने वाली गहराई’ के लिए सराहा। हान कान्ग की यह किताब 2007 में कोरियन भाषा में प्रकाशित हुई थी।
दक्षिण कोरिया में 27 नवम्बर 1970 को जन्मी हान कान्ग ने अपनी ही कहानी ‘द फ्रुट ऑफ माई वूमन’ को उपन्यास में ढ़ाला है। उपन्यास की नायिका योन्ग-हाई के लिए शाकाहार जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। यह कहानी तीन हिस्सों में तीन लोगों के नजरिए से कही गई है। तीनों नजरिए नायिका के नजरिए से बिल्कुल विपरीत हैं।
योन्ग-हाई एक सामान्य घरेलू स्त्री है। एक दिन वह बहुत बेचैन करने वाला स्वप्न देख कर उठती है। स्वप्न में वह खुद को भयंकर जीव में बदलता देखती है, यह जीव मांसाहारी से शाकाहारी बन चुका है।
मनुष्य की क्रूरता का प्रतिरोध
नायिका को स्वप्न में खून-गोश्त दीखता है, मनुष्य की क्रूरता के प्रतिरोध में वह पेड़ बन जाना चाहती है। यह सब करने में अचेतन का प्रमुख हाथ है। यह घरेलू कहानी योन्ग-हाई के पति, उसके बहनोई तथा उसकी बड़ी बहन के विचारों को प्रकट करती है।
एक ऑफिस में काम करने वाला उसका पति बहुत नकारा आदमी है। नायिका के अनुसार वह खलनायक नहीं है, स्वयं पीड़ित है। बड़ी साली की तुलना में अपनी पत्नी उसे डल लगती है, जो अक्सर पुरुष को लगती है। योन्ग-हाई का बहनोई कलाकार है और शुरू से योन्ग-हाई को पसंद करता है, उसे पहले अपनी भावनाओं का स्पष्ट भान नहीं था। योन्ग-हान की बड़ी बहन इन-हाई काम के बोझ से दबी हुई है, कॉस्मिक स्टोर चलाती है।
कोरियन भाषा में योन्ग का अर्थ है, बुद्धिमान, प्रतिभावान, हाई का मतलब फूल, पंखुड़ी, वीर, निडर। नायिका के नाम का अर्थ हुआ बुद्धिमान, साहसी, निडर पंखुड़ी। नायिका वास्तव में साहसी और निडर, फूल-पंखुंडी जैसी कोमल है। एक दिन योन्ग-हाई कहती है, ‘मैंने एक स्वप्न देखा’, वह मांसाहार भोजन बनाना-खाना छोड़ देती है।, फ्रिज से निकाल कर सारी मांसाहारी चीजें बाहर फेंक देती है। परिवार उसे जबरदस्ती गोश्त खिलाने की चेष्टा करता है।
योन्ग-हाई का वजन घटने लगता है, अनिद्रा होने लगती है, यौनेच्छा नष्ट हो जाती है। ऐसी पत्नी का पति क्या करे? पति के शरीर से मांस की गंध आने के कारण वह पति को पास नहीं आने देती है। चमड़े से बनी हर चीज का उपयोग बंद कर देती है। धीरे-धीरे वह आत्महंता हो जाती है। व्यवहार में मुमूर्षा विकसित होने लगती है। कोई समझने का प्रयास नहीं करता है, सब आलोचना करते हैं।
पति योन्ग-हाई को तलाक दे देता है। हिस्टीरिया, डेल्यूशन और कमजोर मानसिक स्थिति का ठप्पा लगा कर मानसिक अस्पताल में भर्ती कर दिया जाता है, वहां बहुत भयंकर होता है।
योन्ग-हाई का पिता जानवरों एवं बेटी के साथ बुरा व्यवहार करता है। अट्ठारह साल की होने तक वह उसे पीटा करता था। अभी भी वह उसे थप्पड़ मारता है, और जबरदस्ती उसके मुंह में मांस ठूंसना चाहता है, प्रतिकार में वह स्वयं की कलाई काट लेती है। संपूर्ण वीभत्स चित्रण मन में जुगुप्सा जगाता है।
मानसिक अस्पताल से निकल कर योन्ग-हाई एक छोटे फ्लैट में रहने लगती है, मन का खाती-पीती है, खुश दिखती है, उसका वीडियो कलाकार जीजा उसके यहां आने-जाने लगता है। वह उसके प्रति जजमेंटल नहीं होता है। दोनों में अच्छी समझदारी विकसित होने से वह सामान्य जीवन व्यतीत करने लगती है।
