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World cup 2019ः तो क्या ये थी टीम इंडिया की हार की असली वजह?

Dayashankar shuklaदयाशंकर शुक्ल सागर Updated Thu, 11 Jul 2019 06:57 PM IST
एमएस धोनी को क्या संन्यास ले लेना चाहिए?
एमएस धोनी को क्या संन्यास ले लेना चाहिए? - फोटो : सोशल मीडिया
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क्रिकेट में मेरी दिलचस्पी वर्ल्डकप तक है, क्योंकि वर्ल्डकप चार साल में एक बार आता है। मैं भी उन लोगों में से हूं जो एक जमाने से मानते हैं कि क्रिकेट वक्त को बर्बाद करने वाला खेल है। टेस्ट मैच में तो ये बात सौ फीसदी सही थी। लेकिन वन डे और फिर 20-20 ने खेल को थोड़ा दिलचस्प बना दिया, इसीलिए विश्वकप-19 के भारत के तकरीबन सारे मैच देख डाले। 
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टीम इंडिया सर्वाधिक सात मैच जीतकर टैली के टॉप पर पहुंच गई थी। ये वाकई सम्मानजनक स्थिति थी। पूरे देश में उत्साह की लहर थी। सबको उम्मीद थी कि इस बार टीम संतुलित है। हम लगातार मैच जीत रहे हैं, इसलिए अंत में विश्व कप हमारा है। लेकिन सेमीफाइनल का तकरीबन जीता हुआ मैच हम जिस तरह हारे उससे सवाल उठा कि क्या वाकई विराट टीम विश्वकप की ट्रॉफी को जीतने के लिए तैयार थी? क्या हमारा खेल वाकई चैम्पियन वाला था? 

मैच भावना से नहीं बल्कि रणनीति से जीते जाते हैं 
आप भावुक होकर नहीं बल्कि बिलकुल तथ्यों और तर्कों के आधार पर नतीजा निकालिए। केएल राहुल, रोहित शर्मा और कोहली के अलावा तीसरा कौन-सा बल्लेबाज था जिस पर हम हमेशा यकीन कर सकते थे? इसी तरह बुमराह के अलावा और कौन-सा गेंदबाज था जिसे बल्लेबाज के ठीक कदमों पर गेंद फेंकने का जादू आता हो।

दरअसल, आप कह सकते हैं कि हर गेंदबाज बुमराह नहीं हो सकता जैसे हर बल्लेबाज सचिन नहीं हो सकता। बेशक भुवनेश्वर कुमार, चहल, या बाद में आए शमी या जड़ेजा की गेंदबाजी बुमराह के साए तले आत्मविश्वास से लबरेज रही, इसलिए इस श्रृंखला में गेंदबाजों से किसी को कोई शिकायत नहीं हो सकती। ये अच्छे संकेत हैं क्योंकि इस विश्वकप में भारत के पास पहली बार अच्छे गेंदबाजों की एक फौज तैयार थी। वर्ना हमेशा भारतीय टीम अपने बल्लेबाजों के दम पर ही मैदान में उतरती थी। बुमराह के रूप में हमें गेंदबाजी का बादशाह मिल गया है।
 
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