विश्व पर्यावरण दिवस 2021 विशेष: बच्चों और पर्यावरण के बीच है एक अटूट नाता
मां-बाप की तरह ही पर्यावरण भी बच्चे के पालन-पोषण में भी अपना एक अहम किरदार निभाता है। एक नवजात बच्चा जब बंद कमरे में रोता है और सारे जतन करने पर भी चुप नहीं होता है लेकिन जब उसे बाहर खुले वातावरण में घुमाया जाता है तो वो चुप हो जाता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यह सर्वविदित है कि प्रकृति और पर्यावरण हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। इनके बिना मानव जाति का धरती पर जीवन की कल्पना करना असंभव जैसा है। मसलन जिन पांच तत्वों जल, थल, वायु, अग्नि और आकाश से मनुष्य के जीवन का अस्तित्व है वे हमारी प्रकृति और पर्यावरण ही की देन हैं, लेकिन समय की विडंबना यह है कि आधुनिकता के इस दौर में मनुष्य अपनी 'जीवनदायिनी' प्रकृति और पर्यावरण को ही हानि पहुंचा रहा है। यही कारण है कि प्रकृति कभी-कभी रक्षक से भक्षक बन कर अपना रौद्र रूप दिखाती है। अभी भी समय है कि हम सतत विकास और पर्यावरण में संतुलन बना कर रखें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां प्राकृतिक संशाधनों से वंचित न रहने पाएं।
नवजात बच्चे, अभिभावक और पर्यावरण में सम्बन्ध
यह आने वाली पीढ़ियां हमारे मासूम और अबोध बच्चे ही हैं जिनका पर्यावरण और प्रकृति से एक विशेष और अटूट नाता है। पर्यावरण और बच्चे एक दूसरे को परस्पर आकर्षित करते हैं। जब बच्चा नवजात होता है तो वह अपने पर्यावरण से ही संवाद करने की शुरुआत करता है। नवजात बच्चे की जो भाषा और इशारे उसके अभिभावक तक नहीं समझ पाते हैं उन इशारों को पर्यावरण समझता है।
मां-बाप की तरह ही पर्यावरण भी बच्चे के पालन-पोषण में भी अपना एक अहम किरदार निभाता है। एक नवजात बच्चा जब बंद कमरे में रोता है और सारे जतन करने पर भी चुप नहीं होता है लेकिन जब उसे बाहर खुले वातावरण में घुमाया जाता है तो वो चुप हो जाता है।
दरअसल, वो पर्यावरण की गोद में जाकर आनंदित हो जाता है उसके आसपास का पर्यावरण उसको आकर्षित करता है। वो संसार की बनाई हर उस चीज़ से रूबरू होना चाहता है जिसे वो 9 महीने जब वो माँ की कोख में था तब नहीं देख पाया था। उसके चाहतों की सीमा आकाश ही है। वो अपने आसपास के पर्यावरण के माध्यम से जीवन के हर रंग में सराबोर होना चाहता है। छोटे-छोटे पक्षी, कोयल की सुरीली आवाज, कौवा का कांव-कांव, पवन नदियों का बहता पानी, रिमझिम होती बारिश यह सभी प्रकृति के आकर्षण केंद्र हैं जो बच्चों को अपनी ओर खींचते हैं।
किशोरावस्था और पर्यावरण
जो बच्चे किशोरावस्था में हैं या उसकी ओर अग्रसर हैं उनका भी पर्यावरण से विशेष प्रेम है। कुछ बच्चे सुबह की व्यायाम से लेकर शाम की सैर तक खुले वातावरण (बाग़-बगीचों) में करना पसंद करते हैं। किशोरावस्था के बच्चों को बारिश की बूंदों में भीगना विशेष रूप से आनंद देता है।
बच्चे पार्क और चिड़ियाघर में जाना विशेष रूप से पसंद करते हैं। उन्हें खुले मैदान में क्रिकेट खेलने का भी शौक रहता है। ऐसे में जरूरी है अभिभावक अपने बच्चों पर नियमित प्रतिबन्ध लगाएं। उन्हें पर्यावरण से अपना सम्बन्ध और संवाद को मजबूत करने का मौका दें। हालाँकि कोरोना महामारी के इस अपवादी दौर में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन पर विशेष प्रतिबन्ध लगाने की जरुरत है। अनुकूल समय आने पर इन प्रतिबंधों में छूट दी जा सकती है।
बच्चों की शिक्षा और पर्यावरण
हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में पर्यावरण का विशेष स्थान है। पर्यावरण को देश के विभिन्न संस्थाओं के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। देश की नई शिक्षा नीति में पर्यावरणीय शिक्षा पर विशेष रूप से जोर दिया गया है। आवश्यकता है इसको समयानुकूल इसे सही रूप से अमलीजामा पहनाया जाए और प्राथमिक स्तर पर भी पर्यावरणीय शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण और नियमन की शिक्षा प्रभावी रूप से दी जाए ताकि वो प्रकृत्ति से हो रहे खिलवाड़ के नुकसानों को समझ सकें और इस तरह वह पर्यावरण के प्रति सजग रहेंगे और आगे चलकर एक जिम्मेदार नागरिक बन समाज के लिए आदर्श स्थापित करेंगे। यह बात यह सत्यापित करती है कि हम अपने पर्यावरण को तभी संरक्षित कर सकते हैं जब हम अपने बच्चों को पर्यावरण से सार्थक रूप से जोड़ेंगे।
पर्यावरण और बच्चों का स्वास्थ्य
इसमें कोई शंका नहीं है और विज्ञानं भी यह प्रमाणित करता है कि बच्चों के स्वास्थ्य में पर्यावरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक स्वच्छ पर्यावरण बच्चों को रोगों से दूर रखता है। इसलिए जरुरी है कि हम एक सभ्य नागरिक की जिम्मेदारी निभाते हुए अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखें और उसे किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाएं। वृक्षारोपण करें। हवा को दूषित न करे। कोरोना के इस दौर में और भी जरुरी हो जाता है कि हम अपने घरों और आसपास में सफाई का विशेष ध्यान रखें। एक बात हमेशा ध्यान रखें कि एक स्वच्छ पर्यावरण ही आपको और आपके बच्चों को निरोग रखने में सहायता करेगा
पर्यावरण में बच्चों की रुचि और जिज्ञासा
स्वीडन की एक पर्यावरण कार्यकर्ता नाम है ग्रेटा थनबर्ग जिसने पर्यावरण के प्रति अपने जूनून से दुनिया को चौंका दिया। 11 दिसम्बर 2019 को ग्रेटा को 'टाइम पर्सन ऑफ़ द ईयर' पुरस्कार से नवाजा गया। हमें भी अपने देश में ऐसे ही जुनूनी बच्चों की पहचान करनी होगी। हमें उन बच्चों को आगे लेकर उन्हें मंच देना होगा जिनके मन में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम और जूनून हैं। जो प्रकृति और पर्यावरण की धरोहरों को संजो कर रखना चाहते हैं। हमें अपने बच्चों के मन में पर्यावरण के प्रति रूचि और जिज्ञासा को जगाना होगा। आखिर यह बच्चे ही आने वाले समय में दुनिया की दिशा और दशा में अपनी भूमिका निभाएंगे।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।