उपन्यास में जीजा मिस्टर चेओन्ग और योन्ग-हाई वाला चैप्टर कलात्मक मेरी दृष्टि से सर्वोतम है। यहां कला को एक आध्यात्मिक ऊंचाई दी गई है, कलाकार का मन सृजन के समय यौन भावना से परे रहता है। पर उसकी बड़ी बहन दोनों को मानसिक अस्पताल भिजवा देती है। वहां बहन का पति मानसिक रूप से स्वस्थ पाया जाता है, पुलिस द्वारा कुछ ही दिन में छोड़ दिया जाता है, वह सदा के लिए अलोप हो जाता है।
यान्ग-हाई का जीवन मानसिक अस्पताल में एक बार फिर से नरक बनने लगता है। किताब का पहला वाक्य है, ‘मेरी पत्नी के शाकाहारी में परिवर्तित होने से पहले, मैं उसे हर बात में पूरी तरह से सामान्य सोचता था।’ प्रश्न उठता है, कौन है सामान्य? किताब यौन अत्याचार रू-ब-रू एवं यौन सौंदर्य से भी परिचित कराती है।
एक वाक्य है, ‘अब मैं केवल अपने स्तनों का भरोसा कर सकती हूं। मुझे अपने स्तन पसंद हैं; उनसे किसी को मारा नहीं जा सकता है। हाथ, पैर, जीभ, दृष्टि, सब हथियार हैं, जिनसे कुछ भी सुरक्षित नहीं है।’
उपन्यास की दो महत्वपूर्ण बातें
उपन्यास योन्ग-हाई की दो विशेषताओं का उल्लेख करता है, एक उसका ब्रा न पहनना। कोरियन समाज (आज के किसी भी तथाकथित सभ्य समाज) में ब्रा न पहनना बड़ा अजीब माना जाता है। वह ब्रा नहीं पहनती है, उसे इसमें बंधन अनुभव होता है। पति को यह बड़ा अतार्किक लगता है। वह खाती-सोती नहीं है इससे पति को कोई फर्क नहीं पड़ता है, सेक्स से परहेज, उसके जिद्दीपन से वह हैरान है।
दूसरा है उसका पढ़ने का शौक। मालूम नहीं, वह क्या पढ़ती है, बाद में वह कभी पढ़ती हुई नजर नहीं आती है। पति को पढ़ना एक नीरस क्रिया लगती है। हाई सोसाइटी के लोग सार्वजनिक तौर पर मिलने पर किस तरह के दिखावटी संवादों का प्रयोग करते है, बॉस की पार्टी में यह चित्रित है।
अंत की ओर आते हुए उपन्यास में योन्ग-हाई स्वयं को एक वृक्ष मानने लगती है, जिसे केवल पानी और सूर्य की रोशनी की आवश्यकता है। उपन्यास ‘द वेजिटेरियन’ का पहला भाग ‘वेजिटेरियन’ नाम से है जबकि दूसरे हिस्से का शीर्षक ‘ब्लू मैग्नोलियन मार्क’ है। यह हिस्सा वीडियो कलाकार मिस्टर चेओन्ग की ओर से कथा आगे बढ़ता है। ‘फ्लेमिंग ट्रीज’ नाम का तीसरा भाग बड़ी बहन इन-हाई के विचारों, अनुभवों को प्रकट करता है।
अनुवादक डेबोराह स्मिथ के कारण उनका काम इंग्लिश में अनुवादित हो कर देश-विदेश में पहुंचा। ‘द वेजिटेरियन’ उनका पहला उपन्यास है, जो इंग्लिश में पोर्टोबेलो बुक्स द्वारा 2015 में प्रकाशित हुआ है। उनकी दूसरी किताब ‘ह्युमन एक्ट्स’ भी इंग्लिश में इसी प्रकाशन से आ चुकी है। आजकल हान कान्ग सिओल इंस्ट्यूट ऑफ दि आर्ट्स में क्रिएटिव राइटिंग पढ़ाती हैं। पहली किताब ‘द वेजिटेरियन’ की अनुवादक डेबोराह स्मिथ को भी बुकर मिला।
उपन्यास ‘द वेजिटेरियन’ समाज की अनमनीय संरचना, व्यवहार की अपेक्षाओं तथा संस्थानों की कार्य पद्धति को एक-एक कर असफल होता दिखाता है। यहां शाकाहार चुनाव न हो कर एक तरह का पागलपन है। काफ्काई शैली के इस उपन्यास को पढ़ना एक भयंकर दु:स्वप्न से गुजरना है।
नायिका दावा करती है, उसे मात्र पानी और सूर्य की रोशनी चाहिए। काश! उसके पास कोई उच्चतर विजन होता, कोई मूरिंग होती, कोई दर्शन होता, तो वह इस तरह समाप्त न होती। उपन्यास ‘द वेजिटेरियन’ अंत में पाठक के मुंह में एक कसैला स्वाद छोड़ जाता है।
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